लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: CBI को झटका,लालू की जमानत बरकरार

Anil Sen
0 सेकंड पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाला मामलों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की जमानत और सजा निलंबन आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इतने वर्षों बाद इस स्तर पर उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। इस फैसले से लालू यादव को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता का दिया हवाला
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए हुए करीब 6 से 7 वर्ष बीत चुके हैं। ऐसे में लंबे समय बाद जमानत रद्द करना न्यायसंगत नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप केवल उचित और असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट को 6 महीने में अपील निपटाने का निर्देश
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत बरकरार रखी, लेकिन झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि 2018 से लंबित मुख्य आपराधिक अपीलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाए। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि सभी लंबित अपीलों पर अगले छह महीने के भीतर निर्णय देने का प्रयास किया जाए, ताकि मामले का अंतिम निपटारा हो सके।
CBI ने सजा की गणना पर उठाए सवाल
सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि लालू यादव कई चारा घोटाला मामलों में दोषी हैं, इसलिए उनकी सजाएं एक साथ नहीं बल्कि क्रमवार चलनी चाहिए थीं। एजेंसी का कहना था कि इसी कारण आधी सजा पूरी होने के आधार पर दी गई जमानत की गणना गलत थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य और कानूनी आधार रखा
लालू प्रसाद यादव के वकीलों ने अदालत में कहा कि विभिन्न मामलों में हिरासत अवधि की गणना पहले भी एक साथ मानी जाती रही है। उन्होंने लालू यादव की बढ़ती उम्र, गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और वर्ष 2022 में हुए किडनी ट्रांसप्लांट का भी हवाला दिया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इन परिस्थितियों में जमानत रद्द करना उचित नहीं होगा।
देवघर कोषागार मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
यह मामला चारा घोटाले के देवघर कोषागार से लगभग ₹89.27 लाख की अवैध निकासी से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन वर्ष की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट ने जुलाई 2019 में उन्हें जमानत दे दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद लालू यादव की जमानत बरकरार रहेगी, जबकि मुख्य अपीलों पर अंतिम फैसला झारखंड हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद आएगा।








