CycloneAlert News: अक्टूबर-दिसंबर में चक्रवाती गतिविधि बढ़ने का अनुमान

Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Kavya Mishra
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Sonu rai
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
अक्टूबर से दिसंबर का समय उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवाती गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। अमर उजाला की 11 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, ISRO के उपग्रह और मौसम निगरानी से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण में इस अवधि के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में शक्तिशाली चक्रवाती प्रणालियों की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में अक्टूबर-दिसंबर 2026 के लिए चक्रवातों के Power Dissipation Index यानी PDI में 44 साल के औसत की तुलना में करीब 83 फीसदी वृद्धि का अनुमान बताया गया है। हालांकि इस अनुमान को किसी निश्चित लैंडफॉल या निश्चित संख्या में चक्रवात आने की आधिकारिक IMD चेतावनी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
83 फीसदी का आंकड़ा क्या बताता है
रिपोर्ट में 1982 से 2025 के दौरान अक्टूबर-दिसंबर में दर्ज चक्रवाती गतिविधि के PDI की तुलना 2026 के अनुमान से की गई है। PDI चक्रवातों की संख्या, उनकी तीव्रता और उनके बने रहने की अवधि को मिलाकर कुल ऊर्जा या विनाशकारी क्षमता का आकलन करने वाला सूचकांक है। अमर उजाला के अनुसार 2026 के अक्टूबर-दिसंबर के लिए PDI करीब 13.06×10⁷ knots³ रहने का अनुमान है, जबकि संबंधित ऐतिहासिक औसत करीब 7.15×10⁷ knots³ बताया गया है। इसलिए 83 फीसदी का आंकड़ा सीधे तौर पर यह नहीं कहता कि हर चक्रवात 83 फीसदी ज्यादा ताकतवर होगा।
ISRO की भूमिका क्या है
ISRO और Department of Space पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों के माध्यम से बाढ़, भूस्खलन, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केंद्र सरकार के अगस्त 2026 के जवाब के अनुसार, अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों से चक्रवातों समेत प्राकृतिक आपदाओं की near-real-time monitoring और mapping की जाती है। इसका इस्तेमाल आपदा प्रबंधन और समय रहते जोखिम का आकलन करने में किया जाता है।
IMD लगातार जारी करता है मौसम चेतावनी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग देश में चक्रवात और अन्य गंभीर मौसम प्रणालियों की निगरानी तथा पूर्वानुमान का प्रमुख सरकारी संस्थान है। सरकार के अनुसार IMD जिला स्तर पर चक्रवात और भारी बारिश से संबंधित early warnings दिन में चार बार अपडेट करता है और पूर्वानुमान सात दिन तक के लिए जारी किए जाते हैं। इसलिए किसी वास्तविक चक्रवात के बनने पर उसकी दिशा, तीव्रता और संभावित प्रभाव को लेकर IMD की ताजा चेतावनी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाएगी।
2026 में El Nino की स्थिति भी महत्वपूर्ण
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने जुलाई 2026 में संसद में बताया था कि 2026 के अक्टूबर-दिसंबर के दौरान El Nino की स्थिति और मजबूत होकर बहुत मजबूत श्रेणी तक पहुंच सकती है। सरकार ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि El Nino की सटीक तीव्रता और भारत पर उसका प्रभाव समुद्र और वायुमंडल की बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसका मतलब है कि मौसमी परिस्थितियों को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल El Nino के आधार पर किसी निश्चित चक्रवात या उसके लैंडफॉल की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
तटीय राज्यों को आधिकारिक अलर्ट पर नजर रखने की जरूरत
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से जुड़े तटीय क्षेत्रों में अक्टूबर-दिसंबर के दौरान चक्रवाती गतिविधियों की संभावना को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। हालांकि अभी किसी विशेष राज्य में निश्चित तारीख पर चक्रवात के पहुंचने या भारी तबाही होने की बात कहना जल्दबाजी होगी। आम लोगों और प्रशासन को सोशल मीडिया के दावों के बजाय IMD, संबंधित राज्य मौसम केंद्रों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की आधिकारिक चेतावनियों को आधार बनाना चाहिए। भारत की मौजूदा multi-hazard warning व्यवस्था में IMD समेत कई सरकारी एजेंसियां real-time मौसम और आपदा संबंधी चेतावनियों को साझा करती हैं।






