गोरतरा में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, : अवैध लकड़ी कटाई पर वन विभाग सख्त, 5 घनमीटर खैर की लकड़ी जब्त।

अवैध लकड़ी कटाई पर वन विभाग सख्त, 5 घनमीटर खैर की लकड़ी जब्त।
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शहडोल में खैर की लकड़ियों के अवैध कारोबार पर वन विभाग का बड़ा प्रहार, घर के पीछे छिपाकर रखे गए 70 लट्ठे बरामद; चैन सॉ मशीन और कुल्हाड़ियां भी जब्त

 

  शहडोल। जिले में वन संपदा के अवैध दोहन और कीमती लकड़ियों के अनधिकृत भंडारण के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। गोरतरा गांव में गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग की विशेष टीम ने एक घर के पीछे स्थित बाड़ी में दबिश देकर खैर प्रजाति की 70 लकड़ियां बरामद की हैं। बरामद लकड़ियों का कुल परिमाण लगभग 5 घनमीटर आंका गया है। कार्रवाई के दौरान मौके से लकड़ी की कटाई में इस्तेमाल होने वाली पेट्रोल चालित आधुनिक चैन सॉ मशीन, दो कुल्हाड़ियां और भारी वजन तौलने वाला इलेक्ट्रॉनिक कांटा भी जब्त किया गया है।

 

वन विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध लकड़ी कटाई और भंडारण के मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विभाग ने बरामद लकड़ियों और उपकरणों को अपने कब्जे में लेकर वन अपराध का प्रकरण दर्ज किया है। अब मामले से जुड़े लोगों की भूमिका और लकड़ियों के स्रोत की जांच की जा रही है।

 

गुप्त सूचना ने खोली अवैध लकड़ी भंडारण की परत

जानकारी के अनुसार, वन विभाग के अमले को गोपनीय सूचना मिली थी कि गोरतरा गांव में एक घर के पीछे स्थित बाड़ी में खैर प्रजाति की कीमती लकड़ियों का अवैध रूप से भंडारण किया जा रहा है। सूचना में लकड़ियों की कटाई और उन्हें एक स्थान पर जमा किए जाने की बात भी सामने आई थी।

 

सूचना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई और विशेष टीम को चिह्नित स्थान पर भेजा। टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान घर के पीछे स्थित बाड़ी में खैर प्रजाति के 70 लट्ठे रखे हुए मिले। वन अमले ने सभी लकड़ियों का निरीक्षण कर उन्हें जब्ती की कार्रवाई में शामिल किया।

 

70 लट्ठे और लगभग 5 घनमीटर लकड़ी जब्त

वन विभाग की कार्रवाई में बरामद लकड़ियों की मात्रा लगभग 5 घनमीटर बताई गई है। खैर प्रजाति की लकड़ी को महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इसके अवैध कटान और अनधिकृत भंडारण पर वन विभाग की निगरानी रहती है।

 

मौके पर इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी मिलने के बाद विभाग ने बरामद सामग्री को अपने कब्जे में लिया। अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन लकड़ियों को किस स्थान से काटकर लाया गया था और इन्हें कहां पहुंचाने या बेचने की तैयारी थी। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।

 

चैन सॉ मशीन, दो कुल्हाड़ी और इलेक्ट्रॉनिक कांटा भी मिला

इस कार्रवाई में केवल लकड़ियां ही नहीं, बल्कि कटाई और तौल से संबंधित उपकरण भी जब्त किए गए हैं। वन अमले ने मौके से पेट्रोल से चलने वाली आधुनिक चैन सॉ मशीन, दो कुल्हाड़ियां और भारी वजन तौलने वाला इलेक्ट्रॉनिक कांटा बरामद किया है।

 

इन उपकरणों की बरामदगी के बाद जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था और बरामद लकड़ियों के भंडारण से इनका क्या संबंध है। वन विभाग सभी जब्त सामग्री को अपने कब्जे में लेकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर रहा है।


 

वन अपराध का मामला दर्ज, आरोपियों की भूमिका की जांच

वन विभाग ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत वन अपराध का प्रकरण दर्ज कर लिया है। अब विभाग की जांच का दायरा लकड़ियों के भंडारण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके संभावित स्रोत, कटाई में शामिल लोगों और आगे की आपूर्ति से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

 

जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि खैर के पेड़ किस क्षेत्र से काटे गए, लकड़ियों को गोरतरा तक कैसे पहुंचाया गया और क्या इस गतिविधि में अन्य लोग भी शामिल हैं। फिलहाल वन विभाग की ओर से अग्रिम वैधानिक कार्रवाई जारी है।

 

जंगल की संपदा पर अवैध कारोबार की चुनौती

वन क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई केवल लकड़ी के नुकसान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर पर्यावरण, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों पर भी पड़ता है। खैर जैसी उपयोगी प्रजातियों की अवैध कटाई और लकड़ियों का अनधिकृत कारोबार वन संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

 

ऐसे मामलों में समय पर सूचना और वन विभाग की सक्रिय कार्रवाई महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गोरतरा में हुई यह कार्रवाई वन संपदा की सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है। हालांकि, इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने और लकड़ियों के स्रोत तथा संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगी।

 

अब सबसे बड़ा सवाल: आखिर खैर के ये 70 लट्ठे कहां से काटकर लाए गए थे? क्या इनके पीछे केवल स्थानीय स्तर पर लकड़ी का भंडारण था या इसके तार किसी बड़े अवैध कारोबार से जुड़े हैं? इन सवालों का जवाब वन विभाग की आगे की जांच से सामने आने की उम्मीद है।

 

 

 


 

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