दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर बड़ा एक्शन: सर्दियों के प्रदूषण से निपटने की तैयारी

सर्दियों के प्रदूषण से निपटने की तैयारी
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Reyansh Joshi

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0 सेकंड पहले

Hum is cause ke saath hain!

Priya Iyer

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Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Ananya Sharma

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0 सेकंड पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

Taushif Shekh

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0 सेकंड पहले

Samaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.

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दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और संबंधित राज्यों ने सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक की कार्ययोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-NCR से जुड़े राज्यों की Pollution Action Plans और IEC यानी Information, Education and Communication योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में दिल्ली के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के पर्यावरण मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर क्षेत्रवार और सेक्टरवार कार्रवाई तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाली और नियमों का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर भी जोर दिया। इन तैयारियों का उद्देश्य प्रदूषण के बढ़ते स्तर से पहले ही प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण मजबूत करना है।


दिल्ली में 334 प्रवर्तन टीमें तैनात
दिल्ली सरकार ने स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों की निगरानी के लिए कुल 334 प्रवर्तन टीमों की व्यवस्था की है। इनमें शहर की 39 उपमंडल इकाइयों के लिए 78 टीमें और वार्ड स्तर पर 256 टीमें शामिल हैं। ये टीमें दिन-रात निरीक्षण कर कचरा और बायोमास जलाने, निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, अनधिकृत ईंधन के इस्तेमाल और कचरे की अवैध डंपिंग जैसे मामलों पर नजर रखेंगी। टीमों को रात में भी निरीक्षण करने और प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की पहचान कर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है। इनके जरिए निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों तथा संबंधित नियमों के अनुपालन की भी निगरानी की जाएगी। इस व्यवस्था का मकसद प्रदूषण के स्रोत सामने आते ही स्थानीय स्तर पर तेजी से कार्रवाई करना है।


48 हॉटस्पॉट पर जीरो टॉलरेंस
दिल्ली में 48 गैर-अनुरूपता वाले प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान की गई है, जहां विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जाएगा। इन क्षेत्रों में जिलाधिकारियों की निगरानी में नियमों का उल्लंघन करने वाली प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इनमें मेटल कास्टिंग, पाउडर कोटिंग, बफिंग और पॉलिशिंग, प्लास्टिक वेस्ट री-प्रोसेसिंग, स्प्रे पेंटिंग और हीट-ट्रीटमेंट जैसी इकाइयां शामिल हैं। केंद्र स्तर की समीक्षा में भी प्रदूषण फैलाने वाली गैर-अनुरूप इकाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना है। इससे प्रदूषण नियंत्रण की सामान्य निगरानी के बजाय ज्यादा जोखिम वाले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

प्रदूषण के 7 प्रमुख सेक्टर निशाने पर
दिल्ली की IEC Action Plan में प्रदूषण के सात प्रमुख सेक्टरों को चिन्हित किया गया है। इनमें औद्योगिक प्रदूषण, DG Sets, सड़क की धूल, निर्माण एवं मलबा, नगर निकाय का ठोस कचरा और बायोमास, कृषि अवशेष तथा वाहनों से होने वाला उत्सर्जन शामिल है। इन सभी क्षेत्रों में संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों के स्तर पर कार्रवाई की योजना बनाई गई है। निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों से जुड़ी धूल पर निगरानी बढ़ाने के साथ Dust Portal के अनुपालन पर भी ध्यान दिया जाएगा। DG Sets के इस्तेमाल से जुड़े Commission for Air Quality Management यानी CAQM के निर्देशों के पालन की भी जांच की जाएगी। सेक्टर आधारित रणनीति के जरिए प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई करने का लक्ष्य रखा गया है।


पांच राज्यों में अलग-अलग एक्शन प्लान
दिल्ली-NCR के प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली के साथ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने भी अपनी-अपनी IEC Action Plans तैयार की हैं। पंजाब की योजना में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 2,000 Crop Residue Management मशीनों के प्रदर्शन और 4,500 गांव स्तरीय कैंप आयोजित करने की योजना शामिल है। हरियाणा में पराली जलाने की रोकथाम, किसानों के लिए जागरूकता अभियान और फसल अवशेष के वैकल्पिक उपयोग पर जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के आठ प्रभावित जिलों में फसल अवशेष प्रबंधन और औद्योगिक प्रदूषण पर क्षेत्रीय कार्यक्रमों की योजना है। राजस्थान भी अपने प्रमुख प्रदूषण क्षेत्रों के लिए अलग सेक्टर आधारित कार्ययोजना लागू करेगा। इस क्षेत्रीय रणनीति का उद्देश्य दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ाने वाले स्रोतों पर राज्यों के स्तर से समन्वित कार्रवाई करना है।


दोनों स्तरों पर निगरानी और कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों में केंद्र और दिल्ली सरकार की भूमिका को अलग-अलग स्तरों पर तय किया गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-NCR से जुड़े राज्यों की सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक की Action Plans की समीक्षा की। इसके बाद दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में दिल्ली की अपनी तैयारियों की समीक्षा हुई, जिसमें 334 प्रवर्तन टीमों और 48 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर कार्रवाई की योजना सामने रखी गई। दिल्ली की टीमें चौबीसों घंटे स्थानीय प्रदूषण स्रोतों की निगरानी करेंगी। वहीं केंद्र स्तर पर राज्यों के बीच समन्वय और सेक्टर आधारित कार्रवाई को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इस तरह दिल्ली में स्थानीय प्रवर्तन और NCR स्तर पर अंतरराज्यीय समन्वय दोनों को प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा बनाया गया है।

 

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