DRDO Laser Guided Missile Test: DRDO की बड़ी कामयाबी, लेजर गाइडेड मिसाइल का टेस्ट

DRDO की बड़ी कामयाबी, लेजर गाइडेड मिसाइल का टेस्ट
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Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

0 सेकंड पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO और भारतीय सेना ने स्वदेशी लेजर गाइडेड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। रिपोर्टों के मुताबिक परीक्षण 22 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित Armoured Corps Centre and School की फायरिंग रेंज में किया गया। मिसाइल को अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक से दागा गया और इसने करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।


लेजर की मदद से लक्ष्य पर सटीक निशाना
यह मिसाइल लेजर डिजाइनर की मदद से लक्ष्य को लॉक और ट्रैक करने के लिए विकसित की गई है। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदा। इसकी तकनीक का उद्देश्य बख्तरबंद लक्ष्यों के खिलाफ सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ाना है। इस तरह के सिस्टम में लक्ष्य की पहचान और उस पर सटीक मार्गदर्शन के लिए लेजर आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।


अर्जुन टैंक से किया गया परीक्षण
परीक्षण में स्वदेशी अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक का इस्तेमाल किया गया। मिसाइल को टैंक की 120 मिमी राइफल्ड गन से लॉन्च करने के लिए विकसित किया गया है और इसे एक से अधिक प्लेटफॉर्म से इस्तेमाल किए जाने की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। मिसाइल में Tandem High Explosive Anti-Tank यानी HEAT वारहेड का इस्तेमाल किया गया है, जिसे Explosive Reactive Armour से लैस बख्तरबंद वाहनों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है।

 

रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
स्वदेशी मिसाइल तकनीक का विकास भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता से जुड़ी कोशिशों का हिस्सा है। DRDO और भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों में लेजर गाइडेड एंटी टैंक मिसाइल के अलग-अलग परीक्षण कर चुके हैं। 2022 में भी इस प्रणाली का परीक्षण किया गया था, जिसमें अलग-अलग दूरी पर लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया था। मौजूदा परीक्षण इस तकनीक के आगे के तकनीकी मूल्यांकन और विकास प्रक्रिया से जुड़ा है।


30 किलोवाट लेजर हथियार से अलग है यह खबर
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। हालिया रिपोर्टों में DRDO के 30kW-class laser-based Directed Energy Weapon को भी चर्चा में रखा गया है। यह एक अलग प्रणाली है, जिसे ड्रोन स्वार्म, फिक्स्ड-विंग UAV और निगरानी सेंसर जैसे हवाई लक्ष्यों से निपटने के लिए विकसित किया गया है। इसकी अंतिम ट्रायल अगस्त 2025 में पूरी होने की जानकारी दी गई थी और अब DRDO इसे उत्पादन की दिशा में ले जाने के लिए उद्योग साझेदार तलाशने की तैयारी कर रहा है।


भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मिलेगा बढ़ावा
DRDO की लेजर गाइडेड एंटी टैंक मिसाइल और Directed Energy Weapon जैसी तकनीकों का विकास भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि दोनों प्रणालियां अलग-अलग हैं और इनके उद्देश्य भी अलग हैं। मौजूदा खबर का मुख्य अपडेट अर्जुन टैंक से लेजर गाइडेड एंटी टैंक मिसाइल के सफल परीक्षण से जुड़ा है, जिसमें करीब 3 किलोमीटर दूर निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया।

 

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