Shah Defends India Economy: अमित शाह का राहुल गांधी पर पलटवार

Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Ravi sinha
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Yash Kulkarni
11 मिनट पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Nidhi kumari
1 घंटे पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Myra Dubey
3 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Nidhi kumari
3 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Diya Gupta
4 घंटे पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 25 सितंबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में आयोजित UP International Trade Show के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं पर जवाब दिया। शाह ने कहा कि कुछ लोग भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ बताते हैं, लेकिन जिनकी सोच मृत हो चुकी है, वे देश की आर्थिक गतिविधियों में दिखाई दे रही तेजी को नहीं देख सकते। शाह की यह टिप्पणी राहुल गांधी और विपक्ष की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर की जा रही आलोचना के संदर्भ में सामने आई। गृह मंत्री ने अपने संबोधन में आर्थिक विकास, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ का दिया हवाला
अमित शाह ने अपने संबोधन में अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भी भारत ने विकास की गति बनाए रखी है। शाह ने Moody’s की ओर से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किए जाने का भी उल्लेख किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही थी। शाह ने इन्हीं आंकड़ों का इस्तेमाल भारत की अर्थव्यवस्था पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देने के लिए किया।
मैन्युफैक्चरिंग और निवेश पर भी जोर
अमित शाह ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग और निवेश बढ़ने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन और औद्योगिक क्षेत्र में कई परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। शाह ने बताया कि देश में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और केंद्र के पूंजीगत व्यय कार्यक्रम पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में पेश करते हुए राज्य में डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस निर्माण और अन्य औद्योगिक गतिविधियों का उल्लेख किया। शाह ने कहा कि इन गतिविधियों से राज्य में निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
रक्षा उत्पादन का भी किया जिक्र
गृह मंत्री ने भारत के रक्षा उत्पादन और निर्यात को भी आर्थिक बदलाव के उदाहरण के तौर पर सामने रखा। शाह के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के रक्षा निर्यात में पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी वृद्धि हुई है और उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के जरिए इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ये आंकड़े सरकार द्वारा जारी आंकड़ों पर आधारित हैं और शाह ने इन्हें भारत में बढ़ती घरेलू विनिर्माण क्षमता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने 24 सितंबर को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को लेकर कई आरोप लगाए थे। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और CEC ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। इन आरोपों को कांग्रेस और राहुल गांधी के राजनीतिक दावे के रूप में रिपोर्ट किया जाना चाहिए। इसी राजनीतिक विवाद के बीच 25 सितंबर को कांग्रेस ने देशभर में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
अर्थव्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज
अमित शाह की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच अर्थव्यवस्था तथा चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। शाह ने GDP वृद्धि, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा उत्पादन के आंकड़ों के आधार पर सरकार की आर्थिक नीतियों का पक्ष रखा, जबकि विपक्ष की ओर से अर्थव्यवस्था और सरकार की नीतियों पर अलग-अलग सवाल उठाए जा रहे हैं। ‘डेड इकोनॉमी’ और ‘मृत सोच’ जैसे शब्द संबंधित नेताओं के राजनीतिक बयानों का हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें उसी संदर्भ में रिपोर्ट किया जाना उचित है। भारत की अर्थव्यवस्था का व्यापक आकलन GDP के साथ रोजगार, महंगाई, निवेश, औद्योगिक उत्पादन और अन्य आर्थिक संकेतकों को देखकर किया जाता है।








