अल नीनो के असर से निपटने की तैयारी: शिवराज सिंह चौहान ने बुलाई हाई लेवल बैठक

शिवराज सिंह चौहान ने बुलाई हाई लेवल बैठक
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Sai Mehta

Sai Mehta

0 सेकंड पहले

Hum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

0 सेकंड पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

0 सेकंड पहले

Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Sonu rai

Sonu rai

3 घंटे पहले

Hum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

5 घंटे पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

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 कमजोर मानसून पर केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय बैठक
देश के कई हिस्सों में कमजोर मानसून और कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य उद्देश्य खरीफ फसलों पर पड़ रहे प्रभाव का आकलन करना और समय रहते आवश्यक कदम तय करना करना था।

 

 अल नीनो के प्रभाव से निपटने की रणनीति
बैठक में अल नीनो (El Niño) के कारण उत्पन्न मौसम संबंधी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कृषि मंत्रालय ने कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए जिलावार कंटिंजेंसी प्लान तैयार किया है, ताकि यदि मानसून सामान्य नहीं होता है तो किसानों को वैकल्पिक कृषि उपायों का लाभ मिल सके।


किसानों को कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को सलाह दी कि जहां मानसून में देरी हुई है, वहां कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों—जैसे मक्का, बाजरा और मूंग—की बुवाई को प्राथमिकता दें। इससे उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सकेगा।

 

खाद और बीज की उपलब्धता पर विशेष निगरानी
सरकार ने खरीफ सीजन के लिए यूरिया, डीएपी और अन्य आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रभावित जिलों में वैकल्पिक फसलों के बीज समय पर उपलब्ध कराने और कृषि विभागों को किसानों तक तकनीकी सलाह पहुंचाने के लिए कहा गया है।


बारिश में सुधार, फिर भी 178 जिले निगरानी में
कृषि मंत्रालय के अनुसार जून में देशभर में वर्षा की कमी लगभग 33 प्रतिशत थी, जो जुलाई के पहले सप्ताह में घटकर 24 प्रतिशत रह गई है। स्थिति में सुधार के बावजूद 178 संवेदनशील जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इनमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के कई जिले शामिल हैं।


किसानों तक पहुंचेगी मौसम आधारित सलाह
बैठक में कृषि विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों को निर्देश दिए गए कि वे किसानों को मोबाइल के माध्यम से स्थानीय मौसम, सिंचाई और फसल प्रबंधन से जुड़ी नियमित सलाह भेजें। सरकार का कहना है कि बदलते मौसम के बीच समय पर जानकारी और सही निर्णय से किसानों की फसलों को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।

 

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Sai Mehta

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Dhruv Bhatt

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Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Aryan Malhotra

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Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Sonu rai

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3 घंटे पहले

Hum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.

Dhruv Bhatt

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5 घंटे पहले

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