10 लाख टन कच्ची चीनी का आयात: जमाखोरी पर भी कसा शिकंजा

Neel Saxena
15 मिनट पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Taushif Shekh
55 मिनट पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Nisha Shah
3 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Ada khan
3 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Kavya Mishra
4 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Kunal Rao
5 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Pooja Reddy
6 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Vihaan Patel
7 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Aarohi Chaudhary
7 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Tanya Bajaj
8 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Reyansh Joshi
9 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है। इस आयात पर सीमा शुल्क शून्य यानी 0 प्रतिशत रहेगा। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। शुल्क-मुक्त आयात की सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहने की जानकारी दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
त्योहारों से पहले बढ़ी चीनी की मांग
देश में आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों के कारण चीनी की खपत बढ़ जाती है। इसी बीच घरेलू बाजार में चीनी की खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी की बात सामने आई है। कुछ बाजारों में कीमतें करीब 52 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। गन्ने के उत्पादन को लेकर चिंता और उपलब्ध स्टॉक पर दबाव को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। सरकार का आयात फैसला त्योहारी मांग के दौरान पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट
सरकार ने चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आयात के साथ स्टॉक लिमिट से जुड़े कदम भी उठाए हैं। महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले बड़े थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक सीमा लागू की गई है। नए नियम के अनुसार ऐसे उपभोक्ता अपनी 15 दिनों की जरूरत से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इस श्रेणी में बड़े हलवाई, बेकरी और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ता शामिल हो सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य बाजार में जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति को रोकना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे आपूर्ति व्यवस्था बेहतर रहेगी और कीमतों पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।
करीब एक दशक बाद आयात का सहारा
भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है लेकिन इस बार घरेलू उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है। पिछले कुछ सत्रों में गन्ने के इस्तेमाल और उत्पादन से जुड़े बदलावों का असर चीनी के स्टॉक पर पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में कम उत्पादन की आशंका ने भी बाजार में चिंता बढ़ाई है। ऐसे में घरेलू मांग पूरी करने के लिए सरकार ने आयात का रास्ता अपनाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब एक दशक बाद भारत को चीनी आयात करने की जरूरत महसूस हुई है। सरकार का लक्ष्य घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना है।
महंगाई पर सरकार का फोकस
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में सामने आई है जब त्योहारी मौसम में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने वाली है। सरकार का शुल्क-मुक्त आयात का फैसला महंगाई के दबाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष भी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में त्योहारों से पहले चीनी की उपलब्धता बढ़ाना सरकार के लिए आर्थिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि आयात के बाद खुदरा कीमतों में वास्तविक कमी कितनी होगी, यह बाजार में आपूर्ति पहुंचने और मांग पर निर्भर करेगा। सरकार की कोशिश कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को रोकने की है।
बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी
10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का मानना है कि पर्याप्त उपलब्धता रहने से त्योहारी सीजन में चीनी की कमी की स्थिति नहीं बनेगी। इसके साथ ही स्टॉक लिमिट के जरिए जमाखोरी पर भी नियंत्रण रखने की कोशिश की जा रही है। आयात और घरेलू स्टॉक की निगरानी से बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। आने वाले सप्ताहों में आयातित चीनी की उपलब्धता और बाजार भाव पर इसका असर दिखाई देगा। अब त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमतों में कितना बदलाव आता है, इस पर उपभोक्ताओं और बाजार की नजर रहेगी।



