दूध की संरचना बदलने का आरोप: छापे में खुला मिलावट का मामला

छापे में खुला मिलावट का मामला
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 दूध की आड़ में मिलावट का बड़ा खेल उजागर! महाराष्ट्र में FDA-पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, 16,730 लीटर संदिग्ध दूध नष्ट

पुणे में छापेमारी के दौरान डिटर्जेंट, व्हे पाउडर और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद; लैब जांच में दूध के नमूनों में डिटर्जेंट मिलने का दावा

 

पुणे | महाराष्ट् महाराष्ट्र के पुणे जिले से खाद्य सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर मामला सामने आया है। दूध की गुणवत्ता से कथित तौर पर खिलवाड़ किए जाने की शिकायत के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और पुणे ग्रामीण पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान ऐसे पदार्थ और सामग्री बरामद होने की बात सामने आई है, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से दूध की संरचना में बदलाव के लिए किया जा रहा था।

 

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब प्रयोगशाला जांच में लिए गए दूध के नमूनों में डिटर्जेंट की मौजूदगी पाए जाने की जानकारी सामने आई। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध दूध को नष्ट कराया गया है।

   

मामले की शुरुआत पुणे के मंचर क्षेत्र में दूध की गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद हुई। इसके बाद FDA और पुणे ग्रामीण पुलिस की टीम ने जांच आगे बढ़ाई।

4 जुलाई को संयुक्त टीम ने अम्बेगांव के अवसरी खुर्द स्थित नवकार डिस्ट्रीब्यूटर्स पर छापा मारा। अधिकारियों को यहां दूध की गुणवत्ता और संरचना में बदलाव के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई संदिग्ध पदार्थ मिले।

 

कार्रवाई के दौरान व्हे पाउडर, व्हे परमीएट पाउडर, डिटर्जेंट, इमल्सीफायर सहित अन्य सामग्री बरामद की गई। अलग-अलग डेयरी उत्पादों से जुड़े नमूने भी जांच के लिए लिए गए।

 

   

जांच को आगे बढ़ाते हुए FDA की टीम ने मंचर स्थित आकाश डेयरी फार्म से 6 जुलाई को दूध के छह नमूने लिए। इन नमूनों को प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा गया।

28 सितंबर को सामने आई FDA लैब रिपोर्ट के अनुसार, सभी छह नमूनों में डिटर्जेंट की मौजूदगी पाई गई। इसके बाद किए गए सप्लीमेंट्री विश्लेषण में ‘अल्फॉक्स-200 एथोक्सिलेट’ पाए जाने की जानकारी दी गई, जिसे जांच में नोनीलफेनोल एथोक्सिलेट के रूप में पहचाना गया।

 

अधिकारियों के अनुसार, नमूनों में फैट और सॉलिड्स-नॉट-फैट यानी SNF की मात्रा भी निर्धारित मानकों से कम पाई गई।

 

   

 

जांच के दौरान पूछताछ में दूध की संरचना को बदलने के कथित तरीके भी सामने आने की बात कही गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार SNF बढ़ाने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर, प्रोटीन में बदलाव के लिए व्हे पाउडर और फैट का स्तर बढ़ाने के लिए खाद्य तेल इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली।

 

 

     

 

   

 

   

 

   

इसके अलावा अलग-अलग सामग्री को मिश्रित करने के लिए इमल्सीफायर और डिटर्जेंट के इस्तेमाल का भी आरोप सामने आया है।

 

इन तथ्यों के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की नजर सिर्फ एक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे दूध सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई।

 जांच की पहुंची सप्लाई चेन तक

 

जांच के दौरान इस मामले की कड़ी इंदापुर स्थित इंदापुर डेयरी एंड मिल्क प्रोडक्ट्स से जुड़ने की जानकारी सामने आई, जिसे सोनाई डेयरी के नाम से भी जाना जाता है।

 

इसके बाद जांच का दायरा मालशिरस तक पहुंचा और वहां दो अन्य मामलों में भी कार्रवाई की जानकारी सामने आई। अब अधिकारी इस पूरे नेटवर्क से जुड़े संभावित सप्लायर, दूध संग्रह केंद्र, चिलिंग सेंटर और प्रोसेसिंग यूनिटों की भूमिका की जांच कर रहे हैं।

💥 16,730 लीटर संदिग्ध दूध नष्ट

 

पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ा आंकड़ा 16,730 लीटर संदिग्ध दूध का सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार इस दूध की अनुमानित कीमत करीब 6.69 लाख रुपये थी।

 

खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने इस दूध को नष्ट कराया, ताकि संदिग्ध उत्पाद आगे बाजार या उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच सके।

 

 बच्चों से बुजुर्गों तक, सभी के स्वास्थ्य का सवाल

 

दूध रोजमर्रा के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में दूध के नमूनों में डिटर्जेंट जैसे पदार्थ पाए जाने की रिपोर्ट ने खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

यदि किसी खाद्य पदार्थ में निर्धारित मानकों के विपरीत रासायनिक या गैर-खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल पाया जाता है तो उसका सीधा संबंध उपभोक्ताओं की सुरक्षा से जुड़ जाता है। यही वजह है कि FDA और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई को इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

 नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल?

 

जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल पूरे कथित नेटवर्क की पहुंच को लेकर है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि संदिग्ध दूध या उससे जुड़ी सामग्री किन-किन प्रतिष्ठानों तक पहुंचती थी और सप्लाई चेन में कौन-कौन लोग शामिल थे।

 

सप्लायर से लेकर संग्रह केंद्र, चिलिंग सेंटर और प्रोसेसिंग यूनिट तक जांच का दायरा बढ़ाए जाने के बाद आने वाले समय में और भी जानकारी सामने आने की संभावना है।

📌 फिलहाल जांच जारी

 

पुणे जिले में सामने आया यह मामला दूध की गुणवत्ता की निगरानी और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसियां पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और अंतिम जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

16,730 लीटर संदिग्ध दूध को नष्ट किए जाने की कार्रवाई के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच एजेंसियां कथित मिलावट के पूरे नेटवर्क तक कितनी जल्दी पहुंचती हैं और इसमें शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

 

 दूध सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, करोड़ों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत है। इसलिए इसकी शुद्धता से जुड़ा कोई भी मामला सीधे आम उपभोक्ता की सेहत से जुड़ जाता है।

 

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