जंतर-मंतर पर बवाल, छात्रों पर लाठीचार्ज: प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

Diya Gupta
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Kavya Mishra
0 सेकंड पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Riya Jain
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Ishaan Tiwari
53 मिनट पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Sonu rai
1 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Vivaan Gupta
1 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन (20 जुलाई 2026) राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। CJP और अन्य छात्र संगठनों के आह्वान पर हजारों छात्र 'चलो संसद' मार्च के लिए जुटे थे। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी थी और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
धारा 163 लागू, बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी
संसद सत्र को देखते हुए नई दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई थी, जिसके तहत भीड़ जुटाने और जुलूस निकालने पर रोक थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने पहले उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन हालात बिगड़ने पर कार्रवाई करनी पड़ी।
लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड तोड़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। झड़प के दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई लोगों को हिरासत में भी लिया।
कई छात्रों को गंभीर चोटे आई है
हालांकि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों को गंभीर चोटे आई है, कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कुछ छात्रों का आरोप है कि उनके साथ पुलिस द्वारा बर्बारतापूर्ण व्यवहार किया गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों के ऊपर पुलिस ने आंसू गैस के गोले एवं लाठीचार्ज भी किया गया है, वीडियो में साफ तौर पर दिख रहा है।समर्थकों और छात्र संगठनों ने सरकार से छात्रों की मांगों पर सकारात्मक बातचीत करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग दोहराई है।
पुलिस का दावा- 100 से अधिक जवान घायल
इस संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों को भी गंभीर चोट आई है और कुछ लोग जख्मी भी हुए हैं,दिल्ली पुलिस का दावा है कि झड़प और पथराव की घटनाओं में 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की है और घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संसद में भी गूंजा मुद्दा, राजनीतिक बयानबाजी तेज
जंतर-मंतर की घटना की गूंज संसद के मानसून सत्र में भी सुनाई दी। विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई और छात्रों पर बल प्रयोग का मुद्दा उठाते हुए सरकार की आलोचना की, जबकि सरकार और पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।








