डिजिटल अरेस्ट से खुला राज: ED ने मुंबई से दो मुख्य आरोपी किए गिरफ्तार

ED ने मुंबई से दो मुख्य आरोपी किए गिरफ्तार
प्रतिक्रियाएँ
Krishna Yadav

Krishna Yadav

0 सेकंड पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Anika Rajput

Anika Rajput

0 सेकंड पहले

Kanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.

Diya Gupta

Diya Gupta

0 सेकंड पहले

Apradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!

CommentsReactionsFeedback

प्रवर्तन निदेशालय ने देशव्यापी साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद के रूप में हुई है। दोनों पर साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग माध्यमों से छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। ED के पणजी जोनल ऑफिस ने जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग जुटाए हैं। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को गोवा की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को 5 दिनों की ED हिरासत में भेज दिया है।


₹2.60 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी से खुला मामला
इस पूरे मामले की जांच गोवा की एक महिला से हुई ₹2.60 करोड़ की साइबर ठगी के बाद शुरू हुई थी। मई-जून 2025 के दौरान साइबर अपराधियों ने महिला को कथित डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लगातार 14 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा था। आरोपियों ने कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाकर महिला से अलग-अलग खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कराई थी। पीड़िता से कुल ₹2.60 करोड़ की ठगी किए जाने के बाद मामले की शिकायत दर्ज कराई गई। गोवा पुलिस की FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर इस मामले के पीछे सक्रिय एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा हुआ।


20 राज्यों तक फैला था साइबर अपराध नेटवर्क
ED की जांच में सामने आया कि यह साइबर अपराध सिंडिकेट केवल गोवा तक सीमित नहीं था बल्कि देश के करीब 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसी को इस नेटवर्क से जुड़ी 300 से अधिक शिकायतों और 163 से अधिक FIR की जानकारी मिली है। इन मामलों में पीड़ितों से कुल ₹417 करोड़ से अधिक की ठगी किए जाने का अनुमान सामने आया है। अलग-अलग राज्यों में लोगों को डिजिटल अरेस्ट, कानूनी कार्रवाई और अन्य तरीकों का डर दिखाकर रकम ऐंठी जाती थी। ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर किया जाता था। ED अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और उनके सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।

 

400 से ज्यादा डमी बैंक खातों का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया कि साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को छिपाने के लिए 400 से अधिक डमी और म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया था। इन खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम को लगातार ट्रांसफर और घुमाया जाता था। इसके बाद कई खातों से नकदी निकालकर रकम को दूसरे माध्यमों से आगे भेजा जाता था। जांच एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया का उद्देश्य पैसों के वास्तविक स्रोत और लेनदेन की कड़ी को छिपाना था। आरोपियों ने कथित तौर पर RBI से लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर्स के माध्यम से नकदी को विदेशी मुद्रा में भी बदला। ED अब इन बैंक खातों, मनी चेंजर्स और उनसे जुड़े लोगों के वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।


₹27,850 करोड़ से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन
ED की जांच में इस सिंडिकेट से जुड़े बैंकिंग नेटवर्क में ₹27,850 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन सामने आने की जानकारी दी गई है। एजेंसी के अनुसार करीब ₹3,000 करोड़ की नकद जमा राशि भी इस नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है। ठगी की रकम को कई बैंक खातों में भेजने के बाद नकदी निकालने और विदेशी मुद्रा में बदलने का तरीका अपनाया जाता था। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर लोगों और संस्थाओं की भूमिका हो सकती है। अलग-अलग खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच के जरिए ED पैसों के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।


करोड़ों की नकदी जब्त, बैंक बैलेंस फ्रीज
ED की कार्रवाई के दौरान विभिन्न ठिकानों पर की गई छापेमारी में करीब ₹3.25 करोड़ की नकदी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा अलग-अलग बैंक खातों में मौजूद ₹30 करोड़ से अधिक की राशि को फ्रीज किया गया है। जांच एजेंसी अब गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और वित्तीय चैनलों की जानकारी जुटा रही है। ED यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि साइबर ठगी की रकम किन लोगों और संस्थाओं तक पहुंचाई जाती थी। देशभर में दर्ज शिकायतों और FIR को जोड़कर इस सिंडिकेट की पूरी संरचना की जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच से सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

 

प्रतिक्रियाएँ
Krishna Yadav

Krishna Yadav

0 सेकंड पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Anika Rajput

Anika Rajput

0 सेकंड पहले

Kanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.

Diya Gupta

Diya Gupta

0 सेकंड पहले

Apradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!

CommentsReactionsFeedback

खबरे और भी है...