मोदी ट्रंप मुलाकात पर अमेरिकी राजदूत का दावा: ट्रंप भूल गए भारत की अपील

Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की G7 बैठक को लेकर बड़ा दावा किया है। उनके मुताबिक जून 2026 में फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने मीडिया को बैठक में आने की अनुमति देने लेकिन सवाल जवाब नहीं कराने का अनुरोध किया था। सर्जियो गोर ने बताया कि अमेरिकी पक्ष ने भारतीय अनुरोध को स्वीकार कर लिया था और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसके लिए सहमत थे। हालांकि बैठक शुरू होने के बाद घटनाक्रम भारत की योजना के मुताबिक नहीं रहा। ट्रंप ने पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका दे दिया जिसके बाद बैठक का स्वरूप बदल गया। अमेरिकी राजदूत के इस दावे के बाद भारत अमेरिका संबंधों और कूटनीतिक प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
Economic Times World Leaders Forum में किया खुलासा
सर्जियो गोर ने 22 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित Economic Times World Leaders Forum में इस घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मोदी ट्रंप बैठक से पहले उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को भारतीय विदेश मंत्रालय की मांग के बारे में जानकारी दी थी। भारत की ओर से कहा गया था कि मीडिया और कैमरों को बैठक के शुरुआती हिस्से में मौजूद रहने दिया जाए लेकिन पत्रकारों के सवाल नहीं लिए जाएं। गोर के अनुसार ट्रंप ने उस समय इस व्यवस्था पर सहमति जताई थी। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान करीब 50 कैमरों के साथ मीडियाकर्मियों को अंदर आने दिया गया। इसके बाद दोनों नेताओं ने अपनी शुरुआती टिप्पणियां रखीं और फिर घटनाक्रम अचानक बदल गया।
ट्रंप ने पत्रकारों से पूछ लिया कोई सवाल
सर्जियो गोर के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की शुरुआती बातचीत के बाद ट्रंप ने अचानक पत्रकारों से सवाल पूछने को कह दिया। उन्होंने कैमरों की तरफ देखते हुए पत्रकारों से पूछा कि क्या कोई सवाल है। इसके बाद पत्रकारों ने दोनों नेताओं से कई मुद्दों पर सवाल पूछने शुरू कर दिए। अमेरिकी राजदूत के मुताबिक यह बातचीत पहले से तय प्रेस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा नहीं थी। सवाल जवाब का सिलसिला इतना लंबा चला कि मोदी ट्रंप की निर्धारित मुलाकात लगभग 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदल गई। इस दौरान सुरक्षा व्यापार और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों सहित कई विषयों पर ट्रंप ने पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।
भारत ने बताया सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया
अमेरिकी राजदूत के बयान के बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने मामले पर स्थिति स्पष्ट की। सूत्रों के अनुसार किसी भी VVIP दौरे या द्विपक्षीय बैठक से पहले मीडिया की मौजूदगी और सार्वजनिक कार्यक्रमों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर चर्चा करना सामान्य प्रक्रिया है। भारत की ओर से भी इसी मानक प्रोटोकॉल के तहत अमेरिकी अधिकारियों को अपनी अपेक्षित मीडिया व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई थी। सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि इसमें किसी असामान्य या विशेष मांग की बात नहीं थी। विदेश मंत्रालय का कहना है कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बैठकों में मीडिया व्यवस्था को लेकर पहले से समन्वय करना सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज
सर्जियो गोर के बयान के सामने आने के बाद भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने इस घटनाक्रम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बिना पूर्व तैयारी वाले सवालों से बचने की कोशिश करते हैं। वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि VVIP बैठकों में मीडिया की मौजूदगी और प्रेस इंटरेक्शन को लेकर प्रोटोकॉल तय करना सामान्य बात है। उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के अचानक सवाल जवाब शुरू करने को राजनीतिक विवाद बनाना उचित नहीं है। इस पूरे मामले को लेकर अब भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संवाद और मीडिया प्रोटोकॉल पर चर्चा बढ़ गई है।
मोदी ट्रंप संबंधों पर फिर चर्चा
मोदी ट्रंप की यह मुलाकात ऐसे समय हुई थी जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में थे। G7 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों नेताओं की बातचीत को वैश्विक स्तर पर भी काफी महत्व दिया गया था। अमेरिकी राजदूत के ताजा खुलासे ने उस बैठक के पर्दे के पीछे की तैयारियों को चर्चा में ला दिया है। भारत की ओर से इसे सामान्य प्रोटोकॉल बताया गया है जबकि विपक्ष इसे अलग राजनीतिक नजरिए से देख रहा है। फिलहाल सर्जियो गोर के बयान और विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। आने वाले दिनों में इस दावे को लेकर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।








