Rajasthan Government, Rajasthan Agriculture Depart: बीज, खाद और कीटनाशकों की जांच होगी पारदर्शी, रैंडम आधार पर चुनी जाएगी लैब

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नई दिल्ली किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए राजस्थान सरकार कृषि आदानों की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने जा रही है। नई व्यवस्था में नमूना लेने वाले निरीक्षक को पहले से पता नहीं होगा कि जांच किस प्रयोगशाला में होगी। वहीं, प्रयोगशाला को भी संबंधित डीलर या निर्माता की पहचान नहीं बताई जाएगी। इससे जांच में पक्षपात और संभावित मिलीभगत की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।
इस संबंध में जयपुर के पंत कृषि भवन में राजस्थान सरकार के कृषि विभाग और भारतीय डाक विभाग के राजस्थान परिमंडल के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। नई व्यवस्था के तहत एग्री क्यूएमएस मोबाइल ऐप के माध्यम से नमूना संग्रहण से लेकर परीक्षण और परिणाम प्रबंधन तक की प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी की जाएगी।
ऐप से होगी नमूनों की जियो-टैगिंग
नई व्यवस्था में कृषि आदान निरीक्षक मौके पर ही एग्री क्यूएमएस ऐप पर नमूने का विवरण दर्ज करेंगे। नमूना संग्रहण स्थल की जीपीएस आधारित जियो-टैगिंग की जाएगी। साथ ही उत्पाद की तस्वीरें और जरूरी दस्तावेज भी डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किए जाएंगे।
प्रत्येक नमूने के लिए अलग क्यूआर कोड बनाया जाएगा और उसे छेड़छाड़ से बचाने वाली सीलबंद पैकिंग में रखा जाएगा। इससे नमूनों की अदला-बदली और उनमें छेड़छाड़ की आशंका कम होगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से नमूनों की स्थिति और जांच की प्रगति पर नजर रखना भी आसान होगा।
रैंडम तरीके से होगा प्रयोगशाला का आवंटन
नई व्यवस्था की प्रमुख विशेषता प्रयोगशाला का रैंडम चयन है। निरीक्षक अपनी पसंद की प्रयोगशाला में नमूना नहीं भेज सकेंगे। दूसरी ओर, जांच करने वाली प्रयोगशाला को संबंधित डीलर या निर्माता की पहचान उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
इस दोहरी गोपनीयता का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना और अनुचित प्रभाव की संभावना कम करना है। प्रयोगशालाओं में परीक्षण के परिणाम भी ऑनलाइन दर्ज किए जाएंगे, जिससे प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ेगी।
स्पीड पोस्ट से प्रयोगशालाओं तक पहुंचेंगे नमूने
कृषि विभाग द्वारा लिए गए नमूनों को जयपुर भेजा जाएगा। वहां पहचान गोपनीय रखने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारतीय डाक विभाग की स्पीड पोस्ट और बिजनेस पोस्ट सेंटर सेवाओं के माध्यम से अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाया जाएगा। नमूनों की ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
इस व्यवस्था के लिए दोनों विभागों के बीच तीन वर्ष का समझौता किया गया है, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। भारतीय डाक विभाग कृषि विभाग को 'बुक नाउ पे लेटर' सुविधा भी उपलब्ध कराएगा।
अमानक कृषि आदानों पर कार्रवाई में मिलेगी मदद
बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की निष्पक्ष जांच से अमानक, नकली और घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों की पहचान करने में मदद मिलेगी। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराने और उनकी लागत, पैदावार तथा आय से जुड़े हितों की रक्षा करने का प्रयास होगा।
नई व्यवस्था से गुणवत्ता मानकों का पालन करने वाले व्यापारियों और निर्माताओं को भी निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलने की उम्मीद है।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। कृषि आदानों की गुणवत्ता का सीधा संबंध उत्पादन लागत, उत्पादकता और किसान की आय से है।








