शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी कमजोर: वैश्विक तनाव का बाजार पर असर

वैश्विक तनाव का बाजार पर असर
प्रतिक्रियाएँ
Nidhi kumari

Nidhi kumari

0 सेकंड पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

CommentsReactionsFeedback

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। बीएसई सेंसेक्स 73.62 अंक की गिरावट के साथ 77,295.49 के स्तर पर खुला और शुरुआती कारोबार में इसकी गिरावट बढ़कर 150 से 200 अंकों से अधिक हो गई। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 भी 43.30 अंक टूटकर 24,175.75 के स्तर पर खुला और शुरुआती सत्र में 24,150 के स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों के बीच फिलहाल सावधानी का माहौल बना हुआ है।


अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई बाजार की चिंता
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ गया है। ऐसे माहौल में वैश्विक निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर सकते हैं। इसका असर एशियाई बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसी चिंता के कारण घरेलू बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव दिखाई दिया।


92 डॉलर के आसपास पहुंचा ब्रेंट क्रूड
कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती ने भी भारतीय शेयर बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल महंगा होने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची रहने पर महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशक तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

 

F&O एक्सपायरी से पहले निवेशक सतर्क
बाजार में उतार-चढ़ाव का एक अन्य कारण निफ्टी 50 डेरिवेटिव्स की मासिक एक्सपायरी से पहले निवेशकों की सतर्कता है। एक्सपायरी के आसपास बाजार में कारोबार और उतार-चढ़ाव सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखने को मिल सकता है। ऐसे समय में ट्रेडर्स अपनी पोजीशन को एडजस्ट करते हैं और कई निवेशक नई खरीदारी करने के बजाय बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करते हैं। वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच एक्सपायरी का दबाव बाजार की अस्थिरता को और बढ़ा रहा है। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला।


मेटल, IT और ऑटो शेयरों पर दबाव
सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो शुरुआती सत्र में मेटल, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर मेटल कंपनियों की मांग और कीमतों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है। वहीं आईटी कंपनियों पर वैश्विक बाजारों और विदेशी मांग से जुड़े जोखिमों का असर पड़ता है। ऑटो सेक्टर में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और कई शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। बाजार की दिशा स्पष्ट नहीं होने के कारण अलग-अलग सेक्टरों में खरीदारी के बजाय चुनिंदा शेयरों पर ही निवेशकों का ध्यान केंद्रित रहा।


बाजार में आगे भी जारी रह सकता है उतार-चढ़ाव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है और क्रूड ऑयल लगातार महंगा बना रहता है तो भारतीय बाजार में दबाव कायम रह सकता है। इसके अलावा F&O एक्सपायरी के कारण भी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञ निवेशकों को मौजूदा अस्थिर माहौल में जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय कंपनियों के मजबूत फंडामेंटल और बाजार की दिशा को ध्यान में रखने की सलाह दे रहे हैं। फिलहाल सेंसेक्स और निफ्टी में कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

 

प्रतिक्रियाएँ
Nidhi kumari

Nidhi kumari

0 सेकंड पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

CommentsReactionsFeedback

खबरे और भी है...