POCSO Marriage Debate: नाबालिग पत्नी पर POCSO को लेकर बड़ा फैसला

नाबालिग पत्नी पर POCSO को लेकर बड़ा फैसला
प्रतिक्रियाएँ
Priya Iyer

Priya Iyer

1 घंटे पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

3 घंटे पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

Dev Kapoor

Dev Kapoor

3 घंटे पहले

Hum is cause ke saath hain!

Vaishali shinde

Vaishali shinde

4 घंटे पहले

Yeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

6 घंटे पहले

Logon ki madad karna hi asli dharam hai.

Rohan Desai

Rohan Desai

7 घंटे पहले

Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

8 घंटे पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Kavya Mishra

Kavya Mishra

8 घंटे पहले

Yeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.

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दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत वैध मानी जाने वाली शादी का दावा, 18 साल से कम उम्र की पत्नी से यौन संबंध के मामले में POCSO कानून के तहत आपराधिक जिम्मेदारी से स्वतः छूट नहीं देता। अदालत ने कहा कि पर्सनल लॉ POCSO और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों को निष्प्रभावी नहीं कर सकता।

 

16 साल की लड़की से जुड़ा मामला
मामले में एक 28 वर्षीय व्यक्ति ने 16 साल 3 महीने की लड़की से शादी की थी। दंपती ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला देते हुए FIR रद्द करने की मांग की थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

 

शादी और आपराधिक कानून में अंतर
अदालत ने शादी की कथित वैधता और यौन अपराध से जुड़ी आपराधिक जिम्मेदारी को अलग-अलग कानूनी प्रश्न माना। POCSO कानून में 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को बच्चा माना गया है और ऐसे मामलों में उम्र एक महत्वपूर्ण कानूनी तथ्य है।

 

अन्य अदालतों के फैसलों का भी उल्लेख
अदालत के सामने ऐसे पुराने फैसलों का भी संदर्भ आया जिनमें विभिन्न हाईकोर्टों ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और POCSO के संबंध को अलग-अलग तरीके से देखा था। हालिया न्यायिक रुख में पर्सनल लॉ को POCSO के ऊपर प्राथमिकता देने के तर्क को स्वीकार नहीं किया गया है।

 

कानूनी विवाद का व्यापक पहलू
नाबालिगों से जुड़े मामलों में अदालतों के सामने बाल संरक्षण कानून और किशोर संबंधों से जुड़े अलग-अलग तथ्य आते रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के कुछ मामलों में POCSO कार्यवाही को परिस्थितियों के आधार पर अलग तरीके से देखा गया है, इसलिए प्रत्येक मामले के तथ्य और परिस्थितियां महत्वपूर्ण रहती हैं।

 

कानून में बदलाव पर बहस
इस फैसले ने बाल विवाह, व्यक्तिगत कानून और POCSO के बीच मौजूद कानूनी सवालों पर बहस को फिर सामने ला दिया है। अदालत के हालिया फैसले का मुख्य संदेश यह है कि किसी विवाह को व्यक्तिगत कानून के तहत मान्यता मिलने का दावा, 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति से जुड़े POCSO आरोपों को स्वतः समाप्त नहीं करता।

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Priya Iyer

Priya Iyer

1 घंटे पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Tanya Bajaj

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3 घंटे पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

Dev Kapoor

Dev Kapoor

3 घंटे पहले

Hum is cause ke saath hain!

Vaishali shinde

Vaishali shinde

4 घंटे पहले

Yeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

6 घंटे पहले

Logon ki madad karna hi asli dharam hai.

Rohan Desai

Rohan Desai

7 घंटे पहले

Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

8 घंटे पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Kavya Mishra

Kavya Mishra

8 घंटे पहले

Yeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.

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