₹250 करोड़ का फर्जी आयुर्वेदिक दवा घोटाला: ₹250 करोड़ का रैकेट,19 आरोपी गिरफ्तार

Anika Rajput
25 मिनट पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Nidhi kumari
44 मिनट पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Dhruv Bhatt
3 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Kavya Mishra
3 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Aditya Verma
4 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Trapti Tanwar
4 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Aarav Sharma
4 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Taushif Shekh
4 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Vaishali shinde
7 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Yash Kulkarni
8 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Ritika Ghosh
8 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Neel Saxena
9 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Nidhi kumari
9 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Shruti Bajpai
9 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
₹250 करोड़ के फर्जी आयुर्वेदिक दवा घोटाले का भंडाफोड़, गुजरात CID ने 19 आरोपियों को किया गिरफ्तार,अहमदाबाद से चल रहा था देशव्यापी साइबर ठगी का नेटवर्क, गुजरात CID की साइबर क्राइम सेल ने अहमदाबाद से संचालित एक बड़े पैन-इंडिया फर्जी आयुर्वेदिक दवा और ब्लैकमेलिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान मुख्य सरगना समेत 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि गिरोह ने देशभर में करीब 5,000 लोगों को निशाना बनाकर ₹250 करोड़ से अधिक का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन किया।
सोशल मीडिया विज्ञापनों से फंसाते थे शिकार
आरोपी फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यौन स्वास्थ्य और गुप्त रोगों के इलाज के नाम पर फर्जी आयुर्वेदिक दवाओं के आकर्षक विज्ञापन चलाते थे। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों को कॉल सेंटर से खुद को डॉक्टर बताने वाले कर्मचारी सलाह देते और महंगी दवाएं बेचते थे।
फर्जी पुलिस बनकर करते थे ब्लैकमेल
दवा भेजने के कुछ दिन बाद गिरोह का दूसरा नेटवर्क सक्रिय होता था। आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर या कस्टम अधिकारी बताकर पीड़ितों को फोन करते और दावा करते कि दवा में प्रतिबंधित पदार्थ मिला है। कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर वे मामला रफा-दफा करने के नाम पर लाखों रुपये वसूल लेते थे।
₹250 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन, हजारों लोग बने शिकार
CID की वित्तीय जांच में पता चला कि ठगी की रकम को देशभर में फैले सैकड़ों फर्जी बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया जाता था। अब तक करीब ₹250 करोड़ का संदिग्ध टर्नओवर सामने आया है। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि 4,000 से 5,000 लोग इस संगठित साइबर ठगी का शिकार हुए हैं।
मुख्य मास्टरमाइंड समेत 19 गिरफ्तार
पुलिस ने उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी मुख्य सरगना देवेंद्र सिंह राजावत सहित कुल 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सिम कार्ड, पीड़ितों का डिजिटल डेटा, बैंक दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
CID की अपील—डरें नहीं, तुरंत करें शिकायत
गुजरात CID ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले अनधिकृत चिकित्सा विज्ञापनों से सावधान रहें। यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे की मांग करता है या कानूनी कार्रवाई की धमकी देता है, तो घबराने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।








