UPI Payment Charges: ₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर MDR का मामला

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Anil Sen
34 मिनट पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Dev Kapoor
2 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Navya Nair
4 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Anil Sen
5 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। कोर्ट ने नए MDR ढांचे पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से जवाब मांगा है।
चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले में केंद्र और संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि मामला काफी हद तक तकनीकी प्रकृति का है और MDR की कानूनी प्रकृति तथा इसके संचालन के आधार को हलफनामे के माध्यम से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
15 अक्टूबर से लागू होना है नया MDR फ्रेमवर्क
केंद्र सरकार द्वारा घोषित नए ढांचे के अनुसार, सामान्य श्रेणी के चुनिंदा P2M UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है।
P2P UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं
सरकार के अनुसार, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांसफर पर राशि की कोई सीमा नहीं होगी और ऐसे लेनदेन पर MDR लागू नहीं किया जाएगा। इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए निर्धारित जीरो-MDR श्रेणियों में आने वाले लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। सरकार का कहना है कि करीब 96% P2M लेनदेन नए बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
MDR ग्राहक से अलग से वसूलने का प्रावधान नहीं
केंद्र सरकार के मुताबिक MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लगाया जाने वाला चार्ज है और इसे ग्राहक से अलग शुल्क के रूप में वसूलने का प्रावधान नहीं है। सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि मर्चेंट इस लागत को ग्राहकों पर न डालें। साथ ही UPI ऐप प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने से रोका गया है।
कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग MDR व्यवस्था
नए फ्रेमवर्क में कम मार्जिन वाले कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए अलग दर निर्धारित की गई है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR की व्यवस्था है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन है।
याचिका में क्या चुनौती दी गई है?
एडवोकेट अंजन दत्ता द्वारा दायर याचिका में केंद्र सरकार की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है। याचिका में Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत बनाए गए नए ढांचे की वैधानिकता, पारदर्शिता और इसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए अलग-अलग शुल्क व्यवस्था को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
फिलहाल 15 अक्टूबर की समयसीमा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक से इनकार किए जाने के बाद फिलहाल 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित MDR व्यवस्था लागू होने की समयसीमा बरकरार है। हालांकि, अंतिम स्थिति आगे की सुनवाई और केंद्र, RBI तथा NPCI की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाबों पर निर्भर करेगी। अदालत अब इस व्यवस्था के कानूनी आधार और MDR की प्रकृति से जुड़े सवालों पर आगे सुनवाई करेगी।








