Hostel shortage across universities: देश के 1,278 विश्वविद्यालयों में 1,069 के पास हॉस्टल

Myra Dubey
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में हॉस्टल सुविधा को लेकर एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। अमर उजाला की 10 सितंबर 2026 की विशेष पड़ताल के अनुसार देश के 1,278 विश्वविद्यालयों में से 1,069 विश्वविद्यालयों में हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि, हॉस्टल सुविधा मौजूद होने का मतलब यह नहीं है कि वहां पढ़ने वाले सभी छात्रों को सीट मिल जाती है। कई संस्थानों में उपलब्ध क्षमता छात्रों की कुल संख्या की तुलना में काफी कम है। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कैंपस से बाहर रहने की जरूरत पड़ती है।
4.50 करोड़ छात्रों के लिए हॉस्टल सीटों का केंद्रीय आंकड़ा नहीं
AISHE 2023-24 के अनुसार भारत में उच्च शिक्षा में करीब 4.50 करोड़ विद्यार्थी नामांकित हैं। इनमें विश्वविद्यालयों और उनके संबद्ध घटकों के साथ-साथ कॉलेज और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी शामिल हैं। लेकिन इन सभी छात्रों के लिए देशभर में कुल कितनी हॉस्टल सीटें उपलब्ध हैं और कितने विद्यार्थियों को हॉस्टल मिल पाता है, इसका कोई केंद्रीय समेकित डेटा उपलब्ध नहीं होने की बात अमर उजाला की पड़ताल में सामने आई है। इससे छात्र आवास की वास्तविक जरूरत और उपलब्धता के बीच अंतर का आकलन मुश्किल हो जाता है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्र आवास पर सवाल
दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर 2026 को पांच मंजिला PG इमारत ढहने की घटना के बाद छात्रों के सुरक्षित आवास का मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा में आया है। हादसे के बाद दिल्ली में निजी PG और हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट में निजी PG और हॉस्टलों के सुरक्षा ऑडिट की मांग भी सामने आई है। वहीं, दिल्ली में कई छात्रों ने सुरक्षा को लेकर अपने PG खाली करने की बात भी सामने आई।
कैंपस से बाहर रहने को मजबूर छात्र
हॉस्टल की सीमित क्षमता के कारण अनेक विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को कैंपस के आसपास निजी PG, किराये के कमरों या अन्य आवासीय विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ता है। विशेष रूप से दूसरे शहरों और राज्यों से पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास एक बड़ी जरूरत बन जाता है। हॉस्टल सुविधा होने और हर जरूरतमंद छात्र को हॉस्टल सीट मिलने के बीच बड़ा अंतर है। यही अंतर देश में छात्र आवास की चुनौती को और गंभीर बनाता है।
दिल्ली में PG सुरक्षा को लेकर कार्रवाई तेज
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में निजी PG और भवनों की जांच भी तेज हुई है। रिपोर्ट के अनुसार MCD ने हादसे के बाद करीब 1,100 PG का सर्वे किया, जहां लगभग 20,250 छात्रों के रहने की जानकारी सामने आई। कार्रवाई के दौरान नियमों के उल्लंघन और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में कुछ संपत्तियों पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की गई। इससे निजी छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
सुरक्षित छात्र आवास के लिए केंद्रीय डेटा की जरूरत
विशेषज्ञों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अब बड़ा सवाल यह है कि देश में उपलब्ध हॉस्टल क्षमता कितनी है और वास्तविक जरूरत कितनी है। यदि हॉस्टल सीटों का समेकित राष्ट्रीय डेटा तैयार होता है तो सरकार और विश्वविद्यालय छात्र आवास की कमी वाले क्षेत्रों की पहचान कर बेहतर योजना बना सकते हैं। सत्य निकेतन हादसे के बाद यह मुद्दा केवल हॉस्टल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों के लिए सुरक्षित, नियमनबद्ध और किफायती आवास सुनिश्चित करने की जरूरत से भी जुड़ गया है।





