Radha Ashtami 2026: Puja Vidhi, Bhog and Mantra: राधा अष्टमी आज, जानें पूजा विधि, भोग और मंत्र

राधा अष्टमी आज, जानें पूजा विधि, भोग और मंत्र
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Ananya Sharma

Ananya Sharma

0 सेकंड पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

Shruti Bajpai

Shruti Bajpai

0 सेकंड पहले

Yeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!

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राधा अष्टमी आज
राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और इसे राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में श्रद्धा के साथ मनाने की परंपरा है।

अष्टमी तिथि का समय
पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे शुरू हुई और 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे समाप्त होगी। राधा अष्टमी पर मध्याह्न काल में पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। स्थान के अनुसार पूजा के सटीक समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

पूजा की सरल विधि
पूजा के लिए घर के मंदिर में चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करने के बाद चंदन, रोली, कुमकुम, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ राधा-कृष्ण की पूजा और मंत्र जाप करें।
 

पूजा सामग्री
राधा अष्टमी की पूजा में पीले फूल, ताजे पत्ते, रोली, कुमकुम, चंदन, धूप, दीप, फल, मिठाई और जल रखा जा सकता है। अभिषेक के लिए पंचामृत का उपयोग भी किया जाता है। पूजा सामग्री परिवार की परंपरा के अनुसार रखी जा सकती है।

राधा रानी का भोग
मान्यता के अनुसार राधा रानी को मिठाई, फल, खीर, अरबी की सब्जी और पान का पत्ता भोग में अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटा जा सकता है।

राधा अष्टमी के मंत्र
पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार राधा रानी के मंत्रों का जाप कर सकते हैं। इनमें “ॐ राधायै नमः”, “ॐ ह्रीं राधिकायै नमः” और “राधे-राधे” जैसे मंत्र शामिल हैं।

व्रत और पूजा का महत्व
राधा अष्टमी पर कई भक्त व्रत रखते हैं और राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा करते हैं। भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और मंदिर दर्शन भी इस पर्व की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल हैं। बरसाना और वृंदावन में इस अवसर पर विशेष भक्तिमय आयोजन होते हैं।

दोपहर में पूजा की परंपरा
राधा अष्टमी की पूजा के लिए मध्याह्न समय को विशेष माना जाता है। पंचांग के अनुसार अलग-अलग शहरों में मध्याह्न पूजा का समय अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार सटीक मुहूर्त देखना उचित रहता है।

राधा-कृष्ण भक्ति का पर्व
राधा अष्टमी को भगवान कृष्ण और राधा रानी के प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करने के विशेष अवसर के रूप में मनाया जाता है। भक्त इस दिन पूजा, व्रत, भजन और कीर्तन के माध्यम से धार्मिक आस्था प्रकट करते हैं।

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