Cabinet clears rail projects: 7 हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर को फोर-ट्रैक करने की तैयारी

Sai Mehta
17 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Nidhi kumari
1 दिन पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Vivaan Gupta
1 दिन पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Aarohi Chaudhary
1 दिन पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Vaishali shinde
1 दिन पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Nisha Shah
1 दिन पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Kabir Shukla
1 दिन पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Ada khan
1 दिन पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
भारतीय रेलवे देश के सात हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर को करीब 11,000 किलोमीटर की लंबाई में फोर-ट्रैक करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार ये कॉरिडोर देश के कुल रेल नेटवर्क का करीब 16 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन इन पर लगभग 41 प्रतिशत रेल ट्रैफिक चलता है। इन रूटों पर क्षमता बढ़ाने का उद्देश्य बढ़ते यात्री और माल यातायात को संभालना तथा भीड़भाड़ कम करना है। हालांकि, 9 सितंबर की कैबिनेट मंजूरी को पूरे 11,000 किमी नेटवर्क की एकमुश्त मंजूरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दिल्ली से मुंबई और चेन्नई से हावड़ा तक प्रमुख नेटवर्क
हाई-डेंसिटी नेटवर्क में दिल्ली-हावड़ा, मुंबई-हावड़ा, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-गुवाहाटी, दिल्ली-चेन्नई, हावड़ा-चेन्नई और मुंबई-चेन्नई जैसे प्रमुख रूट शामिल हैं। ये देश के बड़े महानगरों, औद्योगिक क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों को जोड़ते हैं। इन मार्गों पर यात्री और मालगाड़ियों का भारी दबाव रहता है, जिसके कारण कई सेक्शनों में क्षमता बढ़ाने की जरूरत लंबे समय से बताई जाती रही है। चार ट्रैक की दिशा में विकास से भविष्य में अधिक ट्रेनें संचालित करने की क्षमता बढ़ सकती है।
कैबिनेट ने 20,804 करोड़ के 8 प्रोजेक्ट मंजूर किए
9 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आठ मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनकी कुल अनुमानित लागत ₹20,804 करोड़ है और ये परियोजनाएं करीब 1,196 किलोमीटर के रेल नेटवर्क को कवर करेंगी। परियोजनाएं नौ राज्यों के 31 जिलों से गुजरेंगी और इनका लक्ष्य रेल क्षमता बढ़ाने, भीड़भाड़ कम करने तथा यात्री और माल परिवहन को अधिक सुचारु बनाना है। इन्हें 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
खड़गपुर-झारसुगुड़ा और कटनी-पेंड्रा रोड समेत कई प्रोजेक्ट
मंजूर परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा के बीच चौथी लाइन, बिलासपुर-उसलापुर से पेंड्रा रोड तीसरी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और सिकंदराबाद-घाटकेसर-काजीपेट सेक्शन का फोर-लाइनिंग कार्य शामिल है। दक्षिण भारत में अरक्कोनम-रेनिगुंटा तीसरी और चौथी लाइन, व्हाइटफील्ड-बंगारपेट तीसरी और चौथी लाइन, होसुर-ओमलूर डबलिंग तथा सलेम-करूर-दिंडीगुल डबलिंग को भी मंजूरी मिली है। इन परियोजनाओं में से कई हाई-डेंसिटी नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों की क्षमता बढ़ाने से जुड़ी हैं।
माल ढुलाई और यात्री ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में बढ़ोतरी होगी और कोयला, सीमेंट, स्टील, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही आसान होगी। स्वीकृत परियोजनाओं से अतिरिक्त करीब 74 मिलियन टन प्रति वर्ष माल ढुलाई क्षमता बनने का अनुमान है। क्षमता बढ़ने से व्यस्त रेल सेक्शनों पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु हो सकती है और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है।
रेलवे नेटवर्क के विस्तार से घटेगा दबाव
हाई-डेंसिटी नेटवर्क पर चार-ट्रैकिंग की व्यापक योजना और नई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे की मौजूदा क्षमता पर बढ़ते दबाव को कम करना है। इन परियोजनाओं के जरिए यात्री और मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त लाइन क्षमता उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, निर्माण, भूमि अधिग्रहण और परियोजना क्रियान्वयन की गति इस योजना के वास्तविक लाभ तय करने में महत्वपूर्ण होगी। 9 सितंबर को मंजूर आठ परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।








