ECI Complaint Row: कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की

Monika Das
0 सेकंड पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर कार्रवाई नहीं
नई दिल्ली में चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज से जुड़े एक मामले में कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की। दोनों चुनाव आयुक्तों ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। आरटीआई के जवाब में सामने आई फाइल नोटिंग के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय ने शिकायतों को स्वीकार किया, लेकिन आयोग की ओर से औपचारिक संचार नहीं होने के कारण इस स्तर पर कार्रवाई को अनुचित माना। सचिवालय ने आशंका जताई कि ऐसा कदम चुनाव आयोग के संवैधानिक कामकाज में हस्तक्षेप माना जा सकता है।
कार्य आवंटन में बदलाव को लेकर विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, विवाद चुनाव आयोग में कार्य आवंटन से जुड़े एक आदेश के बाद शुरू हुआ। उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरू की 27 जुलाई से 9 अगस्त तक की छुट्टी के दौरान मनीष गर्ग को प्रशासन प्रभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। गर्ग ने 28 जुलाई को कार्य आवंटन में बदलाव का आदेश जारी किया। सुखबीर सिंह संधू ने आरोप लगाया कि ये बदलाव आयोग से पूर्व परामर्श किए बिना किए गए थे। वहीं, विवेक जोशी ने शिकायत की कि संबंधित फाइल मांगने के बावजूद प्रशासन विभाग ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराई।
आरटीआई से सामने आई फाइल नोटिंग
सेवानिवृत्त कमोडोर और पारदर्शिता कार्यकर्ता लोकेश के. बत्रा ने इस मामले में आरटीआई आवेदन दायर किया था। इसके जवाब में सामने आई फाइल नोटिंग के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने आरोप लगाया कि कार्य आवंटन में बदलाव करने से पहले आयोग और संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा नहीं की गई। कैबिनेट सचिवालय में 3 और 4 अगस्त को इस मामले पर आंतरिक चर्चा हुई और 5 अगस्त को कैबिनेट सचिव ने दोनों चुनाव आयुक्तों को पत्र लिखा। इसके बाद तैयार की गई टिप्पणियों में मामले को मुख्य चुनाव आयुक्त और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के संज्ञान में लाने पर भी विचार किया गया।
संवैधानिक स्वतंत्रता का दिया हवाला
कैबिनेट सचिवालय ने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय है, जिसके फैसले जहां संभव हो सर्वसम्मति से और अन्यथा बहुमत से लिए जाते हैं। सचिवालय के अनुसार, आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए उसके आंतरिक कामकाज में कार्यकारी हस्तक्षेप से बचना जरूरी है। उसने यह भी कहा कि मनीष गर्ग के आचरण का आकलन चुनाव आयोग के लागू नियमों और दिशानिर्देशों के तहत किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को अपने बयान में कहा था कि संबंधित कार्य पुनर्वितरण आदेश दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देशों के बाद लागू नहीं किए गए थे।








