64 हजार डॉलर के नीचे फिसला बिटकॉइन: फेडरल रिजर्व के फैसले से बढ़ी बाजार की चिंता

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेBusiness world mein yeh ek badi halachal hai.
Sonu rai
0 सेकंड पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Arjun Singh
0 सेकंड पहलेShare market pe nazar rakhna zaroori ho gaya hai.
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेChhote vyapariyon ko bahut nuksan hoga isse.
Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक से पहले वैश्विक निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण जोखिम वाले निवेशों से पैसा निकल रहा है। इसका सीधा असर बिटकॉइन समेत पूरे क्रिप्टो बाजार पर दिखाई दिया। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार में दबाव बढ़ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि फेड का फैसला आने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
बिटकॉइन 64 हजार डॉलर के नीचे पहुंचा
दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन 64,000 डॉलर के अहम स्तर से नीचे फिसल गई। फिलहाल इसकी कीमत लगभग 63,600 से 63,800 डॉलर के बीच कारोबार करती देखी गई। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार 55,000 डॉलर का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। हालांकि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए बाजार का दृष्टिकोण अभी भी सकारात्मक बताया जा रहा है।
एथेरियम में भी दिखा सीमित उतार-चढ़ाव
बिटकॉइन की गिरावट का असर एथेरियम पर भी देखने को मिला। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी करीब 1,900 डॉलर के आसपास कारोबार करती रही। हालांकि इसमें भारी गिरावट नहीं आई, लेकिन निवेशकों ने नई खरीदारी करने में सावधानी बरती। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े आर्थिक फैसलों के बाद ही इसमें नई दिशा देखने को मिलेगी।
AI शेयरों में बिकवाली का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टेक कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और जोखिम वाले एसेट्स पर दबाव बढ़ गया। क्रिप्टोकरेंसी भी इसी श्रेणी में आने के कारण इसकी कीमतों पर नकारात्मक असर पड़ा। विशेषज्ञ इसे वैश्विक निवेश भावना में बदलाव का संकेत मान रहे हैं।
भारत में क्रिप्टो रिपोर्टिंग के नियम हुए सख्त
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने सभी क्रिप्टो एक्सचेंजों और ब्रोकरों के लिए हर ट्रांजैक्शन की जानकारी आयकर विभाग को उपलब्ध कराना अनिवार्य कर दिया है। यह कदम क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) के तहत उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल परिसंपत्तियों में पारदर्शिता बढ़ाना और टैक्स चोरी पर रोक लगाना है।
टैक्स नियम बरकरार, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्रिप्टोकरेंसी पर लागू मौजूदा कर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से होने वाले लाभ पर 30% टैक्स और 1% TDS पहले की तरह लागू रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए।








