Haryana Farmers Protest: हरियाणा में धान खरीद को लेकर बवाल

Anika Rajput
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हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू कराने की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन मंगलवार को तनावपूर्ण हो गया। भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान शाहाबाद के शहीद ऊधम सिंह स्मारक के पास जुटे थे। किसानों की मांग थी कि मंडियों में पहुंच रही धान की फसल की सरकारी खरीद जल्द शुरू की जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर बेचने का अवसर मिल सके। किसानों ने पहले प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी और बातचीत भी हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद प्रदर्शनकारी दिल्ली-अंबाला नेशनल हाईवे-44 की ओर बढ़ने लगे।
बैरिकेडिंग तोड़कर हाईवे की ओर बढ़े किसान
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने शाहाबाद में हाईवे की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। प्रशासन और किसान नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई, लेकिन किसान तत्काल खरीद शुरू करने की मांग पर कायम रहे। इसके बाद प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स की ओर बढ़े और कुछ किसानों ने उन्हें पार कर नेशनल हाईवे तक पहुंचने की कोशिश की। कुछ किसान हाईवे तक पहुंच भी गए और कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हाईवे से हटाकर यातायात बहाल कराने की कार्रवाई की।
पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का किया इस्तेमाल
किसानों को हाईवे की ओर बढ़ने से रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। 23 सितंबर की रिपोर्ट में किसानों को तितर-बितर करने के दौरान हल्के लाठीचार्ज का भी उल्लेख किया गया है। किसान नेताओं ने पुलिस कार्रवाई में कई किसानों के घायल होने का दावा किया, जबकि पुलिस की ओर से भी कुछ जवानों के घायल होने की जानकारी दी गई। कार्रवाई के बाद किसानों ने शाहाबाद-बराड़ा रोड पर धरना शुरू कर दिया और खरीद शुरू होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
आखिर किसान जल्दी धान खरीद की मांग क्यों कर रहे हैं
किसानों का मुख्य मुद्दा धान की सरकारी खरीद शुरू होने की तारीख को लेकर है। सामान्य तौर पर हरियाणा में धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होती है, लेकिन किसानों का कहना है कि इस साल फसल मंडियों में पहले पहुंच रही है और खरीद शुरू नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है। हरियाणा सरकार ने केंद्र से खरीद प्रक्रिया को पहले शुरू करने की अनुमति मांगी थी। रिपोर्टों के अनुसार केंद्र की निर्धारित खरीद अवधि 1 अक्टूबर से 15 नवंबर है, जबकि राज्य सरकार ने पहले शुरुआत की मांग की थी। किसान संगठनों का कहना है कि मंडियों में फसल आने के बावजूद सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत हो सकती है।
पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज
शाहाबाद में किसानों पर वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने हरियाणा सरकार की कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि किसानों की मांगों को बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए था। वहीं अखिल भारतीय किसान सभा, हरियाणा समेत किसान संगठनों ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। इन संगठनों ने सरकार से धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग की है। दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन का कहना है कि नेशनल हाईवे को अवरुद्ध होने से रोकना जरूरी था और किसानों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की गई थी।
सरकार ने बातचीत से समाधान का दिया संकेत
कुरुक्षेत्र के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के अनुसार राज्य सरकार ने केंद्र से धान की खरीद जल्द शुरू करने और नमी संबंधी नियमों में छूट को लेकर अनुरोध किया है। प्रशासन की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया कि यदि केंद्र से मंजूरी में और देरी होती है तो राज्य सरकार अपने स्तर पर करीब 25 सितंबर के आसपास खरीद शुरू करने की दिशा में कदम उठा सकती है। हालांकि किसान तत्काल सरकारी खरीद शुरू करने की मांग पर कायम हैं। पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन ने कहा कि नेशनल हाईवे को बंद नहीं होने दिया जा सकता और किसानों से बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की अपील की गई है। ऐसे में अब पूरे मामले में सरकार और किसान संगठनों के बीच अगली बातचीत तथा धान की सरकारी खरीद शुरू होने पर नजर बनी हुई है।








