Bharat Ratna Scientist: सीएनआर राव के नाम में एक अक्षर की गलती

Neel Saxena
1 महीने पहलेHamara media aisa hi hona chahiye, sach aur saaf.
Nisha Shah
1 महीने पहलेKya koi aur khabar bhi aane wali hai is topic par?
Ada khan
1 महीने पहलेKya koi aur khabar bhi aane wali hai is topic par?
Anika Rajput
1 महीने पहलेEkdum sahi aur balanced news hai yeh.
Dhruv Bhatt
1 महीने पहलेNishpaksh patrakarita ke liye dhanyawad.
कर्नाटक में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान भारत रत्न से सम्मानित प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम भी एक रिकॉर्ड संबंधी गलती के चलते जांच के दायरे में आ गया है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नाम में अंतर के कारण उन्हें अधिकारियों के सामने पेश होकर अपनी पहचान स्पष्ट करने के लिए कहा गया है।
पुरानी और नई वोटर लिस्ट में नाम की स्पेलिंग अलग
मामला दरअसल प्रोफेसर सीएनआर राव के नाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर से जुड़ा है। पुरानी मतदाता सूची में उनका नाम 'Prof CNR Rao' दर्ज है, जबकि मौजूदा रिकॉर्ड में 'Proff CNR Rao' लिखा दिखाई दे रहा है। यानी 'Prof' में एक अतिरिक्त 'F' जुड़ गया है।
आयोग की वेबसाइट पर नोटिस, राव को नहीं मिला सीधे नोटिस
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर इस संबंध में नोटिस दिखाई दे रहा है। हालांकि, प्रोफेसर सीएनआर राव की ओर से कहा गया है कि उन्हें अब तक चुनाव आयोग की तरफ से कोई सीधा नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने इस मामले की जानकारी और नोटिस को लेकर स्पष्टता नहीं होने की बात कही है।
'Self-Name Mismatch' बना वजह
नोटिस में कारण के तौर पर 'नाम में अंतर' (Self-Name Mismatch) का उल्लेख किया गया है। SIR प्रक्रिया में पुराने मतदाता रिकॉर्ड और वर्तमान मतदाता सूची की जानकारी में अंतर होने पर ऐसे मामलों की जांच की जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत प्रोफेसर राव का नाम भी संबंधित रिकॉर्ड में सामने आया है।
मल्लेश्वरम में हो सकती है सुनवाई
जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर सीएनआर राव को बेंगलुरु के मल्लेश्वरम स्थित IISc के पास होने वाली सुनवाई में पेश होकर अपनी पहचान साबित करनी पड़ सकती है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में यह मामला MLH 157 और 187 सीरियल नंबर से जुड़े SIR नोटिस में दिखाई दे रहा है।
देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में शामिल हैं सीएनआर राव
92 वर्षीय प्रोफेसर सीएनआर राव का जन्म बेंगलुरु के बासवनगुडी में हुआ था। सॉलिड-स्टेट और स्ट्रक्चरल केमिस्ट्री के क्षेत्र में उनके योगदान को दुनियाभर में सम्मान मिला है। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। वे यह सम्मान पाने वाले देश के तीसरे वैज्ञानिक हैं।
एक अतिरिक्त अक्षर ने खड़ा किया रिकॉर्ड का सवाल
पूरे मामले में खास बात यह है कि विवाद किसी बड़े दस्तावेजी अंतर को लेकर नहीं, बल्कि नाम में जुड़े एक अतिरिक्त 'F' को लेकर सामने आया है। अब SIR प्रक्रिया के तहत रिकॉर्ड की इस विसंगति को स्पष्ट करने के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।








