भारत-रूस की बड़ी बैठक: विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई मुलाकात

विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई मुलाकात
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Diya Gupta

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Nishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.

Pihu Agarwal

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Yeh news bahut zaroori hai public ke liye.

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। मॉस्को में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई मुलाकात के बाद पुतिन के भारत दौरे को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। भारत इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की मेजबानी Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability थीम के तहत कर रहा है। पुतिन की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। BRICS सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। रूसी राष्ट्रपति की मौजूदगी से सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों पर भी विशेष ध्यान रहने की संभावना है। साल के अंत में दोनों देशों के बीच अलग वार्षिक द्विपक्षीय शिखर वार्ता होने की भी संभावना जताई जा रही है।


पीएम मोदी का विशेष संदेश पुतिन तक पहुंचाया
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 24 अगस्त 2026 को मॉस्को के क्रेमलिन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत संदेश और शुभकामनाएं रूसी राष्ट्रपति तक पहुंचाईं। बैठक में भारत की ओर से आगामी BRICS शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन का स्वागत किया गया। जयशंकर ने भारत में होने वाले सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आने पर पुतिन का स्वागत करने की बात कही। मुलाकात में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी बातचीत हुई। भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संपर्क को लगातार मजबूत करने पर दोनों पक्षों ने जोर दिया। सितंबर में होने वाला BRICS सम्मेलन दोनों नेताओं के बीच आगे की महत्वपूर्ण बातचीत का मंच बन सकता है।


100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और रूस ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मॉस्को में हुई बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए नए क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों देश व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक साझेदारी का दायरा बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऊर्जा, उर्वरक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग भारत-रूस संबंधों का अहम हिस्सा बना हुआ है। 2030 का व्यापार लक्ष्य हासिल करने के लिए दोनों देशों को आपसी व्यापार और निवेश को और बढ़ाना होगा। आगामी उच्चस्तरीय बैठकों में आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति तय हो सकती है।

 

तेल और खाद की सप्लाई पर बड़ा भरोसा
भारत और रूस के बीच बैठक में ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। रूस ने भारत को कच्चे तेल और फर्टिलाइजर्स की आपूर्ति को लगातार जारी रखने का भरोसा दिया है। भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरकों की नियमित उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहीं रूस से मिलने वाली ऊर्जा आपूर्ति भारत की आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए अहम है। वैश्विक तनाव और बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच दोनों देशों ने आपूर्ति सहयोग पर जोर दिया। भारत रूस के साथ अपनी ऊर्जा साझेदारी को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। उर्वरक और ऊर्जा क्षेत्र में लगातार सहयोग दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है।


कुडनकुलम और हाईटेक सहयोग पर चर्चा
जयशंकर और पुतिन की बैठक में परमाणु ऊर्जा और हाईटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना के विस्तार से जुड़ी प्रगति पर संतोष जताया। भारत और रूस लंबे समय से नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। बैठक में हाईटेक्नोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। परमाणु ऊर्जा और तकनीकी सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में नई परियोजनाओं और सहयोग के अवसर सामने आ सकते हैं। इससे भारत-रूस संबंधों को पारंपरिक क्षेत्रों से आगे आधुनिक तकनीक तक विस्तार देने में मदद मिलेगी।


नई दिल्ली में सजेगा 18वां BRICS मंच
भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस बार सम्मेलन की थीम Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability रखी गई है। सम्मेलन में BRICS देशों के शीर्ष नेताओं के बीच वैश्विक और आर्थिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित अन्य प्रमुख वैश्विक नेताओं के भी नई दिल्ली पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। पुतिन की मौजूदगी से सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों और वैश्विक कूटनीति पर विशेष नजर रहेगी। BRICS मंच पर आर्थिक सहयोग, नवाचार, विकास और वैश्विक चुनौतियों जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। पुतिन का भारत दौरा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के साथ BRICS की भूमिका के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

 

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