2028-29 UNSC सीट पर भारत की दावेदारी: UNSC चुनाव के लिए भारत का अभियान शुरू

Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Navya Nair
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Riya Jain
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Aarav Sharma
1 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2028-29 कार्यकाल के लिए गैर-स्थायी सदस्य बनने की अपनी आधिकारिक दावेदारी पेश कर दी है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक राजनयिकों की मौजूदगी में चुनावी अभियान का शुभारंभ किया। भारत का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करना है तथा वैश्विक शांति, सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी निभाना है।
'SHANTI' विजन के साथ दुनिया को दिया नया संदेश
अभियान के दौरान भारत ने 'SHANTI' विजन लॉन्च किया, जिसका पूरा नाम Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity है। इस विजन का उद्देश्य नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था, आपसी विश्वास और अखंडता के माध्यम से समग्र विकास को बढ़ावा देना है। भारत का आधिकारिक अभियान नारा "#India4UNSC: Peace, Planet, Progress" रखा गया है, जो शांति, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
ग्लोबल साउथ की आवाज बनने पर भारत का जोर
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में मजबूत प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए काम करेगा और बहुपक्षीय संस्थाओं में संतुलित भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता पर जोर
भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। सरकार का कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव आवश्यक है। भारत ने अपनी स्थायी सदस्यता की मांग दोहराते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े निर्णयों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
भारत का मजबूत पीसकीपिंग रिकॉर्ड बना बड़ी ताकत
भारत ने अपने अभियान में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में दिए गए योगदान को भी प्रमुखता से रखा। अब तक भारत 50 से अधिक शांति अभियानों में करीब 3 लाख सैनिकों को भेज चुका है, जबकि वर्तमान में भी 4,300 से अधिक भारतीय शांति सैनिक विभिन्न देशों में संयुक्त राष्ट्र मिशनों के तहत तैनात हैं। यही रिकॉर्ड भारत की वैश्विक विश्वसनीयता और जिम्मेदार भूमिका को मजबूत बनाता है।
ताजिकिस्तान से मुकाबला, 9वीं बार सदस्य बनने का लक्ष्य
UNSC के 2028-29 कार्यकाल के लिए चुनाव जून 2027 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 82वें सत्र के दौरान होंगे। एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा। भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, फिजी और ऑस्ट्रिया सहित कई देशों का समर्थन मिल चुका है। यदि भारत चुनाव जीतता है तो वह नौवीं बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य बनेगा, जिससे वैश्विक कूटनीति में उसकी भूमिका और मजबूत होगी।








