Ladakh Violence Anniversary: लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर उठाई मांग

Neel Saxena
0 सेकंड पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Riya Jain
0 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Anjali Patil
1 मिनट पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Harsh Pandya
1 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Monika Das
2 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को हुई हिंसा की पहली बरसी पर सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। लेह के एनडीएस स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में वांगचुक ने पिछले साल की घटना में मारे गए चार लोगों को श्रद्धांजलि दी और हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों की मांगों और पिछले साल हुई हिंसा के मामले में केंद्र सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वांगचुक की यह मांग उनके सार्वजनिक बयान के रूप में सामने आई है और इसे राजनीतिक आरोप के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
अमित शाह के इस्तीफे की मांग क्यों उठाई
वांगचुक ने अपने संबोधन में पिछले साल की हिंसा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को राजनीतिक रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि लद्दाख में लोगों की मांगें लंबे समय से जारी थीं और हिंसा के बाद भी कई सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। वांगचुक ने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देने की मांग का भी उल्लेख किया। उन्होंने केंद्र पर पहले किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया, हालांकि इन आरोपों को वांगचुक के राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2025 की हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी
24 सितंबर 2025 को लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई और पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस घटना की पहली बरसी पर लेह और लद्दाख के कई हिस्सों में बंद और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। एनडीएस स्टेडियम में मृतकों की याद में कार्यक्रम हुआ, जिसमें राजनीतिक नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया।
न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
सोनम वांगचुक ने पिछले साल की हिंसा से जुड़ी न्यायिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती है तो पुलिस फायरिंग की परिस्थितियों की जांच के लिए स्वतंत्र लोगों का न्यायाधिकरण बनाने की जरूरत हो सकती है। वांगचुक ने हिंसा की परिस्थितियों और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है। दूसरी ओर, लद्दाख पुलिस ने उनके कुछ आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। इसलिए हिंसा को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावों को स्पष्ट रूप से उनके स्रोत के साथ रिपोर्ट करना जरूरी है।
वांगचुक ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी जताई आशंका
बरसी के कार्यक्रम में वांगचुक ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण अपनी जान को खतरा होने की आशंका भी जताई और ‘एनकाउंटर’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी चेतावनियां मिली हैं और यदि उनके साथ ऐसा होता है तो इससे देश का ध्यान लद्दाख के मुद्दे की ओर जाएगा। यह उनकी ओर से व्यक्त की गई आशंका है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। वांगचुक को सितंबर 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था, लेकिन गृह मंत्रालय ने मार्च 2026 में उनकी हिरासत रद्द कर दी थी।
लद्दाख की मांगों को लेकर आंदोलन जारी
लद्दाख में राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा और स्थानीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रहा है। हिंसा की पहली बरसी पर लेह और लद्दाख के कई हिस्सों में बंद रखा गया तथा मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई। वांगचुक ने केंद्र से पिछले वर्ष की घटना की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और लद्दाख के लोगों की मांगों पर आगे बातचीत करने की मांग की है। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में कहा था कि वह लद्दाख में शांति, स्थिरता और सभी पक्षों के साथ रचनात्मक संवाद के लिए प्रतिबद्ध है।








