Sunday Puja: Worship Surya Dev, Vishnu: रविवार को सूर्यदेव के साथ इन 3 देवी-देवताओं की पूजा भी शुभ

Navya Nair
5 दिन पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Shruti Bajpai
5 दिन पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Simran Arora
5 दिन पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Nisha Shah
5 दिन पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Ada khan
5 दिन पहलेDharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.
Krishna Yadav
5 दिन पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Kabir Shukla
5 दिन पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
रविवार की पूजा का महत्व
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में सप्ताह के अलग-अलग दिन विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित माने जाते हैं। रविवार को मुख्य रूप से सूर्यदेव की उपासना का दिन माना जाता है। इसके अलावा भगवान विष्णु, माता दुर्गा और बाबा काल भैरव की पूजा की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।
सूर्यदेव की पूजा विधि
रविवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सूर्यदेव को जल अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार तांबे के पात्र से जल चढ़ाते समय सूर्यदेव का स्मरण और मंत्र जाप किया जाता है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार लाल फूल और अन्य पूजन सामग्री भी अर्पित कर सकते हैं।
भगवान विष्णु की आराधना
रविवार को भगवान विष्णु की पूजा करने की भी धार्मिक परंपरा बताई गई है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल और फल अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु विष्णु मंत्र का जाप करते हुए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
मां दुर्गा की पूजा
रविवार के दिन मां दुर्गा की आराधना करने की भी मान्यता है। श्रद्धालु माता को लाल फूल अर्पित कर सकते हैं और दुर्गा मंत्र का जाप कर सकते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार देवी की उपासना के माध्यम से शक्ति और आत्मविश्वास की कामना की जाती है।
काल भैरव की उपासना
बाबा काल भैरव को भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है। रविवार को उनकी पूजा करने की भी कुछ धार्मिक परंपराओं में विशेष मान्यता बताई गई है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार काल भैरव का स्मरण करते हुए मंत्र जाप कर सकते हैं।
आस्था के अनुसार करें पूजा
रविवार को सूर्यदेव के साथ भगवान विष्णु, मां दुर्गा और काल भैरव की पूजा से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए पूजा की विधि और मंत्रों का पालन अपनी धार्मिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार करना उचित माना जाता है।







