Dhanteras 2026 Puja Guide: धनतेरस आज: पूजा का शुभ मुहूर्त और पूरी विधि जानें

Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Vihaan Patel
53 मिनट पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Sneha Menon
1 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Aditya Verma
2 घंटे पहलेIshwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.
Payal jadon
4 घंटे पहलेAaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.
धनतेरस आज: पूजा सामग्री-विधि से खरीदारी के शुभ मुहूर्त तक, जानें 7 दीये और यम दीपदान की पूरी जानकारी
धनतेरस पर पूजा सामग्री, शुभ मुहूर्त, खरीदारी और यम दीपदान की पूरी जानकारी।
धनतेरस आज (6 नवंबर 2026): आज शुक्रवार को देशभर में धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है। पांच दिवसीय दीपावली उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में पूजा और खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और झाड़ू खरीदने की परंपरा है। वहीं, शाम को यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है। अगर आप भी आज धनतेरस की पूजा करने जा रहे हैं तो जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, पूजा का सही क्रम, घर में 7 दीये रखने की जगह, खरीदारी के नियम और यम दीपदान की पूरी विधि।
धनतेरस 2026: आज पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है।
नोट: पूजा और खरीदारी के शुभ समय में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय जरूर देख लें।
धनतेरस की पूजा सामग्री: पूजन से पहले जुटा लें ये सामान
धनतेरस की पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी सामग्री एक जगह रख लें, ताकि पूजा के दौरान किसी चीज की कमी न हो।
1. चौकी स्थापना की सामग्री
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लकड़ी की चौकी
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लाल या पीला कपड़ा
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अक्षत यानी साबुत चावल
2. शुद्धिकरण की सामग्री
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पंचपात्र
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आचमनी
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गंगाजल
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गुलाब की पंखुड़ियां
3. तिलक और सुगंध की सामग्री
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रोली
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कुमकुम
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चंदन
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कलावा
4. भोग एवं नैवेद्य
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बताशे
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खीर
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पंचामृत
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पान
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लौंग
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सुपारी
5. दीपदान की सामग्री
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चार मुख वाला मिट्टी का दीपक
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सरसों का तेल
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13 मिट्टी के दीपक
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गाय का घी
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रूई की बातियां
इसके अलावा पूजा के लिए पुष्प, फल, धूप, कपूर, मिठाई, कलश और पूजा में स्थापित किए जाने वाले देवी-देवताओं की प्रतिमाएं या तस्वीरें भी रख लें।
धनतेरस पर कैसे करें पूजा? जानें सही क्रम और विधि
धनतेरस पर पूजा का शुभारंभ भगवान गणेश के पूजन से किया जाता है। इसके बाद भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। अंत में माता लक्ष्मी की आराधना और आरती करें।
1. सबसे पहले करें भगवान गणेश का पूजन
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है। इसलिए धनतेरस की पूजा में सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें। पूजा स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
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दीपक और धूप जलाएं।
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हल्दी, पुष्प, अक्षत और मोदक अर्पित करें।
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श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा का शुभारंभ करें।
गणेश मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः।
2. भगवान धन्वंतरि की पूजा करें
गणेश पूजन के बाद भगवान धन्वंतरि की आराधना करें। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। भगवान धन्वंतरि को पंचामृत अर्पित करें।
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पुष्प, अक्षत और धूप चढ़ाएं।
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परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति की कामना करें।
धन्वंतरि मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलश हस्ताय सर्वामय विनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्री महाविष्णवे नमः॥
3. भगवान कुबेर की पूजा करें
भगवान धन्वंतरि की पूजा के बाद धन के रक्षक भगवान कुबेर की आराधना करें। कुबेर जी को पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
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पूजा में सिक्के रखें।
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नए खरीदे गए सोने-चांदी के आभूषण भी पूजा में रख सकते हैं।
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परिवार की सुख-समृद्धि और धन-धान्य में वृद्धि की प्रार्थना करें।
कुबेर मंत्र:
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
4. माता लक्ष्मी की पूजा करें
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इसके बाद धन और वैभव की देवी माता लक्ष्मी की पूजा करें।
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माता लक्ष्मी को कमल के फूल, रोली और अक्षत अर्पित करें।
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मिठाई, फल और बताशे का भोग लगाएं।
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घी का दीपक जलाकर माता लक्ष्मी की आरती करें।
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घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें।
लक्ष्मी मंत्र:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
अंत में सभी देवी-देवताओं की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
धनतेरस पर घर में 7 दीये कहां-कहां जलाएं?
धनतेरस पर दीपदान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर के अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाने से सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। धनतेरस पर इन 7 स्थानों पर दीये जलाने की परंपरा है:
धनतेरस पर यम दीपक कैसे जलाएं? जानें विधि और सही दिशा
धनतेरस के दिन यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान या मुखदीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि इस दीपदान से परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा और लंबी आयु की कामना की जाती है।
परंपरा के अनुसार, यम दीपक घर के सभी सदस्यों के सोने से पहले या सोने के समय घर के बाहर जलाया जाता है। कुछ परिवारों में इसे घर के सभी सदस्यों के सो जाने के बाद जलाने की परंपरा भी है। दीपक रखने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखने की मान्यता भी प्रचलित है।
ध्यान दें: यम दीपक सात सामान्य दीपकों से अलग विशेष दीपदान है। इसे दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार के बाहर जलाया जाता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा सदियों पुरानी है। मान्यता है कि इस दिन सोना, चांदी और धातु के बर्तन खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
ध्यान दें: अगर सोना या चांदी खरीदना आपके बजट में नहीं है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप अपनी क्षमता के अनुसार कोई भी उपयोगी नई वस्तु या बर्तन खरीद सकते हैं।
धनतेरस पर क्या करें और क्या न करें?
धनतेरस पर क्या करें?
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घर की साफ-सफाई करें और मुख्य द्वार सजाएं।
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शुभ मुहूर्त में देवी-देवताओं की पूजा करें।
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अपनी क्षमता के अनुसार सोना, चांदी या बर्तन खरीदें।
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घर में मिट्टी के दीपक जलाएं।
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यमराज के नाम से दीपदान करें।
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जरूरतमंदों की मदद करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
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परिवार में प्रेम और सकारात्मक माहौल बनाए रखें।
धनतेरस पर क्या न करें?
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किसी को उधार देने से बचने की पारंपरिक मान्यता है।
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घर में लड़ाई-झगड़ा और विवाद न करें।
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शराब और मांसाहारी भोजन से बचें।
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घर में गंदगी और अंधेरा न रखें।
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नुकीली और धारदार वस्तुएं खरीदने से बचें।
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फिजूलखर्ची या दिखावे के लिए खरीदारी न करें।
धनतेरस क्यों मनाई जाती है? जानें पौराणिक कथा
धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। इसी दौरान भगवान विष्णु के अंशावतार भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं। उन्हें धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है।
इसी कारण धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। यह पर्व धन के साथ स्वास्थ्य, लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक है।
भगवान धन्वंतरि कौन हैं?
हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। वे आयुर्वेद, चिकित्सा और आरोग्य के देवता हैं। समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था, जो जीवन, स्वास्थ्य और अमरता का प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस के दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति अच्छे स्वास्थ्य, रोगों से मुक्ति और लंबी आयु की कामना करता है। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
धनतेरस का संदेश: धन के साथ स्वास्थ्य भी जरूरी
धनतेरस केवल सोना-चांदी खरीदने और धन की पूजा करने का पर्व नहीं है। भगवान धन्वंतरि की पूजा हमें अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन का महत्व समझाती है। माता लक्ष्मी और कुबेर की आराधना सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक है, जबकि यम दीपदान परिवार की लंबी आयु और सुरक्षा की प्रार्थना से जुड़ा है।
इसलिए आज धनतेरस पर धन के साथ स्वास्थ्य, परिवार की खुशहाली और जीवन में सकारात्मकता का भी स्वागत करें। आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।








