IDBI Bank Sale Row: सीतारमण बोलीं- बैंक को सुधारने में लगाए 25 हजार करोड़

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IDBI बैंक की बिक्री को लेकर सियासी बयानबाजी तेज
IDBI बैंक की बहुलांश हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स से जुड़ी कंपनी को 52,878 करोड़ रुपये में बेचने के फैसले पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार की विनिवेश नीति पर सवाल उठाते हुए बैंक कर्मचारियों के समर्थन की बात कही। इसके जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब एनडीए सरकार को IDBI बैंक मिला था, तब उसकी वित्तीय स्थिति खराब थी। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने बैंक के पुनरुद्धार के लिए 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी लगाई।
सीतारमण ने कांग्रेस शासनकाल की बैंकिंग व्यवस्था पर उठाए सवाल
राहुल गांधी की आलोचना का जवाब देते हुए निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस के शासनकाल की बैंकिंग व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय प्रभावशाली कारोबारियों को राजनीतिक संपर्कों के आधार पर कर्ज दिए जाते थे, जबकि आम नागरिकों के लिए कड़े नियम लागू होते थे। वित्त मंत्री ने इसे 'फोनबुक और रूलबुक' की व्यवस्था बताते हुए कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में राजनीतिक दबाव में कर्ज देने की व्यवस्था समाप्त की गई है।
किंगफिशर, वीडियोकॉन और ABG शिपयार्ड के कर्जों का किया जिक्र
वित्त मंत्री ने IDBI बैंक के पुराने फंसे हुए कर्जों का उल्लेख करते हुए किंगफिशर, वीडियोकॉन, ABG शिपयार्ड और विनसम जैसी कंपनियों के नाम लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कंपनियों को दिए गए कर्ज बैंक के लिए नुकसान का कारण बने। सीतारमण के अनुसार, एनडीए सरकार ने 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी डालकर बैंक की वित्तीय स्थिति सुधारने में मदद की। उन्होंने कहा कि बैंक अब विकास के अगले चरण के लिए तैयार है।
राहुल गांधी ने सरकार की विनिवेश नीति पर उठाए सवाल
इससे पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में IDBI जैसे बैंक देश के औद्योगिक विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाए गए थे, जबकि मौजूदा सरकार के दौर में सरकारी संस्थानों की हिस्सेदारी बेचने पर जोर दिया जा रहा है। राहुल गांधी ने बैंक कर्मचारियों के समर्थन में भी बयान दिया और उनके आंदोलन के साथ खड़े रहने की बात कही।
52,878 करोड़ रुपये में 60.72% हिस्सेदारी का सौदा
केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन के तहत फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की मूल कंपनी से जुड़ी कनाडाई इकाई को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी थी। इस सौदे का कुल मूल्य 52,878.08 करोड़ रुपये तय किया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48% और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी 30.24% हिस्सेदारी हस्तांतरित करेगी। इस तरह कुल 60.72% हिस्सेदारी का सौदा प्रस्तावित है।
सौदे के बाद सरकार और LIC के पास भी रहेगी हिस्सेदारी
लेनदेन पूरा होने के बाद केंद्र सरकार की IDBI बैंक में हिस्सेदारी 15% और LIC की हिस्सेदारी 19% रहने की योजना है। यानी सौदे के बाद भी दोनों की बैंक में हिस्सेदारी बनी रहेगी। सरकार के अनुसार, इस रणनीतिक पुनर्गठन का उद्देश्य बैंक को विकास के अगले चरण के लिए तैयार करना है। वहीं, राहुल गांधी और बैंक कर्मचारियों की ओर से इस फैसले को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस सौदे की प्रक्रिया और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे आगे भी चर्चा में बने रह सकते हैं।








