Bangladesh NCP Backs Protest: भारत में SIR के खिलाफ CJP के प्रदर्शन के समर्थन में आई बांग्लादेश की NCP

Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Sonu rai
18 मिनट पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Ishaan Tiwari
1 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Harsh Pandya
1 घंटे पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Vivaan Gupta
3 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Dev Kapoor
5 घंटे पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Pooja Reddy
5 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
भारत में SIR के खिलाफ प्रदर्शन को बांग्लादेश की NCP का समर्थन
बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चल रहे CJP के आंदोलन के समर्थन में बयान दिया है। पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत, इंटरनेट सेवाओं पर कथित रोक और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चुनावी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने वाले युवाओं का संघर्ष केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक मूल्यों से भी जुड़ा है।
नाहिद इस्लाम ने सोशल मीडिया पर जताई एकजुटता
नाहिद इस्लाम ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में भारत के युवाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने वाले लोगों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, आयोजकों और पत्रकारों की हिरासत पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों का जवाब पारदर्शिता के साथ दिया जाना चाहिए। उनके बयान में शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार और पत्रकारों को बिना बाधा रिपोर्टिंग करने देने पर भी जोर दिया गया। ये टिप्पणियां बांग्लादेश की राजनीति और भारत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आई हैं।
बांग्लादेश के छात्र आंदोलन का दिया हवाला
अपने बयान में नाहिद इस्लाम ने जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख किया। यह आंदोलन सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के विरोध से शुरू हुआ था और बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गया। नाहिद ने कहा कि बांग्लादेश के लोगों ने लोकतांत्रिक अधिकारों और जवाबदेह शासन की मांग के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। उन्होंने आंदोलन के दौरान भारतीय छात्रों, लेखकों और स्वतंत्र आवाजों की ओर से मिले समर्थन को भी याद किया। उनके बयान में संयुक्त राष्ट्र के उस अनुमान का उल्लेख भी किया गया, जिसके अनुसार आंदोलन और उसे दबाने की कार्रवाई के दौरान लगभग 1,400 लोगों की मौत हुई थी।
शाहीन बाग और विश्वविद्यालयों के आंदोलनों का किया जिक्र
नाहिद इस्लाम ने भारत में लोकतांत्रिक विरोध की परंपरा का उल्लेख करते हुए शाहीन बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय तथा जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में शांतिपूर्ण असहमति और विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश के जुलाई आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं ने आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
धार्मिक सद्भाव और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जोर
NCP संयोजक ने अपने बयान में धार्मिक श्रेष्ठता, सांप्रदायिक नफरत और राजनीतिक असहिष्णुता का विरोध किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया का भविष्य सामाजिक न्याय, सांप्रदायिक सद्भाव और सभी नागरिकों के समान अधिकारों पर आधारित होना चाहिए। नाहिद ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, असहमति के अधिकार और नागरिकता से जुड़े सवालों को लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण मुद्दे बताया। उन्होंने भारत और बांग्लादेश के लोगों के बीच समानता और आपसी सम्मान पर आधारित संबंधों की जरूरत पर भी जोर दिया।
भारतीय अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील
नाहिद इस्लाम ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान करने और हिरासत में लिए गए लोगों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने प्रदर्शन आयोजित करने वालों की हिरासत के कारण स्पष्ट करने, अधिकारों का इस्तेमाल करने के कारण गिरफ्तार लोगों को रिहा करने और पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने देने की मांग भी उठाई। अपने बयान में उन्होंने शरजील इमाम और उमर खालिद का उल्लेख करते हुए लंबे समय से जारी उनकी कैद पर भी चिंता जताई। ये मांगें NCP की ओर से रखे गए विचार हैं; संबंधित मामलों और सरकारी पक्ष की स्थिति को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर समझना जरूरी है।
दिल्ली में CJP का आंदोलन और SIR विवाद
दिल्ली में CJP और अन्य संगठनों का प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की जा रही है। खबर में दी गई जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने पहले प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और इसके बाद जुटे कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया। आयोजकों ने 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक और सभा का आह्वान किया था। इस मुद्दे पर आगे की स्थिति प्रदर्शनकारियों की मांगों, प्रशासनिक कार्रवाई और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक पक्ष पर निर्भर करेगी।
भारत-बांग्लादेश संबंधों और साझा मुद्दों का भी उठाया सवाल
अपने बयान के अंत में NCP ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर होने वाली मौतों, पानी के बंटवारे, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय संप्रभुता जैसे मुद्दे भी दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हैं। पार्टी ने बराबरी, जवाबदेही और आपसी सम्मान पर आधारित दक्षिण एशिया की कल्पना रखी। नाहिद इस्लाम ने भारतीय प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सद्भाव से जुड़े संघर्ष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।








