Dwitiya Shraddha Today: पितृपक्ष में आज द्वितीया श्राद्ध

पितृपक्ष में आज द्वितीया श्राद्ध
प्रतिक्रियाएँ
Dev Kapoor

Dev Kapoor

1 दिन पहले

Kundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.

Vivaan Gupta

Vivaan Gupta

1 दिन पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Navya Nair

Navya Nair

1 दिन पहले

Ishwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.

Sonu rai

Sonu rai

1 दिन पहले

Graha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.

Arjun Singh

Arjun Singh

1 दिन पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Sai Mehta

Sai Mehta

1 दिन पहले

Yeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

1 दिन पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

1 दिन पहले

Dharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.

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द्वितीया श्राद्ध आज
पितृपक्ष के दूसरे दिन यानी द्वितीया तिथि पर द्वितीया श्राद्ध किया जाता है। वर्ष 2026 में द्वितीया श्राद्ध 28 सितंबर को है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह श्राद्ध उन मृतक परिजनों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु शुक्ल या कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को हुई हो। इस दिन पितरों की शांति और संतुष्टि के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किए जाते हैं।

 

द्वितीया श्राद्ध का शुभ मुहूर्त
द्वितीया तिथि 27 सितंबर 2026 की रात 8:58 बजे से 28 सितंबर की शाम 7:13 बजे तक रहेगी। कुतुप मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक, रौहिण मुहूर्त 12:36 बजे से 1:23 बजे तक और अपराह्न काल 1:23 बजे से 3:47 बजे तक रहेगा। धार्मिक परंपरा में कुतुप और रौहिण मुहूर्त को श्राद्ध कर्म के लिए शुभ माना जाता है।

 

तर्पण और पिंडदान की परंपरा
द्वितीया श्राद्ध में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। धार्मिक परंपराओं में तिल और सत्तू का विशेष महत्व बताया गया है। सत्तू में तिल मिलाकर पितरों को अर्पित करने की परंपरा भी है। इसके अलावा पंचबली के तहत देवता, गाय, कुत्ता, कौआ और चींटी के लिए भोजन का हिस्सा निकालने की परंपरा बताई गई है।

पितृ दोष से राहत की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में श्राद्ध और तर्पण को पितरों की संतुष्टि से जोड़ा गया है। ऐसी मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में इसे पितृ दोष से राहत से भी जोड़ा जाता है।

 

श्राद्ध में इन बातों का रखें ध्यान
श्राद्ध कर्म शांत मन और श्रद्धा के साथ करने की परंपरा है। इस दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखने, सात्विक भोजन तैयार करने और पितरों के नाम पर दान करने को भी कई परंपराओं में महत्वपूर्ण माना गया है। द्वितीया श्राद्ध उन परिवारों के लिए विशेष माना जाता है, जिनके किसी पूर्वज की मृत्यु द्वितीया तिथि को हुई हो।

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Dev Kapoor

Dev Kapoor

1 दिन पहले

Kundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.

Vivaan Gupta

Vivaan Gupta

1 दिन पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Navya Nair

Navya Nair

1 दिन पहले

Ishwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.

Sonu rai

Sonu rai

1 दिन पहले

Graha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.

Arjun Singh

Arjun Singh

1 दिन पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Sai Mehta

Sai Mehta

1 दिन पहले

Yeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

1 दिन पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

1 दिन पहले

Dharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.

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