जंगलों में 2,890 किलो महुआ लहान बरामद: उमरिया में अवैध शराब पर कार्रवाई

उमरिया में अवैध शराब पर कार्रवाई
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 जंगलों में छिपी थी अवैध शराब की फैक्ट्री! आबकारी विभाग की दबिश से मचा हड़कंप

 

उमरिया में 2,890 किलो महुआ लहान बरामद, 187 डिब्बे-ड्रम और मटके जब्त कर मौके पर किए गए नष्ट; जंगलों के बीच चल रही थी कच्ची शराब बनाने की तैयारी, आखिर कब तक चलता रहेगा नशे का यह अवैध कारोबार?

 

मध्य प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार लगातार चुनौती बना हुआ है। शहरों से लेकर गांवों और दूरदराज के जंगलों तक अवैध शराब बनाने और बेचने की गतिविधियों की खबरें सामने आती रहती हैं। कई बार आबकारी विभाग की कार्रवाई में ऐसे ठिकानों का खुलासा होता है, जहां घनी झाड़ियों, नदी-नालों और सुनसान इलाकों को अवैध कारोबार का सुरक्षित अड्डा बनाया जाता है। अब उमरिया जिले से सामने आया मामला भी इसी तरह की गतिविधियों की ओर इशारा कर रहा है। यहां जंगलों के बीच बड़े पैमाने पर कच्ची शराब तैयार करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन आबकारी विभाग की अचानक पहुंची टीम ने पूरे खेल पर पानी फेर दिया।

 

जंगल की झाड़ियों में चल रही थी शराब बनाने की तैयारी

जानकारी के अनुसार, उमरिया जिले में आबकारी विभाग ने अवैध शराब निर्माण के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। मंगलवार को विभाग की टीम ने उमडार, ज्वालामुखी और महरोई के दुर्गम जंगलों तथा नदी-नालों के आसपास स्थित सुनसान स्थानों पर एक साथ दबिश दी। कार्रवाई के दौरान टीम को घनी झाड़ियों के बीच छिपाकर रखे गए प्लास्टिक के बड़े डिब्बे, ड्रम और मिट्टी के मटके मिले। इन बर्तनों में भारी मात्रा में महुआ लहान भरकर रखा गया था, जिसका उपयोग कच्ची शराब तैयार करने के लिए किया जाना था।

187 बर्तन, 2,890 किलो महुआ लहान और करीब 3 लाख का माल

आबकारी विभाग की कार्रवाई में कुल 187 प्लास्टिक के बड़े डिब्बे, ड्रम और मिट्टी के मटके बरामद किए गए। इनमें लगभग 2,890 किलोग्राम महुआ लहान भरा हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 3 लाख रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में महुआ लहान का मिलना इस बात को सामने लाता है कि अवैध शराब निर्माण के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही थी।

 

टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी सामग्री को जब्त कर मौके पर ही नष्ट कर दिया। इस कार्रवाई से अवैध शराब तैयार करने की संभावित बड़ी खेप को समय रहते रोक दिया गया।

 

सुनसान जंगल ही क्यों बन रहे हैं अवैध कारोबार के ठिकाने?

इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल यह भी सामने आता है कि आखिर अवैध शराब बनाने वाले लोग जंगलों और दुर्गम इलाकों को ही अपना ठिकाना क्यों बना रहे हैं? क्या सुनसान स्थानों का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि प्रशासन और आबकारी विभाग की नजरों से बचा जा सके? घनी झाड़ियों और नदी-नालों के आसपास इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री पहुंचाना और उसे लंबे समय तक छिपाकर रखना भी जांच का विषय है।

 

अगर इतनी बड़ी मात्रा में महुआ लहान जमा किया जा रहा था, तो इसके पीछे कितने लोग सक्रिय थे? कच्ची शराब तैयार होने के बाद इसकी सप्लाई किन गांवों और क्षेत्रों में की जानी थी? क्या इस कारोबार से जुड़े लोगों का कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है? इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।

 

सिर्फ लहान नष्ट करने से खत्म होगा अवैध शराब का कारोबार?

आबकारी विभाग की यह कार्रवाई निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन अवैध शराब के कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के लिए केवल सामग्री जब्त करना और नष्ट करना ही पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि ऐसे ठिकानों को संचालित करने वाले लोगों की पहचान की जाए और यह पता लगाया जाए कि इस कारोबार को आर्थिक रूप से कौन संचालित कर रहा है।

 

जंगलों में छिपाकर रखी गई इतनी बड़ी मात्रा में महुआ लहान यह भी बताती है कि अवैध शराब निर्माण की गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाए रखना कितना जरूरी है। विभाग को ऐसे संभावित ठिकानों पर नियमित जांच और कार्रवाई जारी रखनी होगी, ताकि दोबारा इस तरह की गतिविधियां शुरू न हो सकें।

 

नशे का कारोबार और आम लोगों की चिंता

अवैध शराब का सबसे बड़ा नुकसान आम परिवारों और समाज को उठाना पड़ता है। बिना उचित गुणवत्ता नियंत्रण के तैयार की गई शराब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह का कारोबार युवाओं और परिवारों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ लोगों में जागरूकता और अवैध शराब की सूचना देने की व्यवस्था भी मजबूत होना जरूरी है।

 

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