SC Issues Show Cause Notice: दिल्ली प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का सरकार को नोटिस

Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Ayaan Khan
9 मिनट पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
Pooja Reddy
1 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Payal jadon
3 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Monika Das
3 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Payal jadon
4 घंटे पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
Diya Gupta
6 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
दिल्ली प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, हिरासत और सार्वजनिक परिवहन में बाधा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और संबंधित प्राधिकारों से जवाब मांगा है। अदालत ने अपने 9 अक्टूबर के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मेट्रो सेवाओं को अचानक बंद करने और लोगों की आवाजाही बाधित करने जैसे कदमों पर संबंधित अधिकारियों को स्पष्टीकरण देना होगा। कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए, इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया और 13 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने को कहा।
बैरिकेड्स हटाने और इंटरनेट बहाल करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में लगाए गए बैरिकेड्स हटाने और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि मेट्रो सेवाओं का नियमित संचालन जारी रहना चाहिए और स्टेशन लोगों की जरूरत के अनुसार खुले रहने चाहिए। कोर्ट ने संबंधित सरकार से अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि आदेश का पालन किस तरह किया गया और मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश तथा निकास से संबंधित क्या व्यवस्थाएं की गई थीं।
13 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारों से पूछा कि अदालत के पूर्व आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न की जाए। सुनवाई में अदालत ने कहा कि 9 अक्टूबर के आदेश में लोगों की आवाजाही बाधित न करने और मेट्रो सेवाओं को अचानक बंद न करने से संबंधित निर्देश दिए गए थे। अब संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने और आदेश के अनुपालन की जानकारी देने के लिए कहा गया है। अवमानना के आरोपों पर अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई और प्रस्तुत जवाबों के आधार पर होगा।
प्रदर्शनकारियों की हिरासत और नागरिक अधिकारों का मुद्दा
सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों की हिरासत, पुलिस कार्रवाई और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़े मुद्दे उठाए गए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने आरोप लगाया कि कई लोगों को दिल्ली और आसपास के इलाकों से हिरासत में लिया गया तथा कुछ वकीलों के साथ भी अनुचित व्यवहार हुआ। अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से सुना और कहा कि लोगों के जीवन तथा स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर मामले की पूरी सुनवाई की जाएगी। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब भी मामले में महत्वपूर्ण होगा।
सरकार ने पुलिस कार्रवाई का पक्ष रखा
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी कहा कि मेट्रो स्टेशनों को कुछ समय के लिए बंद किया गया था और यह कदम अदालत के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया। इस पर पीठ ने सरकार से हलफनामे में स्पष्ट जानकारी देने को कहा, विशेष रूप से इस सवाल पर कि क्या कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किया गया था। अदालत ने दोहराया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिक अधिकारों का संरक्षण भी आवश्यक है।
अदालत ने नागरिक स्वतंत्रता पर दिया जोर
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को कानून-व्यवस्था के नाम पर अपनी ओर से मनमाने निर्णय नहीं लेने चाहिए; कार्रवाई संबंधित प्रशासनिक निर्णयों और कानून के अनुसार होनी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कानून-व्यवस्था का संचालन नहीं करती, लेकिन नागरिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े सवालों की न्यायिक समीक्षा कर सकती है। अब मामले में सरकार और संबंधित अधिकारियों के जवाब तथा अनुपालन हलफनामे के आधार पर आगे की सुनवाई होगी।








