Kavita Mahato Runs 1600m Barefoot: Home Guard बनने के सपने ने जीता लोगों का दिल

Aryan Malhotra
2 घंटे पहलेZindagi mein aise log hi role model hote hain.
Rohan Desai
2 घंटे पहलेMehnat kabhi bekar nahi jaati, yeh aaj saabit hua.
Aarohi Chaudhary
3 घंटे पहलेHaar ke baad jeetna hi asli champion ki pehchaan hai.
Anil Sen
5 घंटे पहलेYeh story sabko share karni chahiye, bahut motivating hai.
Ayaan Khan
6 घंटे पहलेYeh story sabko share karni chahiye, bahut motivating hai.
Dhruv Bhatt
7 घंटे पहलेIs insaan ki journey bahut inspiring hai, salute!
नंगे पांव साड़ी में 1600 मीटर दौड़ीं कविता महतो
झारखंड के रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड की 27 वर्षीय कविता महतो इन दिनों अपने संघर्ष और हिम्मत की कहानी को लेकर चर्चा में हैं। पति के निधन के बाद दो बच्चों और बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी संभाल रहीं कविता ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद Home Guard बनने का अपना सपना नहीं छोड़ा। हाल ही में Home Guard बहाली के ट्रायल में उन्होंने बिना स्पोर्ट्स ड्रेस और रनिंग शूज़ के 1600 मीटर की दौड़ पूरी कर अपनी मेहनत और जज़्बे का परिचय दिया।
न ट्रैक सूट था, न रनिंग शूज़, फिर भी मैदान में उतरीं
कविता के मुताबिक, ट्रायल के दिन कई अभ्यर्थी स्पोर्ट्स गियर, ट्रैक सूट और रनिंग शूज़ के साथ पहुंचे थे। वहीं उनके पास दौड़ने के लिए उचित जूते तक नहीं थे। आर्थिक तंगी के कारण वह साड़ी पहनकर और खाली पेट ही दौड़ में शामिल हुईं। हालात मुश्किल थे, लेकिन Home Guard बनने की उम्मीद ने उन्हें पीछे हटने नहीं दिया।
1600 मीटर की दौड़ करीब 6 मिनट 40 सेकंड में पूरी
कविता ने 1600 मीटर की दौड़ लगभग 6 मिनट 40 सेकंड में पूरी की। बताया जा रहा है कि निर्धारित समय 10 मिनट था और इस प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने उत्कृष्ट श्रेणी में जगह बनाई। उनके लिए यह सिर्फ एक शारीरिक परीक्षा नहीं थी, बल्कि अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश भी थी।
पति के निधन के बाद बच्चों और सास-ससुर की जिम्मेदारी
कविता के पति दीपक महतो का करीब तीन साल पहले गुजरात में मजदूरी के दौरान बीमारी के चलते निधन हो गया था। परिवार के मुताबिक, इलाज के दौरान काफी खर्च हुआ और करीब 5 से 6 लाख रुपये का कर्ज भी परिवार पर हो गया। पति के निधन के बाद कविता के सामने दो बच्चों के साथ बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी भी आ गई।
ईंट-भट्ठे से खेतों तक करती हैं मेहनत
परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण कविता अलग-अलग तरह के काम करके घर चलाने में मदद करती हैं। गर्मी के मौसम में ईंट-भट्ठे पर मजदूरी, धान के मौसम में रोपाई और कटाई तथा अन्य घरेलू मजदूरी जैसे कामों में वह परिवार का सहारा बनती हैं। परिवार के पास खेती से जुड़ी जिम्मेदारियां भी हैं, जिनमें वह अपने ससुर का हाथ बंटाती हैं।
सुबह 4 बजे उठकर बच्चों के साथ करती थीं दौड़ की तैयारी
Home Guard की दौड़ की तैयारी के लिए कविता रोज सुबह करीब 4 बजे उठती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद वह गांव के मैदान में दौड़ का अभ्यास करती थीं। कई बार उनके दोनों बच्चे भी उनके साथ रहते थे। न महंगे उपकरण थे और न ही किसी बड़े प्रशिक्षण संस्थान की सुविधा, लेकिन लक्ष्य को लेकर उनका संकल्प लगातार बना रहा।
कविता के लिए Home Guard की नौकरी सिर्फ नौकरी नहीं
कविता का कहना है कि वह परिवार को छोड़कर किसी दूर स्थान पर नौकरी करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि बच्चों और बुजुर्ग सास-ससुर की देखभाल की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। ऐसे में उनकी कोशिश है कि यदि उन्हें Home Guard में चयन मिलता है तो घर या आसपास के क्षेत्र में ड्यूटी मिल सके, जिससे परिवार को नियमित आमदनी का सहारा मिल पाए।
सोशल मीडिया पर कहानी चर्चा में आने के बाद मिली मदद
कविता की संघर्ष की कहानी सामने आने के बाद उनकी तस्वीर और कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में आई। इसके बाद अंकित रनर एकेडमी से जुड़े अजय करमाली सहित कुछ लोगों ने उनसे मुलाकात कर उन्हें ट्रैक सूट और रनिंग शूज़ उपलब्ध कराए। इससे अब उन्हें आगे की दौड़ और तैयारी में कुछ सुविधा मिलने की उम्मीद है।
बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर दौड़ीं कविता
कविता महतो की कहानी उन लोगों के संघर्ष की याद दिलाती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने परिवार और भविष्य के लिए लगातार मेहनत करते हैं। उनके लिए 1600 मीटर की वह दौड़ केवल भर्ती परीक्षा का हिस्सा नहीं थी, बल्कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और परिवार को आर्थिक मजबूती देने की उम्मीद भी थी। अब सभी की नजर उनके आगे के चयन और Home Guard बनने के सपने पर है।








