Katni Satyagraha: कटनी एक्शन कमेटी बोली- ‘लड़ेंगे और जीतेंगे, कटनी का हक कटनी को चाहिए’

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Anil Sen

Anil Sen

0 सेकंड पहले

Peedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.

Ada khan

Ada khan

1 घंटे पहले

Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Anjali Patil

Anjali Patil

4 घंटे पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

4 घंटे पहले

Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

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कटनी में सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर कटनी एक्शन कमेटी का सत्याग्रह तीसरे दिन भी जारी है। आंदोलनकारियों ने PPP मॉडल के बजाय पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग दोहराते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल मेडिकल कॉलेज की नहीं, बल्कि जिले के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार की लड़ाई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, कटनी में PPP मॉडल के विरोध में नागरिकों और संगठनों की ओर से सत्याग्रह एवं धरना जारी है।

 

‘हम लड़ेंगे अपने हक के लिए और जीतेंगे’
सत्याग्रह के दौरान आंदोलनकारियों ने कहा, “बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे, बोल ज़ुबान अब तक तेरी है।” उनका कहना है कि जब आम जनता सरकार को टैक्स देती है, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को अच्छी, सुलभ और सस्ती शिक्षा तथा चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए। एक्शन कमेटी ने अपना आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि “हम लड़ेंगे अपने हक के लिए और जीतेंगे।”

 

PPP मॉडल को लेकर सरकार से पहला सवाल- दूसरे राज्यों और जिलों के अनुभवों से क्या सीखा?
एक्शन कमेटी का कहना है कि मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में PPP मॉडल से मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग अनुभव सामने आए हैं। समिति सवाल उठा रही है कि यदि किसी मॉडल को लेकर निवेश, संचालन या वित्तीय व्यवहार्यता से जुड़ी चुनौतियां सामने आई हैं, तो कटनी में उसी मॉडल को अपनाने का आधार क्या है। समिति सरकार से इस संबंध में विस्तृत सार्वजनिक जानकारी और जवाब मांग रही है।
कटनी के लिए PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के उन्नयन की निविदा प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड में इस परियोजना की अनुमानित निविदा राशि ₹260 करोड़ दर्ज है।

 

सरकारी जिला अस्पताल और जमीन को निजी प्रबंधन को देने पर सवाल
आंदोलनकारियों का सबसे बड़ा सवाल कटनी जिला अस्पताल की मौजूदा सरकारी जमीन और बुनियादी ढांचे को लेकर है। उनका कहना है कि यदि जनता के पैसे से तैयार सरकारी स्वास्थ्य ढांचे का उपयोग किसी निजी संस्था द्वारा किया जाना है, तो इसकी शर्तें, अवधि, जवाबदेही और जनता के हितों की सुरक्षा पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
एक्शन कमेटी ने सवाल उठाया है कि सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर सरकार किस प्रकार यह सुनिश्चित करेगी कि उसका उपयोग व्यापक जनहित में हो और किसी निजी संस्था को अनुचित आर्थिक लाभ न मिले।

 

गरीब मरीजों के इलाज और फीस को लेकर लिखित गारंटी की मांग
आंदोलनकारियों ने PPP अस्पतालों में संभावित फीस और गरीब मरीजों की पहुंच को लेकर भी सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि कटनी में ऐसा कोई भी मॉडल लागू नहीं होना चाहिए, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर मरीज इलाज की लागत के कारण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो जाएं।
कमेटी सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग कर रही है कि निजी प्रबंधन की स्थिति में गरीब, मजदूर, दैनिक वेतनभोगी और ऐसे मरीज जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है या जिनका उपचार किसी योजना के दायरे में नहीं आता, उन्हें किस व्यवस्था के तहत इलाज मिलेगा।

 

निजी पार्टनर के बीच में प्रोजेक्ट छोड़ने पर क्या होगा?
सत्याग्रह में यह सवाल भी प्रमुखता से उठाया गया कि यदि भविष्य में PPP पार्टनर आर्थिक संकट, दिवालियापन या किसी अन्य कारण से मेडिकल कॉलेज अथवा अस्पताल का संचालन छोड़ देता है तो सरकार की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी।
कमेटी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और अस्पताल में भर्ती मरीजों का भविष्य किसी निजी संस्था की वित्तीय स्थिति पर निर्भर नहीं होना चाहिए। सरकार को पहले से स्पष्ट ‘प्लान-बी’ सार्वजनिक करना चाहिए।

 

तैयार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल पर भी सवाल
एक्शन कमेटी का आरोप है कि स्थापित जिला अस्पताल के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल PPP मॉडल में निजी पार्टनर के लिए निवेश लागत कम कर सकता है। ऐसे में समिति सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग कर रही है कि सार्वजनिक संसाधनों और निजी निवेश के बीच आर्थिक संतुलन किस आधार पर तय किया गया है और जनता को इसका प्रत्यक्ष लाभ कैसे मिलेगा।
मध्य प्रदेश सरकार ने PPP मॉडल की नीति के संदर्भ में पहले कहा था कि जिला अस्पताल उपलब्ध कराने से निवेशक को अस्पताल अलग से बनाने की आवश्यकता नहीं होगी और मॉडल में गरीब मरीजों के लिए बेड आरक्षित रखने की शर्त भी बताई गई थी।

 

आयुष्मान कार्ड से बाहर रहने वाले मरीजों की चिंता
आंदोलनकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था केवल आयुष्मान कार्डधारकों तक सीमित नहीं हो सकती। जिले के ऐसे लाखों परिवारों के लिए भी स्पष्ट नीति होनी चाहिए जो किसी सरकारी स्वास्थ्य योजना के दायरे में नहीं आते।
समिति ने सरकार से पूछा है कि PPP व्यवस्था में सामान्य मरीजों के लिए उपचार की फीस कौन तय करेगा और उस पर नियंत्रण तथा निगरानी किसकी होगी।

 

टीबी, मातृत्व सुरक्षा और कुपोषण जैसे कार्यक्रमों पर सवाल
जिला अस्पताल केवल सामान्य उपचार का केंद्र नहीं होता, बल्कि विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आंदोलनकारियों ने टीबी उन्मूलन, मातृत्व सुरक्षा, पल्स पोलियो और कुपोषण से संबंधित कार्यक्रमों को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा है कि निजी प्रबंधन इन गैर-मुनाफे वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को किस व्यवस्था के तहत संचालित करेगा।
कमेटी की मांग है कि ऐसे सभी कार्यक्रमों की जिम्मेदारी, निगरानी और सरकारी नियंत्रण की व्यवस्था सार्वजनिक की जाए।

 

मेडिकल सीटों की फीस और गरीब विद्यार्थियों का भविष्य
सत्याग्रह में मेडिकल शिक्षा की फीस को लेकर भी चिंता जताई गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फीस अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि निजी भागीदारी वाले मॉडल में फीस संरचना और सीटों की लागत विद्यार्थियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है।
कमेटी ने सरकार से पूछा है कि कटनी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए मेडिकल शिक्षा को सुलभ बनाए रखने की क्या नीति होगी।

 

सरकारी डॉक्टरों और कर्मचारियों के भविष्य पर भी सवाल
जिला अस्पताल में वर्तमान में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की सेवा शर्तों को लेकर भी एक्शन कमेटी ने सवाल उठाए हैं। समिति जानना चाहती है कि PPP व्यवस्था लागू होने की स्थिति में इन कर्मचारियों का प्रशासनिक नियंत्रण किसके पास रहेगा और उनके सरकारी सेवा अधिकारों की सुरक्षा किस प्रकार की जाएगी।
आंदोलनकारियों की मांग है कि कर्मचारियों के भविष्य और सेवा शर्तों को लेकर सरकार स्पष्ट लिखित व्यवस्था सार्वजनिक करे।

 

‘अन्य जिलों में सरकारी मॉडल तो कटनी में PPP क्यों?’
एक्शन कमेटी ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में सरकारी निवेश से मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है, तो कटनी के लिए PPP मॉडल को ही क्यों चुना गया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि कटनी को भी पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज मिलना चाहिए और जिले के नागरिकों को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर मिलना चाहिए। जुलाई 2026 में विधानसभा में भी कटनी के सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग का मुद्दा उठा था, जहां सरकार की ओर से PPP मॉडल से पीछे हटने का संकेत नहीं दिया गया था।

 

RKDF और संबद्ध संस्थाओं को लेकर लगाए गए आरोपों पर सरकार से जवाब की मांग
एक्शन कमेटी ने प्रस्तावित निजी भागीदार से जुड़े कथित पुराने विवादों और नियामकीय रिकॉर्ड को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति का दावा है कि संबद्ध संस्थाओं के पुराने रिकॉर्ड, जांच और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े मामलों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। ऐसे में कमेटी ने सरकार से मांग की है कि चयनित पार्टनर की वित्तीय स्थिति, अनुभव, नियामकीय अनुपालन, पूर्व परियोजनाओं का रिकॉर्ड और किसी भी लंबित जांच या कार्रवाई से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जाए।

 

टेंडर की पात्रता और अनुभव की शर्तों पर भी सवाल
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में अनुभव और साफ रिकॉर्ड से संबंधित शर्तों की कसौटी पर चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उनका सवाल है कि यदि किसी संस्था या उसके संबद्ध समूह के पास आवश्यक अनुभव नहीं था, तो वह पात्रता प्रक्रिया में किस आधार पर आगे बढ़ी।
कमेटी ने सरकार से पूरी टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय मूल्यांकन और चयन के आधार को सार्वजनिक करने की मांग की है।

 

NMC मान्यता को लेकर छात्रों के भविष्य की चिंता
सत्याग्रह में यह सवाल भी उठाया गया कि यदि भविष्य में मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मानकों को पूरा करने में परेशानी होती है या मान्यता से संबंधित कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो विद्यार्थियों के भविष्य की जिम्मेदारी किसकी होगी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान में किसी भी प्रकार की नियामकीय अनिश्चितता का सीधा असर विद्यार्थियों और मरीजों पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को चयनित संस्था की क्षमता, नियामकीय अनुपालन और दीर्घकालिक संचालन की गारंटी स्पष्ट करनी चाहिए।

 

‘कटनी का हक कटनी को चाहिए’
तीसरे दिन भी जारी सत्याग्रह के बीच एक्शन कमेटी ने अपना नारा दोहराया—“लड़ेंगे और जीतेंगे, कटनी का हक कटनी को चाहिए।” आंदोलनकारियों का कहना है कि वे PPP मॉडल के बजाय कटनी में पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
अब निगाहें सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर हैं। कटनी की जनता द्वारा उठाए जा रहे इन सवालों पर सरकार की ओर से विस्तृत और आधिकारिक जवाब सामने आता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।

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1 घंटे पहले

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Anjali Patil

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4 घंटे पहले

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Nidhi kumari

4 घंटे पहले

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