CBI files fresh FIR in Disha Salian case: दिशा सालियान केस में कई हाई प्रोफाइल नाम

Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
दिशा सालियान की 2020 में हुई मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने नई FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश के बाद हुई, जिसमें CBI को मामले की जांच अपने हाथ में लेने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने पहले की जांच में सामने आए सवालों और छह साल तक FIR दर्ज नहीं होने के मुद्दे पर भी ध्यान दिया था।
हत्या और गैंगरेप के आरोपों की जांच
CBI की नई FIR में दिशा सालियान की मौत से जुड़े हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, आपराधिक साजिश और सबूतों को नष्ट या उनमें हेरफेर किए जाने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है। ये आरोप दिशा के पिता सतीश सालियान की शिकायत और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े हैं। FIR दर्ज होना इन आरोपों के सही साबित होने का निष्कर्ष नहीं है। अब CBI को उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच करनी है।
कई बड़े नाम FIR में शामिल
CBI की FIR में आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, सचिन वाजे और परम बीर सिंह समेत कई लोगों के नाम का उल्लेख है। अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों की भूमिका और मामले से जुड़े पहलुओं की जांच की जानी है। FIR में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति को आरोपी या दोषी नहीं माना जा सकता।
सीमा पाहुजा संभालेंगी जांच
CBI ने इस मामले की आगे की जांच की निगरानी वरिष्ठ अधिकारी सीमा पाहुजा को सौंपी है। पाहुजा CBI की स्पेशल क्राइम यूनिट से जुड़ी हैं और इससे पहले कई चर्चित मामलों की जांच कर चुकी हैं। एजेंसी अब पुराने रिकॉर्ड, मेडिकल और फॉरेंसिक सामग्री, डिजिटल साक्ष्यों तथा संबंधित लोगों के बयानों की नए सिरे से जांच करेगी।
दिशा और सुशांत की मौत के बीच छह दिन का अंतर
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। इसके छह दिन बाद 14 जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित आवास पर मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के समय के कारण लंबे समय से इनके बीच संभावित संबंध को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन पहले की जांचों में दोनों मामलों के बीच निर्णायक संबंध स्थापित नहीं हुआ था।
जांच से सामने आएगा आगे का सच
अब CBI दिशा सालियान की मौत की परिस्थितियों और उनके पिता की शिकायत में लगाए गए आरोपों की नए सिरे से जांच करेगी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए। इसलिए फिलहाल मामले में अंतिम निष्कर्ष या किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका को स्थापित तथ्य के रूप में कहना उचित नहीं होगा। जांच आगे बढ़ने के साथ ही स्थिति स्पष्ट होगी।








