Crude Oil Prices Fall: अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद कच्चे तेल में बड़ी गिरावट

Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेShare market pe nazar rakhna zaroori ho gaya hai.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेEconomy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.
Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
अमेरिकी चुनाव नतीजों का तेल बाजार पर असर
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव नतीजों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा सियासी झटका लगा है, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में अपनी स्थिति मजबूत की है। इस राजनीतिक बदलाव का असर दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में दिखाई दिया और कच्चे तेल की कीमतों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10% गिरावट
चुनावी नतीजों के बाद कच्चे तेल के बाजार में लगभग 10 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी क्रूड ऑयल यानी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का भाव करीब 10 फीसदी टूटकर 87.68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत में भी भारी कमी देखने को मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड पहले 94.08 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 93.40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया और इसमें 9.20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
ईरान से बातचीत की उम्मीद ने बदला बाजार का रुख
तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिकी घरेलू राजनीति के साथ विदेश नीति से जुड़ी उम्मीदें भी अहम मानी जा रही हैं। बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी की मजबूत स्थिति से अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव की संभावना बन सकती है। निवेशकों को उम्मीद है कि नई राजनीतिक परिस्थितियों में अमेरिका ईरान के साथ बातचीत का रास्ता खोल सकता है।
तेल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद
यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बनी चिंताएं कम हो सकती हैं। बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद ने कीमतों पर दबाव डालने में अहम भूमिका निभाई है।
शेयर बाजारों को मिल सकती है राहत
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट दुनियाभर के शेयर बाजारों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। महंगे तेल के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर महंगाई का दबाव बढ़ रहा था। अब कीमतों में कमी से वैश्विक बाजार के निवेशकों को राहत मिली है।
पश्चिम एशिया का तनाव अब भी चुनौती
तेल बाजार के सामने अभी सभी चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिकी सरकार की विदेश नीति और ईरान के साथ उसके संभावित संवाद पर बाजार की नजर रहेगी।
आगे क्या रहेगा तेल बाजार का रुख?
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट आगे भी जारी रहेगी या नहीं, यह कई अहम घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। अमेरिका के अगले कदम, ईरान के साथ बातचीत की संभावनाएं और पश्चिम एशिया की स्थिति आने वाले समय में तेल की सप्लाई और कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।








