समुद्र की गहराई में भारत की ताकत और बढ़ी: नौसेना में शामिल हुआ स्वदेशी INS निपुण

Vaishali shinde
5 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Anil Sen
8 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Dev Kapoor
10 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Pihu Agarwal
12 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में सोमवार, 31 अगस्त 2026 को एक और बड़ा इजाफा हुआ। मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) INS निपुण को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने की। निस्तार श्रेणी का यह दूसरा डाइविंग सपोर्ट पोत गहरे समुद्र में जटिल अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
गहरे समुद्र में ऑपरेशन के लिए बनाया गया खास पोत
INS निपुण कोई सामान्य युद्धपोत नहीं है। इसे खास तौर पर समुद्र की गहराई में डाइविंग, अंडरवाटर इंटरवेंशन, पनडुब्बी बचाव, सैल्वेज और समुद्र के भीतर तकनीकी सहायता जैसे मुश्किल अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसकी मदद से नौसेना उन इलाकों में भी अभियान चला सकेगी, जहां सामान्य जहाजों की पहुंच सीमित हो जाती है।
300 मीटर तक सैचुरेशन डाइविंग की क्षमता
INS निपुण की सबसे बड़ी खूबियों में इसकी डीप-सी सैचुरेशन डाइविंग क्षमता शामिल है। यह पोत करीब 300 मीटर की गहराई तक सैचुरेशन डाइविंग और 75 मीटर तक साइड-स्टेज डाइविंग अभियान संचालित कर सकता है। खराब मौसम और समुद्र की तेज लहरों के बीच भी पोत को स्थिर रखने के लिए आधुनिक प्रणालियां लगाई गई हैं।
पनडुब्बी बचाव में बनेगा अहम सहारा
किसी पनडुब्बी के समुद्र के भीतर दुर्घटनाग्रस्त होने या उसमें नौसैनिकों के फंसने की स्थिति में INS निपुण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसे Deep Submergence Rescue Vehicle (DSRV) के मदर शिप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे संकट की स्थिति में पनडुब्बी और उसमें मौजूद कर्मियों तक राहत एवं बचाव अभियान पहुंचाने की नौसेना की क्षमता मजबूत होगी।
समुद्र के अंदर खराब मशीनरी की भी होगी मरम्मत
INS निपुण केवल बचाव अभियानों तक सीमित नहीं है। समुद्र के भीतर किसी जहाज, मशीनरी या अन्य उपकरण के खराब होने पर इसके जरिए अंडरवाटर रिपेयर और सैल्वेज ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। पोत में 15 टन क्षमता की सब-सी क्रेन और अत्याधुनिक डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम लगाया गया है।
1,000 मीटर तक काम कर सकते हैं ROV
पोत में Remote Operated Vehicles यानी ROV भी तैनात किए गए हैं। ये पानी के भीतर करीब 1,000 मीटर की गहराई तक जाकर निगरानी, निरीक्षण, खोज और सैल्वेज जैसे अभियानों में सहायता कर सकते हैं। इससे कठिन अंडरवाटर मिशनों में गोताखोरों पर निर्भरता कम करने और सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन संचालित करने में मदद मिलेगी।
अत्याधुनिक मेडिकल सुविधाओं से लैस
गहरे समुद्र में डाइविंग के दौरान चिकित्सा संबंधी आपात स्थितियों को देखते हुए INS निपुण में विशेष मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। पोत में 8-बेड वाला अस्पताल, ICU, ऑपरेशन थिएटर और हाइपरबेरिक मेडिकल सुविधाएं मौजूद हैं। ये सुविधाएं गहरे समुद्र में डाइविंग से जुड़ी चिकित्सा समस्याओं से निपटने में महत्वपूर्ण होंगी।
75 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल
INS निपुण भारत की आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण क्षमता का भी उदाहरण है। इसे विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने तैयार किया है और इसमें करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसके निर्माण में भारतीय उद्योगों और MSMEs की भी भागीदारी रही है।
2018 में हुआ था दो पोतों का अनुबंध
रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2018 में HSL के साथ करीब 2,393 करोड़ रुपये की लागत से दो डाइविंग सपोर्ट वेसल बनाने का अनुबंध किया था। इसी परियोजना के तहत पहले INS निस्तार और उसके बाद INS निपुण का निर्माण किया गया। INS निस्तार पहले ही नौसेना में शामिल होकर पूर्वी नौसेना कमान के तहत अपनी सेवाएं दे रहा है।
30 जुलाई को नौसेना को सौंपा गया था INS निपुण
व्यापक साज-सज्जा और समुद्री परीक्षणों के बाद INS निपुण को 30 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। अब 31 अगस्त को इसकी औपचारिक कमीशनिंग के साथ यह नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता का हिस्सा बन गया है। करीब 118 मीटर लंबा और 8,560 टन से अधिक डिस्प्लेसमेंट वाला यह पोत गहरे समुद्र में लंबे और जटिल अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म साबित होगा।
पश्चिमी नौसेना कमान को मिली नई क्षमता
INS निपुण के शामिल होने से पश्चिमी नौसेना कमान को भी एक समर्पित डाइविंग सपोर्ट वेसल मिल गया है। INS निस्तार के बाद निपुण इस श्रेणी का दूसरा स्वदेशी पोत है। इसके जरिए भारतीय नौसेना की अंडरवाटर रेस्क्यू, डीप-सी डाइविंग, सैल्वेज और समुद्र के भीतर तकनीकी सहायता की क्षमता और मजबूत होगी।
समुद्र की गहराई में आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान
INS निपुण का नौसेना में शामिल होना सिर्फ एक नए पोत का कमीशन होना नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का भी संकेत है। गहरे समुद्र में बचाव से लेकर अंडरवाटर रिपेयर और निगरानी तक, यह पोत भारतीय नौसेना को ऐसे अभियानों के लिए मजबूत आधार देगा जिनमें अत्यधिक तकनीकी क्षमता और सटीक संचालन की जरूरत होती है।








