समंदर में भारत-जापान की साझा ताकत: चीन को भारत-जापान का सख्त संदेश

Pooja Reddy
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ada khan
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Sai Mehta
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती देने के लिए बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग पर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था पत्र यानी MoA पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल, सूचना साझाकरण और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। दोनों देश स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थन को दोहरा चुके हैं। साथ ही समुद्र में किसी भी देश द्वारा बल या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने की कोशिश का विरोध किया गया है।
चीन को सख्त रणनीतिक संदेश
भारत और जापान के इस बढ़ते रक्षा सहयोग को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों ने किसी देश का नाम लिए बिना समुद्री क्षेत्र में एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की कोशिशों का विरोध किया है। दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच यह रुख रणनीतिक रूप से काफी अहम है। भारत और जापान समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों का यह तालमेल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीतिक क्षमता को और मजबूत कर सकता है।
बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स का साझा इस्तेमाल
नए समुद्री सुरक्षा सहयोग के तहत भारतीय नौसेना और जापानी समुद्री आत्मरक्षा बल यानी JMSDF के बीच लॉजिस्टिक्स सहयोग को बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों की सैन्य इकाइयां एक-दूसरे की बंदरगाह सुविधाओं, रखरखाव और मरम्मत से जुड़ी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर सकेंगी। इससे समुद्र में लंबे समय तक संयुक्त अभियानों को संचालित करने की क्षमता बढ़ेगी। दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र जागरूकता यानी Maritime Domain Awareness को भी मजबूत किया जाएगा। संदिग्ध जहाजों और समुद्री गतिविधियों से संबंधित जरूरी सूचनाओं को साझा करने पर भी जोर दिया जाएगा।
वर्किंग ग्रुप से तेजी से लागू होगा समझौता
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, समझौते को जमीन पर तेजी से लागू करने के लिए दोनों देशों ने एक विशेष Working Group बनाने का फैसला किया है। यह समूह Director General और Joint Secretary स्तर के अधिकारियों के बीच समन्वय का काम करेगा। इसके जरिए खुफिया जानकारी, सैन्य उपकरण और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति की निगरानी की जाएगी। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को केवल बैठकों और सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं रखने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Working Group के जरिए भविष्य की योजनाओं और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश होगी।
पीएम मोदी से जापानी रक्षा मंत्री की मुलाकात
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक के बाद जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में भारत और जापान के बीच रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। इस मुलाकात से भारत-जापान संबंधों को नई रणनीतिक दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
वीर गार्जियन 26 से आसमान में भी बढ़ेगा तालमेल
भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग केवल नौसेना तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच इस वर्ष होने वाले वायु सेना अभ्यास वीर गार्जियन 26 की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं। इस अभ्यास के तहत जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमान पहली बार भारत की धरती पर अभ्यास में शामिल होंगे। भारतीय सुखोई और राफेल लड़ाकू विमानों के साथ जापानी विमान संयुक्त हवाई अभ्यास करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच अन्य सैन्य अभ्यासों और रक्षा सहयोग को भी आगे बढ़ाने की योजना है। इससे भारत और जापान की सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन और रणनीतिक समन्वय की क्षमता और मजबूत होगी।








