मानसून सत्र के आखिरी दिन भी हंगामा: अमित शाह के 24 घंटे के प्रस्ताव को विपक्ष ने ठुकराया

अमित शाह के 24 घंटे के प्रस्ताव को विपक्ष ने ठुकराया
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Diya Gupta

Diya Gupta

0 सेकंड पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Nisha Shah

Nisha Shah

0 सेकंड पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Saanvi Pandey

Saanvi Pandey

0 सेकंड पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Sonu rai

Sonu rai

48 मिनट पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

1 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे टकराव के बीच गुजर रहा है। जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई समेत कई मुद्दों को लेकर संसद में जारी गतिरोध खत्म नहीं हो पाया है। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से 24 घंटे की लंबी चर्चा के प्रस्ताव ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।


अमित शाह ने दिया 24 घंटे की चर्चा का प्रस्ताव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जारी गतिरोध खत्म करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर लंबी चर्चा की पेशकश की। शाह ने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और वह विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।प्रस्ताव के मुताबिक, शाह बुधवार दोपहर 3 बजे से गुरुवार दोपहर 3 बजे तक सदन में मौजूद रहकर चर्चा में हिस्सा लेने के लिए तैयार थे। सरकार की ओर से इसे विपक्ष को मुद्दों पर खुली बहस का अवसर देने के तौर पर पेश किया गया।


राहुल गांधी ने किया पलटवार
अमित शाह के प्रस्ताव पर विपक्ष की प्रतिक्रिया सकारात्मक नहीं रही। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं और छात्रों को लंबे भाषण या उपदेश नहीं चाहिए, बल्कि उनके सवालों के सीधे जवाब चाहिए।विपक्ष का मुख्य सवाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर है। विपक्ष यह जानना चाहता है कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई का आदेश किस स्तर से दिया गया।कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि केवल सदन में लंबी चर्चा कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। वे पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय करने और पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं।

 

सरकार ने सत्र बढ़ाने का भी दिया संकेत
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार की तैयारी स्पष्ट की। उन्होंने संकेत दिया कि यदि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार होता है, तो जरूरत पड़ने पर मानसून सत्र की अवधि बढ़ाने पर भी सरकार विचार कर सकती है।हालांकि, विपक्ष और सरकार के बीच सहमति नहीं बनने से सदन में हंगामे की स्थिति बनी रही। अंतिम दिन भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि दोनों पक्ष किसी साझा समाधान पर पहुंचेंगे या नहीं।


कई अहम विधेयकों पर भी राजनीतिक टकराव
संसद में जारी हंगामे के बीच सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाया। इनमें पेपर लीक से संबंधित संशोधन और केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने से जुड़ा विधेयक शामिल है।वहीं विदेशी फंडिंग से जुड़े FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद बने रहे। इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजे जाने की बात सामने आई है।


आखिरी दिन भी सस्पेंस बरकरार
मानसून सत्र के अंतिम दिन सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच किसी मुद्दे पर सहमति बन पाएगी। अमित शाह का 24 घंटे चर्चा का प्रस्ताव सरकार की ओर से गतिरोध तोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि विपक्ष इसे पर्याप्त नहीं मान रहा है।विपक्ष का जोर चर्चा से ज्यादा जवाबदेही पर है। वहीं सरकार का कहना है कि वह सदन में सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है।ऐसे में संसद का यह मानसून सत्र राजनीतिक टकराव, हंगामे और कई अहम मुद्दों पर गतिरोध के लिए चर्चा में बना हुआ है। अंतिम दिन होने के बावजूद सरकार और विपक्ष के बीच समाधान की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है।

 

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Diya Gupta

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Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Nisha Shah

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India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Saanvi Pandey

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Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Sonu rai

Sonu rai

48 मिनट पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Aarohi Chaudhary

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1 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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