Gen Z Dating Trends: ऑर्बिटिंग से 6-7 डेटिंग तक

Priya Iyer
0 सेकंड पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Arjun Singh
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Neha Tripathi
2 घंटे पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
Sneha Menon
3 घंटे पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Sai Mehta
5 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
आज के दौर में प्यार और रिश्तों को देखने का नजरिया तेजी से बदल रहा है। पहले जहां रिश्तों को निभाने के लिए एडजस्टमेंट, इमोशनल मैच्योरिटी और आपसी समझ को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती थी, वहीं अब सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के दौर में रिश्तों से जुड़े कई नए शब्द भी लोकप्रिय हो रहे हैं। Gen Z ने डेटिंग की दुनिया को एक नई भाषा दी है, जिसमें ऑर्बिटिंग, जॉम्बीइंग, सॉफ्ट लॉन्चिंग, थ्रोनिंग, बेंचिंग, फ्यूचरफेकिंग और पॉकेटिंग जैसे शब्द शामिल हैं।
इन शब्दों के जरिए आज के युवा रिश्तों में होने वाली अलग-अलग स्थितियों और व्यवहार को आसानी से परिभाषित करते हैं। हालांकि, इन ट्रेंड्स के बीच अब एक नया विचार ‘6-7 Dating’ भी चर्चा में है, जो परफेक्ट पार्टनर की तलाश से ज्यादा सुकून और भरोसे को महत्व देने की बात करता है।
ऑर्बिटिंग क्या है?
अगर कोई व्यक्ति आपके मैसेज का जवाब नहीं देता, लेकिन सोशल मीडिया पर आपकी पोस्ट और स्टोरी लगातार देखता है या उन्हें लाइक करता है, तो इसे ऑर्बिटिंग (Orbiting) कहा जाता है। यानी व्यक्ति सीधे बातचीत से दूरी बनाए रखता है, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए आपकी जिंदगी के आसपास बना रहता है।
जॉम्बीइंग का क्या मतलब है?
किसी व्यक्ति का अचानक बिना किसी स्पष्ट वजह के आपकी जिंदगी से गायब हो जाना और लंबे समय बाद दोबारा वापस आकर ऐसे व्यवहार करना जैसे कुछ हुआ ही नहीं, जॉम्बीइंग (Zombieing) कहलाता है। यह शब्द खासतौर पर उन डेटिंग स्थितियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जहां कोई व्यक्ति अचानक संपर्क तोड़कर फिर से लौट आता है।
सॉफ्ट लॉन्चिंग: रिश्ते का हल्का-सा संकेत
जब कोई व्यक्ति अपने रिश्ते या पार्टनर के बारे में सोशल मीडिया पर सीधे जानकारी साझा नहीं करता, लेकिन तस्वीरों या पोस्ट के जरिए छोटे-छोटे संकेत देता है, तो इसे सॉफ्ट लॉन्चिंग (Soft Launching) कहा जाता है। इसमें पार्टनर की पहचान को सार्वजनिक किए बिना रिश्ते की मौजूदगी का संकेत दिया जाता है।
थ्रोनिंग: रिश्ते से ज्यादा स्टेटस मायने रखे
थ्रोनिंग (Throning) एक ऐसा डेटिंग व्यवहार है, जिसमें व्यक्ति किसी को मुख्य रूप से इसलिए डेट करता है क्योंकि उस रिश्ते से उसकी सामाजिक छवि, लोकप्रियता या स्टेटस बेहतर होता है। यानी यहां भावनात्मक जुड़ाव से ज्यादा सामाजिक फायदे को महत्व दिया जाता है।
बेंचिंग: रिश्ते में बैकअप ऑप्शन
बेंचिंग (Benching) का मतलब है किसी व्यक्ति को पूरी तरह छोड़ना भी नहीं और पूरी तरह रिश्ते में शामिल होना भी नहीं। इसमें व्यक्ति सामने वाले में दिलचस्पी बनाए रखता है, लेकिन साथ-साथ दूसरे डेटिंग विकल्पों को भी तलाशता रहता है। आसान भाषा में कहें तो किसी को बैकअप ऑप्शन की तरह बनाए रखना बेंचिंग कहलाता है।
फ्यूचरफेकिंग: भविष्य के बड़े वादे, लेकिन अमल नहीं
जब कोई व्यक्ति रिश्ते में भविष्य को लेकर बड़े-बड़े वादे करता है, जैसे शादी, साथ रहने या भविष्य की योजनाओं की बातें, लेकिन समय आने पर उन वादों को पूरा करने से पीछे हट जाता है, तो इसे फ्यूचरफेकिंग (Future Faking) कहा जाता है। यह व्यवहार रिश्ते में भावनात्मक उम्मीदें पैदा कर सकता है और बाद में निराशा का कारण बन सकता है।
पॉकेटिंग: रिश्ते को दुनिया से छिपाकर रखना
जब दो लोग एक-दूसरे को डेट कर रहे होते हैं, लेकिन अपने परिवार, दोस्तों या सोशल मीडिया से इस रिश्ते को पूरी तरह छिपाकर रखते हैं, तो इसे पॉकेटिंग (Pocketing) कहा जाता है। ऐसे रिश्तों में पार्टनर को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बचा जाता है।
6-7 Dating क्या है? अब परफेक्ट पार्टनर से ज्यादा सुकून की तलाश
Gen Z के बीच चर्चा में आया ‘6-7 Dating’ ट्रेंड रिश्तों को देखने के एक अलग नजरिए की ओर इशारा करता है। इस सोच के मुताबिक, किसी रिश्ते में पार्टनर का ‘10/10 परफेक्ट’ होना जरूरी नहीं है। इसके बजाय ऐसा इंसान ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है, जिसके साथ जिंदगी आसान, सुरक्षित और खुशहाल महसूस हो।
यहां 6 या 7 की रेटिंग का मतलब किसी व्यक्ति की कीमत कम करना नहीं है। इसका मूल विचार यह है कि कोई भी इंसान पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता। रिश्ते में असली महत्व पार्टनर के व्यवहार, भरोसे, ईमानदारी, केयरिंग नेचर और मुश्किल समय में साथ निभाने की क्षमता का होता है।
डेटिंग बर्नआउट से बचने की कोशिश
आज के समय में लगातार नए लोगों से मिलना, डेटिंग ऐप्स पर विकल्प तलाशना और हर रिश्ते से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखना कई युवाओं के लिए थकान और तनाव का कारण बन सकता है। ऐसे में 6-7 Dating का विचार इस बात पर जोर देता है कि एक ऐसा पार्टनर, जिसके साथ मानसिक शांति और भावनात्मक सुरक्षा महसूस हो, हमेशा उस व्यक्ति से बेहतर विकल्प हो सकता है जो केवल दिखने में परफेक्ट हो।
कई बार शुरुआत में बेहद आकर्षक लगने वाला व्यक्ति लंबे समय में अच्छा पार्टनर साबित नहीं होता। वहीं, कोई साधारण व्यक्ति अपने व्यवहार, समझदारी और लगातार मिलने वाले सपोर्ट के कारण रिश्ते को मजबूत बना सकता है।
क्या बदल रही है Gen Z की रिलेशनशिप सोच?
फिल्मों और रोमांटिक कहानियों ने लंबे समय तक लोगों के सामने परफेक्ट लव स्टोरी की तस्वीर पेश की है। लेकिन वास्तविक जिंदगी में रिश्ते केवल आकर्षण से नहीं चलते। इनमें आपसी सम्मान, विश्वास, दोस्ती, समझ और लगातार प्रयास की भी जरूरत होती है।
Gen Z के नए डेटिंग ट्रेंड्स यह संकेत देते हैं कि आज के युवा रिश्तों को केवल दिखावे या सोशल मीडिया की परफेक्ट तस्वीरों तक सीमित नहीं रखना चाहते। हालांकि, किसी व्यक्ति को नंबर देकर आंकना हर किसी को सही नहीं लगता। आलोचकों का मानना है कि रिश्ते में केवल अकेलेपन से बचने के लिए किसी के साथ जुड़ना भी सही फैसला नहीं है।
क्या 6-7 Dating बदल सकता है रिश्तों का भविष्य?
‘6-7 Dating’ भले ही एक नया नाम और नया ट्रेंड हो, लेकिन इसका मूल विचार काफी पुराना है। लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों में आकर्षण के साथ भरोसा, दोस्ती, सम्मान और समझ की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है।
Gen Z का यह बदलता नजरिया बताता है कि रिश्ते में हमेशा चमक-दमक और परफेक्शन जरूरी नहीं होता। कई बार एक शांत, भरोसेमंद और सुकून देने वाला रिश्ता ही जिंदगी का सबसे बेहतर चुनाव साबित हो सकता है। हालांकि, किसी भी डेटिंग ट्रेंड को अपनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि हर रिश्ता अलग होता है और सही पार्टनर का चुनाव केवल किसी ट्रेंड या रेटिंग के आधार पर नहीं, बल्कि आपसी समझ और सम्मान के आधार पर होना चाहिए।




