MP Farmers Protest: मूंग की 100% MSP खरीद की मांग को लेकर भोपाल में किसानों का आंदोलन तेज

Ravi sinha
23 घंटे पहलेYeh padh ke ankhe khul gayi, sabko dikhao.
Aryan Malhotra
1 दिन पहलेIska aage kya hoga? Koi update milega kya?
Pooja Reddy
1 दिन पहलेIska aage kya hoga? Koi update milega kya?
Kunal Rao
1 दिन पहलेAcchi khabar! Positive news bhi aati rehni chahiye.
Neha Tripathi
1 दिन पहलेSach dikhane ka shukriya, aisi journalism chahiye.
Tanya Bajaj
1 दिन पहलेYeh padh ke ankhe khul gayi, sabko dikhao.
मध्य प्रदेश में मूंग की पूरी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। नर्मदापुरम जिले के बरखेड़ा से शुरू हुई किसान क्रांति पैदल यात्रा मंगलवार को भोपाल पहुंची, जहां बड़ी संख्या में किसान होशंगाबाद रोड के आसपास डेरा डाले हुए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
केंद्र से खरीद सीमा बढ़ाने की मांग, कृषि मंत्री ने शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र
किसानों के आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने भी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। राज्य के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग की सरकारी खरीद की सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई है। किसानों की मुख्य मांग है कि प्रदेश में उत्पादित मूंग की 100 फीसदी उपज MSP पर खरीदी जाए, ताकि किसानों को अपनी पूरी फसल का उचित मूल्य मिल सके।
मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच की तैयारी, पुलिस ने की बैरिकेडिंग
किसानों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने का ऐलान किया है। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की है। भोपाल के एसीपी आदित्य राज सिंह के अनुसार, प्रदर्शन को देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है और यातायात को सुचारू रखने के लिए कुछ मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर बातचीत जारी है और आगे की कार्रवाई अधिकारियों के निर्देश के अनुसार की जाएगी।
किसानों की दो प्रमुख मांगें, 100% मूंग खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि सीमित खरीदी स्लॉट, ई-टोकन और अन्य व्यवस्थाओं के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी पूरी मूंग उपज सरकारी केंद्रों पर नहीं बेच पा रहे हैं। किसानों की मांग है कि मूंग की 100 फीसदी उपज MSP पर खरीदी जाए और ई-टोकन जैसी व्यवस्था को समाप्त कर किसानों को अपनी फसल बेचने का पर्याप्त अवसर दिया जाए।
किसान आंदोलन बना परिवारों के संघर्ष की तस्वीर
भोपाल में जारी किसान आंदोलन केवल फसल और MSP की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां किसानों के परिवारों की आर्थिक परेशानियां भी सामने आ रही हैं। आंदोलन स्थल पर कई किसानों ने अपनी समस्याएं साझा कीं। किसी किसान ने बच्चों की स्कूल फीस नहीं भर पाने की बात कही, तो किसी ने बीमारी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद आंदोलन में शामिल होने की मजबूरी बताई।
पिता के लिए खाना लेकर पहुंचीं Gen Z बेटियां
कटारा हिल्स की रहने वाली प्रगति पटेल और प्रकृति पटेल अपने किसान पिता के लिए आंदोलन स्थल पर खाना लेकर पहुंचीं। दोनों भोपाल में पढ़ाई कर रही हैं, जबकि प्रगति MBA की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता कई दिनों से आंदोलन में शामिल हैं, इसलिए वे उनके लिए घर का खाना लेकर आई हैं।
बेटियों ने कहा कि उन्होंने बचपन से अपने पिता को खेती के लिए संघर्ष करते देखा है। उनके मुताबिक किसान दिन-रात मेहनत करता है, लेकिन अगर उसे अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलेगा तो उसके सामने आर्थिक संकट और गहरा जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
किसान बोले- इस बार मांग पूरी होने के बाद ही लौटेंगे
हरदा से आंदोलन में शामिल हुए किसान अशोक गुर्जर ने बताया कि मूंग की फसल तैयार करने के लिए किसानों ने भीषण गर्मी में कड़ी मेहनत की है। उनका कहना है कि 45 से 46 डिग्री तापमान में खेतों में काम करने के बावजूद अगर पूरी उपज की सरकारी खरीद नहीं होती है, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि परिवार ने उन्हें आंदोलन में जाने से नहीं रोका, बल्कि मांग पूरी होने तक संघर्ष करने का हौसला दिया। कई किसानों का कहना है कि वे इस बार अपनी मांगों को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ने के इरादे से भोपाल पहुंचे हैं।
बच्चों की फीस से लेकर खेती के नुकसान तक, किसानों ने बताई अपनी परेशानी
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने अपनी आर्थिक परेशानियों का भी जिक्र किया। एक किसान ने बताया कि मूंग की खेती में पहले की फसल से हुई कमाई लगा दी, लेकिन सीमित सरकारी खरीदी के कारण पूरा आर्थिक हिसाब बिगड़ गया। उन्होंने दावा किया कि बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर पा रहे हैं और परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
वहीं, कुछ किसानों ने खाद के लिए ई-टोकन व्यवस्था, सीमित खरीदी स्लॉट और बिजली की समस्या को लेकर भी नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि इन समस्याओं के कारण खेती करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
बीमारी और पारिवारिक परेशानियों के बावजूद आंदोलन में पहुंचे किसान
आंदोलन में शामिल कुछ किसानों ने बताया कि वे गंभीर स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं के बावजूद भोपाल पहुंचे हैं। एक किसान ने बताया कि उनके पिता का हाल ही में घुटने का ऑपरेशन हुआ है, जबकि खुद भी कमर की समस्या से परेशान हैं। इसके बावजूद वे पैदल यात्रा में शामिल हुए, क्योंकि उनके पास बड़ी मात्रा में मूंग की उपज है और वे पूरी फसल की सरकारी खरीद चाहते हैं।
सात दिन का राशन-पानी लेकर पहुंचे किसान
किसानों ने लंबे आंदोलन की तैयारी भी की है। कई प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर-ट्रॉली में करीब सात दिन का राशन और पानी लेकर भोपाल पहुंचे हैं। कुछ किसान अपने साथ खाना पकाने की व्यवस्था भी लेकर आए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि मांगों पर समाधान नहीं होने तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
19 किसान संगठनों की भागीदारी का दावा
किसान नेताओं के अनुसार, संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। बरखेड़ा से शुरू हुई किसान क्रांति पैदल यात्रा औबेदुल्लागंज, मंडीदीप और 11 मील होते हुए भोपाल पहुंची। किसानों का दावा है कि रास्ते में उन्हें कई जगह रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन वे आगे बढ़ते रहे।
सरकार और किसानों के बीच बातचीत पर टिकी नजर
फिलहाल भोपाल में किसानों के आंदोलन को लेकर प्रशासन और सरकार की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी हुई है। एक ओर किसान 100 फीसदी मूंग खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग पर अड़े हैं, वहीं राज्य सरकार ने केंद्र से खरीद सीमा बढ़ाने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच जारी बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे और तेज होता है।



