12 Years of Modi Governance: 76वें जन्मदिन पर पीएम मोदी के 12 साल के शासन की तस्वीर, योजनाओं और प्रशासनिक बदलावों पर नजर

76वें जन्मदिन पर पीएम मोदी के 12 साल के शासन की तस्वीर, योजनाओं और प्रशासनिक बदलावों पर नजर
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76वें जन्मदिन पर 12 वर्षों के शासन की समीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2026 को अपना 76वां जन्मदिन मनाया। उनके 2014 से अब तक के कार्यकाल को प्रशासन, सार्वजनिक नीति, डिजिटल सेवाओं, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं में हुए बदलावों के संदर्भ में देखा जा रहा है। 10 जून 2026 को मोदी लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे कर जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के लगातार निर्वाचित कार्यकाल के रिकॉर्ड से आगे निकल गए।

 

जनधन और डिजिटल भुगतान से वित्तीय समावेशन

जनधन योजना, आधार और मोबाइल आधारित व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं और नागरिकों के बीच वित्तीय लेनदेन को डिजिटल बनाने में भूमिका निभाई। 9 सितंबर 2026 तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 59.26 करोड़ लाभार्थी दर्ज थे, जिनमें 33.02 करोड़ महिला लाभार्थी थीं।

 

UPI ने डिजिटल भुगतान को बनाया व्यापक

NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में UPI पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450.90 करोड़ लेनदेन हुए। इनका कुल मूल्य 29,82,355.95 करोड़ रुपये यानी लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा।

 

डिजिटल इंडिया से सरकारी सेवाओं में बदलाव

डिजिटल इंडिया के माध्यम से प्रमाणपत्र, भुगतान, पहचान, कर व्यवस्था और कई सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस व्यवस्था ने सेवा वितरण के साथ रिकॉर्ड रखने, निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही के लिए डिजिटल माध्यमों का विस्तार किया।

 

प्रगति और पीएम गति शक्ति से परियोजनाओं की निगरानी

प्रगति प्लेटफॉर्म के जरिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं और लंबित मामलों की समीक्षा की जाती रही है। पीएम गति शक्ति के तहत सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डे जैसी बुनियादी परियोजनाओं को एकीकृत तरीके से देखने और उनके बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।

 

राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई वित्त वर्ष 2013-14 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर मार्च 2026 में 1,46,572 किलोमीटर हो गई। चार लेन या उससे अधिक क्षमता वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई भी 18,371 किलोमीटर से बढ़कर 45,516 किलोमीटर हुई।

 

रेलवे विद्युतीकरण में तेजी

रेलवे नेटवर्क के विद्युतीकरण पर भी लगातार जोर दिया गया। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 तक भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका था।

 

कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार

प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत, खाद्य सुरक्षा और जनधन जैसी योजनाओं के जरिए बुनियादी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया गया। सरकार के अनुसार करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। मई 2026 तक ग्रामीण नल जल कनेक्शन 3.23 करोड़ परिवारों से बढ़कर 15.84 करोड़ परिवारों तक पहुंचने का सरकारी आंकड़ा बताया गया।

 

कृषि, महिला और युवा केंद्रित योजनाएं

पीएम किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि अवसंरचना से जुड़ी पहलों के साथ महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम पर जोर दिया गया। युवाओं के लिए स्टार्टअप इंडिया, कौशल विकास और अटल इनोवेशन मिशन जैसी पहलों को उद्यमिता और रोजगार से जोड़ा गया। सरकार के अनुसार 2025 तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या दो लाख से अधिक हो गई थी।

 

विनिर्माण और आत्मनिर्भरता पर फोकस

GST और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता जैसे आर्थिक सुधारों के साथ उत्पादन आधारित प्रोत्साहन यानी PLI योजना के जरिए विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने की कोशिश की गई। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां लागू की गईं। दिए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2026 तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी और 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संभावित निवेश का उल्लेख किया गया है।

 

वैश्विक भूमिका और सांस्कृतिक विरासत

G20 की भारत की अध्यक्षता, वैक्सीन मैत्री और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी को सरकार की विदेश नीति के महत्वपूर्ण हिस्सों के रूप में देखा गया। वहीं राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन और विकास से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

 

आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों पर विशेष ध्यान

आकांक्षी जिलों और आकांक्षी ब्लॉकों की नीति के जरिए अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों की प्रगति को अलग-अलग संकेतकों के आधार पर मापने की व्यवस्था विकसित की गई। इसका उद्देश्य कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों की प्रगति पर विशेष ध्यान देना और विकास के आंकड़ों में क्षेत्रीय अंतर को कम करना है

अगली चुनौती संस्थागत क्षमता की

12 वर्षों की उपलब्धियों का आकलन केवल योजनाओं की संख्या, सड़क निर्माण या बैंक खातों के आधार पर नहीं किया जा सकता। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्थानीय निकायों की क्षमता, सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे के रखरखाव जैसे मुद्दे आगे भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

मॉडिफाइड गवर्नेंस’ के रूप में विश्लेषण

लेख के अनुसार 2014 के बाद तकनीक, डिजिटल सेवाओं, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए प्रशासन की कार्यप्रणाली में कई बदलाव दिखाई देते हैं। इन बदलावों को लंबे समय तक टिकाऊ संस्थागत व्यवस्था में बदलना आगे की महत्वपूर्ण चुनौती होगी। इसी बदलती प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को लेख में ‘मॉडिफाइड गवर्नेंस’ की अवधारणा के जरिए समझने का प्रयास किया गया है।

 

लेखक का परिचय

दिए गए लेख के अनुसार इसके लेखक प्रेम शंकर झा हैं, जिन्हें एडीआरएम, मुरादाबाद और ‘मॉडिफाइड गवर्नेंस’ पुस्तक के लेखक के रूप में उल्लेखित किया गया है। यह परिचय मूल लेख में दिए गए विवरण पर आधारित है।

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