Young Breast Cancer: 17 साल की उम्र में भी हो सकता है स्तन कैंसर

Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
युवा उम्र में भी हो सकता है स्तन कैंसर
स्तन कैंसर को आमतौर पर 50 और 60 वर्ष की उम्र की महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से 20 वर्ष की उम्र में स्तन में गांठ महसूस होने पर कई महिलाएं इसे कैंसर से जोड़कर नहीं देखतीं। हार्मोनल बदलाव, मासिक धर्म चक्र या सौम्य गांठ को इसकी संभावित वजह मान लिया जाता है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र भी स्तन कैंसर से पूरी तरह सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
किशोरावस्था और 20 की उम्र में भी सामने आए मामले
डॉक्टरों के अनुसार, स्तन कैंसर युवा महिलाओं को भी प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में किशोरावस्था और 20 वर्ष की उम्र में भी इसका निदान हुआ है। मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड में सर्जिकल पैथोलॉजी की कंसल्टेंट डॉ. कुंजल लीला के अनुसार, उनकी सबसे कम उम्र की स्तन कैंसर मरीज 19 साल की थी। दिल्ली के सीके बिड़ला अस्पताल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा ने 22 साल की मरीज का इलाज किया है। वहीं, मधुकर रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल, दिल्ली की वरिष्ठ सलाहकार प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. साक्षी गोयल ने 25 साल की मरीज का इलाज करने की जानकारी दी। गुड़गांव के आर्टेमिस अस्पताल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और ब्रेस्ट सर्जरी के प्रमुख डॉ. दीपक झा के अनुसार, 17 साल की उम्र में भी स्तन कैंसर के मामले सामने आए हैं।
उम्र के आधार पर लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉ. मल्होत्रा के अनुसार, केवल उम्र के आधार पर यह तय नहीं करना चाहिए कि स्तन में हुआ बदलाव चिकित्सकीय जांच के योग्य है या नहीं। स्तन या डिम्बग्रंथि के कैंसर का पारिवारिक इतिहास, BRCA1 और BRCA2 जैसे विरासत में मिले आनुवंशिक बदलाव और पहले रेडिएशन का संपर्क जोखिम बढ़ा सकते हैं। हालांकि, कई युवा मरीजों में कोई स्पष्ट जोखिम कारक नहीं मिलता।
स्तन कैंसर के 5 चेतावनी संकेत
डॉक्टरों के मुताबिक, स्तन में लगातार बनी रहने वाली गांठ, निप्पल की बनावट या स्थिति में बदलाव, असामान्य निप्पल डिस्चार्ज, स्तन के आकार में बदलाव और त्वचा पर गड्ढे या अन्य असामान्य परिवर्तन ऐसे संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गांठ को केवल हार्मोनल बदलाव न समझें
मासिक धर्म चक्र के आसपास स्तन में महसूस होने वाली गांठ को कई बार हार्मोनल बदलाव मान लिया जाता है। लेकिन अगर गांठ बनी रहती है या कोई नया बदलाव दिखाई देता है, तो उसकी चिकित्सकीय जांच जरूरी है। डॉ. लीला के अनुसार, युवा महिलाएं अक्सर स्तन की गांठ को यह सोचकर नजरअंदाज कर देती हैं कि वह हानिरहित होगी। हालांकि, स्तन की कई गांठें कैंसर रहित होती हैं, लेकिन लगातार बने रहने वाले बदलावों का मूल्यांकन कराना महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी नई या लगातार बनी रहने वाली गांठ की जांच टालनी नहीं चाहिए।
घने स्तन ऊतक से जांच में आ सकती है चुनौती
युवा महिलाओं में अक्सर स्तन ऊतक अधिक घने होते हैं। इस वजह से कुछ इमेजिंग तकनीकों में असामान्यताओं की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में लक्षण बने रहने पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, भले ही शुरुआती जांच से स्पष्ट जवाब न मिले। डॉ. सिंह का कहना है कि महिला की कम उम्र को असामान्य स्तन परिवर्तनों को अनदेखा करने की वजह नहीं बनाना चाहिए। गांठ के अलावा निप्पल में बदलाव, असामान्य स्राव और स्तन के आकार या त्वचा की बनावट में परिवर्तन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
क्या पारिवारिक इतिहास बढ़ा सकता है जोखिम?
कम उम्र में स्तन कैंसर का निदान होने पर विरासत में मिले आनुवंशिक जोखिम का मूल्यांकन भी महत्वपूर्ण हो सकता है। डॉ. गोयल के अनुसार, BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन में बदलाव स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर से जुड़े प्रमुख वंशानुगत कारकों में शामिल हैं। आनुवंशिक परामर्श से महिलाओं को अपने परिवार के इतिहास को समझने, आनुवंशिक जांच की जरूरत का आकलन करने और उसके संभावित परिणामों को जानने में मदद मिल सकती है।
आनुवंशिक जोखिम का मतलब कैंसर होना तय नहीं
डॉ. गोयल के अनुसार, आनुवंशिक जोखिम होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर होना निश्चित है। यह जोखिम का आकलन कराने और डॉक्टर से सलाह लेने का संकेत है। परिवार में कैंसर का इतिहास होने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उचित जांच और आगे की देखभाल के बारे में जानकारी ली जा सकती है।
जीवनशैली से जुड़े कारकों पर भी ध्यान
डॉ. झा स्तन कैंसर के जोखिम का आकलन करते समय शराब और तंबाकू का सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, खराब पोषण और नींद से जुड़ी समस्याओं जैसे जीवनशैली कारकों का भी उल्लेख करते हैं। उनका कहना है कि कम उम्र में भी सामने आ रहे मामलों को देखते हुए जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
स्तन में बदलाव दिखने पर लें चिकित्सकीय सलाह
स्तन में किसी बदलाव को गंभीरता से लेने के लिए 40 या 50 वर्ष की उम्र तक इंतजार करना जरूरी नहीं है। अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना और लगातार बने रहने वाले लक्षणों का चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना महत्वपूर्ण है। कम उम्र होने के कारण किसी चेतावनी संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्तन में कोई नया या लगातार बना रहने वाला बदलाव दिखे तो डॉक्टर से सलाह लें।








