EC freezes TMC name and symbol: TMC के नाम और सिंबल पर EC की रोक

Simran Arora
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Monika Das
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
भारत निर्वाचन आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस यानी AITC के आधिकारिक नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह ‘Flowers and Grass’ यानी ‘जोड़ा फूल’ के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयोग का यह आदेश पश्चिम बंगाल में पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर सामने आए दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावे के बाद आया है। आयोग ने कहा कि दोनों पक्ष खुद को असली पार्टी बताते हुए दावा कर रहे हैं, इसलिए मामले पर विस्तृत निर्णय जरूरी है। अंतिम फैसला होने तक दोनों गुटों को पुराने नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी।
6 अक्टूबर के उपचुनावों से पहले फैसला
चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से पहले आया है। दोनों सीटों के लिए प्रतिद्वंद्वी TMC गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। आयोग के सामने दोनों पक्षों ने पार्टी के नाम, संगठनात्मक नियंत्रण और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा रखा। उपचुनावों के दौरान मतदाताओं के सामने दोनों गुटों की अलग पहचान सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था लागू की है।
दोनों गुटों को नए नाम और सिंबल चुनने होंगे
आयोग ने दोनों गुटों को तीन-तीन वैकल्पिक पार्टी नाम और तीन-तीन फ्री चुनाव चिन्ह प्राथमिकता के क्रम में देने को कहा था। ये विकल्प चुनाव आयोग की उपलब्ध मुक्त प्रतीकों की सूची से चुने जाने हैं। आयोग इन विकल्पों में से उपयुक्त नाम और प्रतीक आवंटित करेगा। दोनों गुट चाहें तो अपने नए नाम में मूल पार्टी AITC से संबंध दिखाने का विकल्प भी रख सकते हैं। यह व्यवस्था मौजूदा उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू होगी।
संगठनात्मक विवाद बना फैसले की वजह
TMC में संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े बागी गुट ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं, जबकि ममता बनर्जी का गुट मौजूदा संगठन और पार्टी की वैधता पर अपना दावा रखता है। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि दो प्रतिद्वंद्वी समूह पार्टी पर अपना दावा कर रहे हैं। इसी वजह से आयोग ने चुनाव चिन्ह आवंटन से जुड़े 1968 के Election Symbols Order के पैराग्राफ 15 के तहत आगे विस्तृत निर्धारण की जरूरत बताई है।
ऋतब्रत गुट ने फैसले का स्वागत किया
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े गुट की ओर से फैसले का स्वागत किया गया। दूसरी ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आदेश पर आपत्ति जताई है। इन दोनों प्रतिक्रियाओं को संबंधित पक्षों के राजनीतिक दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। आयोग का वर्तमान आदेश किसी एक गुट को TMC का अंतिम वैध उत्तराधिकारी घोषित नहीं करता। अंतिम संगठनात्मक और चुनाव चिन्ह संबंधी निर्णय आगे की प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा।
अंतिम फैसला अभी बाकी
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा व्यवस्था अंतिम निर्णय नहीं है। आयोग के अनुसार दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावों का विस्तृत परीक्षण किया जाना बाकी है। फिलहाल अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों में दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने का अवसर देना है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि TMC का स्थायी नाम या चुनाव चिन्ह किसी एक गुट को मिल गया है। आगे की सुनवाई और आयोग के अंतिम निर्णय से पार्टी की आधिकारिक पहचान तय होगी।






