लखनऊ NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, आतंकी समर्थक दोषी: ISIS समर्थक राकिब अंसारी को 5 साल की सजा

ISIS समर्थक राकिब अंसारी को 5 साल की सजा
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Aarav Sharma

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0 सेकंड पहले

Apradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!

Sonu rai

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0 सेकंड पहले

Society ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.

Sai Mehta

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Apradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!

Arjun Singh

Arjun Singh

0 सेकंड पहले

Aise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.

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लखनऊ NIA कोर्ट का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित विशेष NIA अदालत ने देश विरोधी आतंकी साजिश के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए ISIS समर्थक राकिब इमाम अंसारी को 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर ₹6,000 का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामले में जांच एजेंसियों की बड़ी न्यायिक सफलता माना जा रहा है।


आरोपी ने अदालत में खुद कबूला अपना जुर्म
सुनवाई के दौरान राकिब इमाम अंसारी ने अदालत के समक्ष अपना अपराध स्वीकार कर लिया। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और आरोपी के दोष स्वीकार करने के बाद विशेष NIA न्यायालय ने उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) समेत संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।


2023 में UP ATS ने किया था अलीगढ़ मॉड्यूल का खुलासा
यह मामला नवंबर 2023 का है, जब उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने खुफिया सूचना के आधार पर अलीगढ़ से जुड़े ISIS मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था। जांच में सामने आया कि राकिब इमाम अंसारी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से ISIS के फरार आतंकियों और विदेशी हैंडलरों के संपर्क में था। मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई।

 

युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की थी साजिश
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी और उसके सहयोगी देश में स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करने, युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने तथा ISIS के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इसके अलावा संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी और भविष्य में आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने के भी आरोप जांच में सामने आए। एजेंसियों ने डिजिटल साक्ष्यों और संचार रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों को मजबूत किया।


राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम न्यायिक फैसला
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आतंकवादी संगठनों के समर्थकों और उनके नेटवर्क के खिलाफ कड़ा संदेश देता है। अदालत का निर्णय यह दर्शाता है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रही है। इससे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों पर कानूनी शिकंजा और मजबूत होगा।


आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी
जांच एजेंसियों ने संकेत दिया है कि ISIS से जुड़े अन्य संदिग्ध नेटवर्क और सहयोगियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहेगी। केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और डिजिटल माध्यमों के जरिए फैलाए जा रहे कट्टरपंथी नेटवर्क पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं। इस फैसले को देश में आतंकी मॉड्यूल को कमजोर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

 

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