26वें SCO शिखर सम्मेलन में भारत का कड़ा संदेश: 26वां SCO शिखर सम्मेलन बिश्केक में संपन्न

Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Ada khan
0 सेकंड पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Navya Nair
0 सेकंड पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Nisha Shah
4 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Kavya Mishra
4 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Yash Kulkarni
6 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Pooja Reddy
7 घंटे पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Ritika Ghosh
7 घंटे पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Aditya Verma
9 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Shruti Bajpai
9 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद का 26वां शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ। यह बैठक संगठन की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई, जिससे इस सम्मेलन का महत्व और बढ़ गया। सम्मेलन की थीम ‘SCO के 25 वर्ष: सतत शांति, विकास और समृद्धि की ओर एक साथ’ रखी गई थी। दो दिवसीय बैठक में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन की अध्यक्षता किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव ने की। भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें भाग लेकर देश की प्राथमिकताओं को प्रमुखता से सामने रखा।
बिश्केक घोषणापत्र में आतंकवाद पर जोर
शिखर सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों की ओर से बिश्केक घोषणापत्र जारी किया गया। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और सदस्य देशों के बीच सहयोग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड को स्वीकार नहीं करने की बात कही। उन्होंने आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे नेटवर्क के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत बताई। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सख्त और एकजुट कार्रवाई की वकालत करता रहा है। सम्मेलन में आतंकवाद को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया।
कनेक्टिविटी पर भारत की स्पष्ट नीति
SCO बैठक में भारत ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का समर्थन किया, लेकिन इसके साथ संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान को जरूरी बताया। भारत का रुख रहा कि किसी भी कनेक्टिविटी परियोजना में संबंधित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संकट के व्यापक प्रभावों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे संघर्षों का असर ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिक माध्यम बनाए रखने पर जोर दिया।
पीएम मोदी की अहम द्विपक्षीय मुलाकातें
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बैठक में दोनों देशों के साझा हितों और रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियन और आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकातें हुईं। इन बातचीत में व्यापार, रणनीतिक सहयोग, चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय संपर्क जैसे विषयों पर चर्चा का उल्लेख किया गया। SCO के इतर हुई इन बैठकों को भारत की बहुपक्षीय और द्विपक्षीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया। इन मुलाकातों के जरिए भारत ने क्षेत्रीय सहयोग और साझा हितों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
SCO चार्टर में अंग्रेजी को लेकर बड़ा बदलाव
सम्मेलन से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के अनुसार SCO चार्टर में संशोधन कर अंग्रेजी को संगठन की आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल किए जाने की बात सामने आई है। भारत लंबे समय से बहुपक्षीय संस्थाओं में अंग्रेजी के इस्तेमाल और व्यापक अंतरराष्ट्रीय संवाद को बढ़ावा देने पर जोर देता रहा है। अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने से SCO के दस्तावेजों, संवाद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठन की पहुंच को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। यह फैसला संगठन के बदलते वैश्विक स्वरूप और सदस्य देशों के बीच संचार को बेहतर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हालांकि ऐसे संस्थागत बदलावों के अंतिम आधिकारिक विवरण को SCO के दस्तावेजों के आधार पर देखा जाना महत्वपूर्ण होगा।
27 प्रमुख समझौतों के बाद पाकिस्तान को अध्यक्षता
शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े कई दस्तावेजों और समझौतों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार कुल 27 प्रमुख समझौतों और दस्तावेजों को स्वीकृति मिली, जिन्हें आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय सहयोग के रोडमैप से जोड़ा जा रहा है। सम्मेलन के अंत में SCO की घूर्णन अध्यक्षता किर्गिस्तान से पाकिस्तान को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई। इससे पाकिस्तान को आगामी अवधि में संगठन के एजेंडे और बैठकों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका मिलेगी। भारत के लिए SCO मंच आतंकवाद, कनेक्टिविटी, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं को रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। बिश्केक सम्मेलन के बाद अब सदस्य देशों के बीच इन फैसलों और घोषणाओं को लागू करने पर नजर रहेगी।







