Mahahrashtra tokenised state: भारत का पहला टोकनाइज्ड राज्य बनने की तैयारी

Anjali Patil
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Sonu rai
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Kavya Mishra
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
महाराष्ट्र भारत का पहला ‘टोकनाइज्ड स्टेट’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बताया कि राज्य जमीन और अन्य अचल संपत्तियों के ब्लॉकचेन आधारित टोकनाइजेशन के लिए कानूनी ढांचा तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य जमीन और संपत्ति के रिकॉर्ड तथा उनसे जुड़े अधिकारों को डिजिटल रूप में अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए संपत्तियों के मूल्य को डिजिटल टोकन के रूप में दर्शाने की संभावना पर काम किया जा रहा है।
क्या है प्रस्तावित DELTA Act
महाराष्ट्र सरकार ‘Maharashtra Digitisation and Exchange of Land Token Asset Act’ यानी DELTA Act का प्रस्ताव तैयार कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक इसका उद्देश्य जमीन और अन्य अचल संपत्तियों के टोकनाइजेशन के लिए कानूनी और नियामकीय आधार तैयार करना है। फडणवीस के अनुसार प्रस्तावित कानून को तैयार करने में केंद्र सरकार, वित्तीय संस्थानों और संबंधित नियामकीय विशेषज्ञों के साथ समन्वय जरूरी होगा। इसे अंतिम कानून मानना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि इसका विधायी ढांचा अभी प्रक्रिया में है।
ब्लॉकचेन से जमीन के रिकॉर्ड में क्या बदलेगा
टोकनाइजेशन में किसी वास्तविक संपत्ति या उसके मूल्य से जुड़े अधिकारों को डिजिटल टोकन के रूप में दर्शाने की व्यवस्था विकसित की जाती है। महाराष्ट्र सरकार का प्रस्ताव जमीन और अन्य अचल संपत्तियों को ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल ढांचे से जोड़ने पर केंद्रित है। सरकार का मानना है कि इससे जमीन के रिकॉर्ड तक पहुंच, संपत्ति के मूल्यांकन और भविष्य में लेनदेन से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाया जा सकता है। हालांकि टोकन धारकों को कौन से कानूनी अधिकार मिलेंगे, यह अंतिम कानून और नियामकीय व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
SEBI NSE और BSE के विशेषज्ञ भी होंगे शामिल
प्रस्तावित कानूनी ढांचे को तैयार करने के लिए महाराष्ट्र सरकार वित्तीय बाजार से जुड़े विशेषज्ञों के साथ काम कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक SEBI, NSE और BSE से जुड़े विशेषज्ञों तथा क्षेत्र के अन्य जानकारों की मदद ली जा रही है। इसकी जरूरत इसलिए भी है क्योंकि जमीन जैसे वास्तविक संपत्ति अधिकारों को डिजिटल टोकन से जोड़ने में संपत्ति कानून, वित्तीय बाजार, नियमन और डिजिटल एसेट से जुड़े कई सवाल सामने आएंगे। सरकार इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक ढांचा तैयार करना चाहती है।
आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है
फडणवीस के मुताबिक टोकनाइजेशन का उद्देश्य जमीन और अन्य संपत्तियों में मौजूद आर्थिक मूल्य को अधिक आसानी से उपयोग योग्य बनाना है। प्रस्तावित व्यवस्था से जमीन के रिकॉर्ड तक पहुंच और समीक्षा आसान होने तथा संपत्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। सरकार यह भी मानती है कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था संपत्ति के मूल्य को वित्तीय जरूरतों से जोड़ने में मदद कर सकती है। हालांकि आम नागरिकों को सीधे टोकन खरीदने या संपत्ति का fractional ownership हासिल करने जैसी सुविधाएं किस रूप में मिलेंगी, यह अंतिम कानूनी और नियामकीय प्रावधान तय करेंगे
अभी कानून बनने की प्रक्रिया बाकी
महाराष्ट्र के लिए यह पहल देश में जमीन के टोकनाइजेशन का पहला व्यापक कानूनी ढांचा बनाने की कोशिश के रूप में सामने आई है। फडणवीस के मुताबिक प्रस्तावित DELTA Act को अगले कुछ महीनों में आगे बढ़ाने की तैयारी है। यानी फिलहाल महाराष्ट्र ‘टोकनाइज्ड स्टेट’ बन नहीं गया है, बल्कि उस दिशा में कानूनी और तकनीकी ढांचा तैयार कर रहा है। यदि प्रस्तावित कानून लागू होता है तो जमीन और अचल संपत्तियों के प्रबंधन तथा उनसे जुड़े डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।








