IT Couple Tax Fraud: आईटी प्रोफेशनल दंपति पर 5.3 करोड़ की टैक्स धोखाधड़ी का आरोप

Neel Saxena
0 सेकंड पहलेBusiness world mein yeh ek badi halachal hai.
Sneha Menon
0 सेकंड पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
आयकर विभाग की कार्रवाई में सामने आया 5.3 करोड़ का मामला
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आयकर विभाग ने गलत टैक्स दावे करने के आरोप में एक आईटी प्रोफेशनल और उनकी पत्नी के खिलाफ विशेष तलाशी अभियान चलाया। विभाग के अनुसार, इस दंपति ने पांच वर्षों के दौरान 5.3 करोड़ रुपये के कथित फर्जी दावे किए और टैक्स चोरी की।
फर्जी दस्तावेजों से किए गए टैक्स डिडक्शन के दावे
इस दंपति पर दस्तावेजों में हेराफेरी करने के आरोप भी हैं। टैक्स अधिकारियों की जांच में सामने आया कि डिडक्शन के दावों में फर्जी राजनीतिक चंदा, होम लोन और एजुकेशन लोन के ब्याज को शामिल किया गया था। इसके अलावा किराये से होने वाली आय भी छिपाई गई थी।
आधा दर्जन से ज्यादा संपत्तियां खरीदने का आरोप
जांच के अनुसार, दंपति ने कथित तौर पर गलत दावों से बचाई गई रकम का इस्तेमाल आधा दर्जन से ज्यादा संपत्तियां खरीदने में किया। मामले की शुरुआत तब हुई, जब पत्नी ने अपने टैक्स रिटर्न में एक राजनीतिक दल को दिए गए चंदे के नाम पर 40 लाख रुपये से अधिक की कटौती का दावा किया।
राजनीतिक चंदे की रसीद में मिली गड़बड़ी
पत्नी के फॉर्म 16 में लगभग 1.2 लाख रुपये की कटौती दिखाई गई थी, जबकि टैक्स रिटर्न में अतिरिक्त कटौती का दावा किया गया। जब आयकर अधिकारियों ने संबंधित राजनीतिक दल से इस दावे की पुष्टि की तो पता चला कि करदाता ने वास्तव में केवल 50 रुपये का चंदा दिया था। इसके लिए राजनीतिक दल की ओर से एक रसीद जारी की गई थी।
डिजिटल तरीके से बनाए गए फर्जी दस्तावेज
जांचकर्ताओं के अनुसार, मूल रसीद को डिजिटल तरीके से बदल दिया गया था और 40 लाख रुपये से अधिक के चंदे के दावे को सही साबित करने के लिए कई फर्जी रसीदें तैयार की गई थीं। दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले इस दंपति को जब जांच के लिए बुलाया गया तो पति ने बदली हुई रसीदों के साथ बैंक स्टेटमेंट भी जमा किए।
बैंक स्टेटमेंट में भी मिली हेराफेरी
अधिकारियों ने बैंक से जमा किए गए स्टेटमेंट की पुष्टि करने की कोशिश की, क्योंकि लेनदेन के आंकड़े मेल नहीं खा रहे थे। जांच में आरोप लगा कि लोन भुगतान, क्रेडिट कार्ड भुगतान और बैंक ट्रांसफर, यहां तक कि अपने ही खातों में किए गए ट्रांसफर को भी राजनीतिक चंदे के रूप में दिखाने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी की गई थी।
येल यूनिवर्सिटी के एजुकेशन लोन पर 3 करोड़ का दावा
दंपति ने येल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन के ब्याज पर लगभग 3 करोड़ रुपये की कटौती का दावा किया था। इसके समर्थन में ब्याज प्रमाण पत्र भी जमा किया गया। हालांकि, जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि दंपति के परिवार का कोई भी सदस्य कभी येल यूनिवर्सिटी में नहीं पढ़ा था। विभाग के अनुसार, यह प्रमाण पत्र ChatGPT की मदद से तैयार किया गया था।
हाउसिंग लोन के फर्जी दावे का मामला
दंपति ने कथित तौर पर फर्जी हाउसिंग लोन का दावा भी किया था। दोनों ने खुद को एक ही प्रॉपर्टी का अलग-अलग इकलौता मालिक बताया था, जबकि बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि संपत्ति संयुक्त रूप से उनके नाम पर थी। जांच में यह भी सामने आया कि संपत्ति में वे खुद नहीं रहते थे, बल्कि उसे किराये पर दिया गया था।
किराये की आय और ब्याज के दावों में अंतर
टैक्स रिटर्न में एक जीवनसाथी ने शून्य किराये की आय और 2 लाख रुपये के ब्याज भुगतान का दावा किया था, जबकि दूसरे ने 5 लाख रुपये तक की ब्याज आय का दावा किया। टैक्स रिटर्न में लोन अकाउंट नंबर और बैंक की जानकारी देने की अनिवार्यता के बावजूद एक मामले में बैंक का नाम बदल दिया गया। साथ ही लोन की राशि बढ़ाकर 6 करोड़ रुपये दिखाई गई और उस पर 8 लाख रुपये के ब्याज का दावा किया गया।
पुराना लोन दिखाकर किया गया दावा
जांच में पता चला कि संबंधित लोन वर्ष 2015 में ही चुका दिया गया था, जबकि विवादित दावे वित्त वर्ष 2021-22 से शुरू होने वाली अवधि के थे। इस दौरान संपत्ति से 10 से 16 लाख रुपये तक का किराया प्राप्त हो रहा था।
धारा 80GGC के दावे में भी बदलाव
मामले की शुरुआती जांच के दौरान पति ने धारा 80GGC के तहत राजनीतिक चंदे की कटौती के दावे को वापस लेने के बजाय उसे धारा 80G के तहत चैरिटी को दिए गए चंदे के दावे में बदल दिया। अब आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद दंपति को जुर्माने और अन्य कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।








